बाड़मेर में भाजपा ने 15 साल बाद बहुमत हासिल किया
55 वार्डों में भाजपा को 29 सीटें, कांग्रेस को 21 और निर्दलीयों को 5 सीटें मिलीं
बाड़मेर नगर परिषद चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी ने 29 सीटों के साथ 15 साल बाद बहुमत हासिल किया है, जबकि कांग्रेस को 21 और निर्दलीयों को 5 सीटें मिलीं। भाजपा के बहुमत के कारण नए बोर्ड का गठन संभव होगा और पहले सरकारी जमीन के अतिक्रमण को मुक्त करने की योजना है। चुनाव में निर्दलीयों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है, जो 55 वार्डों में से 17 पर प्रभाव रखते हैं।
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बाड़मेर। बाड़मेर नगर परिषद चुनाव 2026 में भाजपा ने 15 साल के वनवास के बाद बहुमत हासिल कर बोर्ड बनाने की राह आसान कर ली है। कुल 55 वार्डों में भाजपा को 29 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस को 21 और निर्दलीयों को 5 सीटों पर जीत मिली।
बाड़मेर में भाजपा की जीत ने स्थानीय राजनीति में बड़ा बदलाव दिखाया है। भाजपा जिला उपाध्यक्ष रमेश सिंह इन्दा ने कहा कि जनता ने भाजपा को जवाब दिया है और विकास की गंगा बहेगी। एडवोकेट सवाई माहेश्वरी ने बताया कि भाजपा ने 55 वार्डों में चुनाव लड़ा और 29 में जीत हासिल की है।
डॉ. रोहिताश शर्मा ने कहा कि बानसूर की जनता ने इस चुनाव में योग्य लोगों को मौका दिया है। चुनाव परिणामों के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने शहर के अहिंसा सर्किल पर एकत्रित होकर खुशी जाहिर की।
नगर परिषद के 55 वार्डों में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिला है, जिससे 15 साल बाद भाजपा का बोर्ड बनने जा रहा है। भाजपा का बोर्ड बनते ही सबसे पहले सरकारी जमीन पर हुए अतिक्रमण को मुक्त किया जाएगा।
वहीं, कांग्रेस को 21 सीटें मिलीं और निर्दलीयों ने 5 वार्डों में जीत दर्ज की। बानसूर नगर पालिका चुनाव में निर्दलीयों ने 17 वार्डों में जीत हासिल कर दबदबा बनाया है। कांग्रेस बोर्ड में हुए घोटालों की जांच कर दोषियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने का भाजपा ने वादा किया है।
कांग्रेस के बागी निर्दलीय सुरतान सिंह लगातार पांचवीं बार पार्षद बने हैं। उन्होंने भाजपा और कांग्रेस के कई प्रमुख प्रत्याशियों को चुनाव में शिकस्त दी। कांग्रेस प्रवक्ता महावीर बोहरा ने वार्ड संख्या 12 में लगातार दूसरी बार जीत हासिल की है, हालांकि इस बार उनकी पत्नी ने चुनाव लड़ा।
नगर पालिका में बोर्ड बनाने के लिए 18 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए बहुमत का आंकड़ा चुनौती बना हुआ है, जबकि 17 निर्दलीय पार्षद निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
पूर्व सभापति दिलीप माली को हार का सामना करना पड़ा। भाजपा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष डॉ. शशिकांत बोहरा के पुत्र प्रवेश बोहरा को भी हार मिली। भाजपा ने इस चुनाव में बाजी मारी है और स्थानीय जनता ने विकास की उम्मीद जताई है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- भाजपा ने जीत के बाद क्या प्राथमिकता रखी है?
- भाजपा ने सबसे पहले सरकारी जमीन पर अतिक्रमण मुक्त करने का निर्णय लिया है।
- निर्दलीय पार्षदों की स्थिति क्या है?
- निर्दलीयों ने बानसूर नगर पालिका में 17 वार्डों में जीत हासिल कर दबदबा बनाया है।
- कांग्रेस ने चुनाव मतों पर क्या प्रतिक्रिया दी?
- भाजपा पर कांग्रेस बोर्ड में हुए घोटालों की जांच कर दोषियों को जेल भेजने का आरोप लगाया है।
- कौन से प्रमुख नेता हार गए हैं?
- पूर्व सभापति दिलीप माली और भाजपा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष डॉ. शशिकांत बोहरा के पुत्र प्रवेश बोहरा हार गए।
- भाजपा कार्यकर्ताओं ने चुनाव परिणाम पर क्या प्रतिक्रिया दी?
- भाजपा कार्यकर्ता शहर के अहिंसा सर्किल पर इकट्ठा होकर खुशी जाहिर की।
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