पूर्व सीडीएस अनिल चौहान ने पाकिस्तान को बड़ा खतरा बताया
तीन सेनाओं के पूर्व प्रमुख ने मक्का रक्षा समझौते के बाद भारत को सतर्क रहने की सलाह दी
पूर्व सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने पाकिस्तान को भारत के लिए आगामी समय में बड़ा सुरक्षा खतरा बताया है और सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आमने-सामने की जंग से बचकर आतंकवाद और छद्म युद्ध का सहारा लेता है और सीमा विवाद और आतंकवाद सहित कई सुरक्षा चुनौतियां बनी हुई हैं। उन्होंने चीन को भी एक चुनौती बताया और कहा कि सीमा तनाव के बावजूद बातचीत जरूरी है।
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पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने कहा है कि पाकिस्तान आने वाले समय में भारत के लिए एक बड़ा सुरक्षा खतरा बना रहेगा। उन्होंने मक्का में हुए साझा रक्षा समझौते के बाद पाकिस्तान में अति आत्मविश्वास पैदा होने की आशंका जताई और सतर्क रहने की जरूरत बताई।
तीन मूर्ति भवन में आयोजित कार्यक्रम में 'भारत की सुरक्षा के लिए खतरे और चुनौतियां' विषय पर बोलते हुए जनरल चौहान ने कहा कि पाकिस्तान आगे भी भारत के लिए एक बड़ा सुरक्षा चिंता का विषय रहेगा। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान आमने-सामने की जंग से बचता है और आतंकवाद तथा छद्म युद्ध का सहारा लेता है।
उन्होंने कहा, "आपरेशन सिंदूर, सिंधु जल समझौते के निलंबन और कुछ अन्य व्यावहारिक कदम उठाए जाने से उम्मीद थी कि पाकिस्तान के व्यवहार में बदलाव आएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।"
पूर्व सीडीएस ने कहा कि भारत के बाहरी सुरक्षा वातावरण में अनसुलझी सीमाएं, सीमा पार आतंकवाद, गैर-राज्य तत्व, विवादित क्षेत्र, ग्लोबल कॉमन्स और अंतरिक्ष, साइबर तथा समुद्री क्षेत्रों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा शामिल हैं। उन्होंने आगाह किया कि केवल किसी एक आतंकी गुट को कमजोर करने से खतरा खत्म नहीं होगा, क्योंकि आतंकवाद की सोच, फंडिंग और प्रचार का पूरा तंत्र अभी भी सक्रिय है।
चौहान ने चीन को भी लंबे समय से भारत के लिए चुनौती बताया और कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर साझा परिभाषा न होने और सीमा विवाद न सुलझने की वजह से तनाव बना रहता है। उन्होंने कहा, "चीन के साथ बातचीत और संपर्क बनाए रखना जरूरी है, लेकिन पाकिस्तान से सतर्क रहना होगा।" उन्होंने SCO और BRICS जैसे मंचों के जरिए बातचीत जारी रखने की बात कही।
उन्होंने बताया कि हाल ही में कुछ समझौते हुए हैं, जिन पर दस्तखत किए गए हैं, लेकिन कभी-कभी ये पाकिस्तान में जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वास पैदा कर देते हैं। चौहान ने कहा, "इस खतरे को रोकने का एकमात्र रास्ता हमारी सेना का इतना कड़ा और ताकतवर जवाब देना है कि दुश्मन दोबारा हिम्मत न कर सके।"
पाकिस्तान आगे भी भारत के लिए एक बड़ा सिक्योरिटी कंसर्न बना रहेगा.
जनरल अनिल चौहान, पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ
सीमा पर स्थिरता बनाए रखने के लिए सतर्कता, भरोसेमंद क्षमताएं, स्पष्ट समझौते और उनका लगातार पालन जरूरी है
जनरल अनिल चौहान, पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- भारत के सुरक्षा वातावरण में और कौन-कौन सी चुनौतियां हैं?
- अनसुलझी सीमाएं, गैर-राज्य तत्व, विवादित क्षेत्र, ग्लोबल कॉमन्स, अंतरिक्ष, साइबर और समुद्री क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा शामिल हैं।
- भारत पाकिस्तान के खतरे से कैसे निपट सकता है?
- पूर्व सीडीएस ने कहा कि सेना का कड़ा और ताकतवर जवाब देना जरूरी है ताकि दुश्मन हिम्मत न कर सके।
- क्या साझा रक्षा समझौते से कोई असर पड़ा है?
- कुछ समझौते हुए हैं, पर ये कभी-कभी पाकिस्तान में अधिक आत्मविश्वास पैदा कर देते हैं।
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