बाड़मेर का 'सुरक्षा बंधन अभियान' बना राजस्थान के लिए मॉडल, विधानसभा अध्यक्ष ने महेंद्र सिंह तारातरा को किया सम्मानित
40 हजार से अधिक पशुओं को पहनाई गई रिफ्लेक्टर बेल्ट, 200 से ज्यादा गांवों में सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान; पूरे प्रदेश में 'बाड़मेर मॉडल' लागू करने की मांग
राजस्थान के बाड़मेर से शुरू हुए 'सुरक्षा बंधन अभियान' को विधानसभा अध्यक्ष ने महेंद्र सिंह तारातरा को सम्मानित किया है। इस अभियान में महेंद्र सिंह तारातरा ने 40,000 से अधिक गौवंश और अन्य जानवरों के गले में रिफ्लेक्टर सुरक्षा बेल्ट बांधा और तथा ट्रैक्टर-ट्रॉली और टैंकरों पर रिफ्लेक्टर स्टिकर लगाये, जिसके नतीजे स्वरूप सड़क दुर्घटनाएं कम हुई। उन्होंने यह काम कम खर्च में किया, जिसे राजस्थान के अन्य हिस्सों में भी अपनाया जा सकता है।
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बाड़मेर। सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के उद्देश्य से बाड़मेर से शुरू किया गया 'सुरक्षा बंधन अभियान' अब पूरे राजस्थान के लिए एक प्रेरणादायी मॉडल बनकर उभर रहा है। अभियान के संयोजक एवं समाजसेवी महेंद्र सिंह तारातरा को सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में नवाचार, जनभागीदारी और उल्लेखनीय योगदान के लिए जयपुर में आयोजित एक समारोह में राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष ने सम्मानित किया।
कम लागत में सड़क सुरक्षा का प्रभावी मॉडल बना अभियान
देश में हर वर्ष होने वाली लाखों सड़क दुर्घटनाओं में बड़ी संख्या में लोगों की जान चली जाती है। राजस्थान भी इस चुनौती से अछूता नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार रात के समय सड़कों पर घूमने वाला निराश्रित पशुधन और बिना रिफ्लेक्टर वाले ट्रैक्टर-ट्रॉली जैसे वाहन दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
इसी समस्या के समाधान के उद्देश्य से इंडियन रूरल डेवलपमेंट एंड अवेयरनेस सोसायटी (IRDAS) के माध्यम से महेंद्र सिंह तारातरा ने 'सुरक्षा बंधन अभियान' की शुरुआत की, जो आज जनआंदोलन का स्वरूप ले चुका है।
40 हजार से अधिक पशुओं को पहनाई गई रिफ्लेक्टर बेल्ट
अभियान के तहत अब तक 40 हजार से अधिक निराश्रित गौवंश एवं अन्य पशुओं के गले में रिफ्लेक्टर सुरक्षा बेल्ट बांधी जा चुकी हैं। इसके अलावा हजारों ट्रैक्टर-ट्रॉली और टैंकरों पर रिफ्लेक्टर स्टिकर लगाए गए हैं, ताकि रात के समय उनकी दृश्यता बढ़े और सड़क दुर्घटनाओं की आशंका कम हो।
200 से अधिक गांवों में पहुंचा सड़क सुरक्षा का संदेश
सड़क सुरक्षा के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के लिए महेंद्र सिंह तारातरा और उनकी टीम ने 3,000 किलोमीटर से अधिक की यात्रा कर 200 से अधिक गांवों एवं कस्बों में लोगों को जागरूक किया। अभियान के दौरान ग्रामीणों से अपने पशुओं के गले में रिफ्लेक्टर बेल्ट लगाने, ट्रैक्टर-ट्रॉली पर रिफ्लेक्टर लगाने तथा यातायात नियमों का पालन करने की अपील की गई।
'यह सम्मान पूरे बाड़मेर और स्वयंसेवकों का है'
सम्मान प्राप्त करने के बाद महेंद्र सिंह तारातरा ने कहा कि यह उपलब्धि किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि बाड़मेर की जनता, स्वयंसेवकों और सड़क सुरक्षा के लिए कार्य करने वाले प्रत्येक नागरिक के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। उन्होंने कहा कि बाड़मेर में विकसित यह मॉडल कम लागत वाला, व्यवहारिक और प्रभावी है, जिसे प्रदेशभर में अपनाया जा सकता है।
पूरे राजस्थान में लागू हो 'बाड़मेर मॉडल'
महेंद्र सिंह तारातरा ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि 'बाड़मेर मॉडल' को पूरे राजस्थान में लागू किया जाए। उनका कहना है कि यदि प्रत्येक जिले में निराश्रित पशुओं को रिफ्लेक्टर बेल्ट पहनाने और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर रिफ्लेक्टर लगाने का अभियान चलाया जाए तो सड़क दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है और हर वर्ष अनेक लोगों की जान बचाई जा सकती है।
बाड़मेर से शुरू हुई यह जनहित की पहल अब प्रदेश स्तर पर पहचान बना चुकी है। सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में इसे एक प्रभावी और जनभागीदारी आधारित मॉडल के रूप में देखा जा रहा है, जिससे भविष्य में राज्यव्यापी अभियान का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।
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