ईडी ने 30 लोगों को नोटिस जारी कर 3 करोड़ की वसूली की जांच तेज की
कोचिंग संचालक और मेडिकल ऑफिसर के कथित नेटवर्क सहित कई लोगों से पूछताछ जारी
छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग भर्ती घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय ने लगभग 30 लोगों को नोटिस जारी कर पूछताछ की प्रक्रिया तेज की है। एजेंसी ने आरोप लगाया है कि अभ्यर्थियों से तीन करोड़ रुपये से अधिक वसूलने का एक नेटवर्क बनाया गया था और इस रकम के स्रोत व उपयोग की जांच की जा रही है। जांच में कई अधिकारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों से वित्तीय लेनदेन और कथित रिश्वत के संबंध में जानकारी प्राप्त की जा रही है।
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एक नज़र में
- ईडी ने CGPSC भर्ती घोटाले की जांच में लगभग 30 लोगों को नोटिस जारी किए हैं।
- कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर और मेडिकल ऑफिसर डॉ. विकास चंद्राकर पर अभ्यर्थियों से 3 करोड़ से अधिक वसूलने का आरोप है।
- ईडी CSR फंड के कथित दुरुपयोग और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है।
- जमानत पर बाहर चल रहे आरोपियों को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया गया है।
- जांच में भर्ती प्रक्रिया के धनशोधन और नेटवर्क की विस्तार से छानबीन की जा रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- ईडी ने इस मामले में किस पर आरोप लगाए हैं?
- ईडी ने कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर और मेडिकल ऑफिसर डॉ. विकास चंद्राकर पर अभ्यर्थियों से 3 करोड़ रुपए से अधिक वसूली का आरोप लगाया है।
- ईडी जांच में किन अन्य व्यक्तियों के नाम शामिल हैं?
- तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, उप परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर, टामन सोनवानी के भतीजे साहिल सोनवानी, नितेश सोनवानी, शशांक गोयल और उनकी पत्नी भूमिका कटियार के नाम जांच में शामिल हैं।
- ईडी किस फंड के उपयोग की जांच कर रही है?
- ईडी एक बड़ी कंपनी के कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) फंड के कथित रिश्वत भुगतान में इस्तेमाल की जांच कर रही है।
- क्या जांच केवल भर्ती प्रक्रिया तक सीमित है?
- नहीं, जांच अब भर्ती के नाम पर हुए वित्तीय लेनदेन की पूरी श्रृंखला तक विस्तारित हो गई है।
- क्या जांच में आगे भी और लोगों से पूछताछ होगी?
- हाँ, मामले में और लोगों से पूछताछ की संभावना बनी हुई है।
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छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने करीब 30 लोगों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किए हैं। एजेंसी ने आरोप लगाया है कि कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर और मेडिकल ऑफिसर डॉ. विकास चंद्राकर ने अभ्यर्थियों से तीन करोड़ रुपए से अधिक की रकम वसूल कर सरकारी नौकरी दिलाने का कथित नेटवर्क बनाया था।
ईडी अब इस रकम के स्रोत और उसके इस्तेमाल की जांच कर रही है। एजेंसी को संदेह है कि एक बड़ी कंपनी के कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) फंड का उपयोग कथित रिश्वत की रकम के भुगतान में किया गया। इसी कारण एनजीओ और रिसॉर्ट संचालकों से जुड़े वित्तीय लेनदेन भी जांच के दायरे में हैं।
जांच में शामिल नामों में तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, उप परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर, टामन सोनवानी के भतीजे साहिल सोनवानी, नितेश सोनवानी, शशांक गोयल और उनकी पत्नी भूमिका कटियार शामिल हैं। जमानत पर बाहर चल रहे आरोपियों को भी दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया गया है।
एजेंसी पूछताछ के जरिए भर्ती प्रक्रिया में कथित लेनदेन और संपर्कों की कड़ियां जोड़ने की कोशिश कर रही है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि अभ्यर्थियों से ली गई रकम किस नेटवर्क के जरिए एकत्रित हुई और यह पैसा किन लोगों तक पहुंचा।
ईडी की कोशिश है कि अलग-अलग लोगों के बयान और वित्तीय दस्तावेजों का मिलान कर कथित नेटवर्क की पूरी तस्वीर सामने लाई जा सके। बैंक खातों, नकद लेनदेन और संबंधित लोगों के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
फिलहाल जांच केवल चयन प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि भर्ती के नाम पर हुए वित्तीय लेनदेन की पूरी श्रृंखला को खंगाला जा रहा है। करीब 30 लोगों को नोटिस जारी किए जाने और जमानत पर बाहर आरोपियों को फिर से पूछताछ के लिए बुलाए जाने से जांच एक नए चरण में पहुंच गई है।
इस मामले में और लोगों से पूछताछ की संभावना भी बनी हुई है। जांच के आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि कथित रूप से भर्ती के नाम पर वसूली गई रकम का नेटवर्क कितना बड़ा था और किन लोगों की भूमिका सामने आती है।
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