अजमेर नगर निगम में भाजपा को बड़ा झटका, 80 वार्डों में 32 सीटें
कांग्रेस ने 37 सीटें जीतीं, भाजपा की तुलना में सीटें कम हुईं
अजमेर नगर निगम चुनाव में भाजपा को 80 में से केवल 32 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस ने 37 सीटें जीतीं। भाजपा की यह पहले के मुकाबले बड़ी गिरावट है और कांग्रेस ने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बढ़त बनाई है। अजमेर शहर के विभिन्न पालिकाओं में भी दोनों पार्टियों के बीच मुकाबला कड़ा रहा।
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अजमेर। अजमेर नगर निगम चुनाव में भाजपा को बड़ा झटका लगा है। 80 वार्डों में से भाजपा महज 32 सीटें जीत सकी है, जबकि कांग्रेस ने 37 सीटों पर जीत दर्ज की है। भाजपा के लिए यह पिछले चुनाव की तुलना में बड़ी गिरावट है, जब उसे 48 सीटें मिली थीं।
नगर निगम में 36 वर्षों से लगातार भाजपा का बोर्ड रहा है। इस बार भाजपा को महंगाई और यूजीसी के मुद्दे ने चुनौती दी। अजमेर उत्तर और दक्षिण के विधायकों के टिकट वितरण को लेकर कार्यकर्ताओं में नाराजगी के कारण भाजपा को नुकसान हुआ है। भाजपा को सबसे अधिक सीटें अजमेर उत्तर विधानसभा क्षेत्र से मिली हैं, जबकि अजमेर दक्षिण से बड़ा झटका लगा है।
कांग्रेस और भाजपा के कई दिग्गज नेता चुनाव हार गए हैं। भाजपा के पूर्व सभापति सुरेंद्र सिंह शेखावत की पत्नी मधु शेखावत और महिला मोर्चा की अध्यक्ष भारती श्रीवास्तव चुनाव हार गई हैं। पूर्व मेयर धर्मेंद्र गहलोत की पत्नी हेमा गहलोत भी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव हार गईं, जिन्हें कांग्रेस ने समर्थन दिया था। कांग्रेस के पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष शैलेंद्र अग्रवाल और दिग्गज नेता समीर शर्मा की पत्नी शिवांगी शर्मा भी चुनाव हार गई हैं। शिवांगी शर्मा कांग्रेस की प्रबल मेयर दावेदार मानी जा रही थीं।
कांग्रेस प्रत्याशी मोक्ष कोली भी हार गए हैं, जो अजमेर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की द्रौपदी कोली के भतीजे हैं। कांग्रेस में मेयर पद के लिए रश्मि हिंगोरानी, रश्मि शर्मा, काजल यादव, आशा तुनवाल, भावना चौहान और बबीता नियर दावेदार हैं। भाजपा में अनामिका शर्मा, मोनिका जैन, रंजना सोनी, तरुण गोयल, नलिनी शर्मा और ज्योति मिश्रा मेयर पद की दावेदार हैं।
कांग्रेस के पार्षद सुनील केन छठी बार चुने गए हैं, जबकि उनकी पत्नी नीता केन भी कांग्रेस से पार्षद रह चुकी हैं। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी अजमेर उत्तर से विधायक हैं और अपने वार्ड को बचा लिया है। वहीं अजमेर दक्षिण से विधायक अनीता भदेल अपना वार्ड हार गई हैं।
केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी किशनगढ़ से आते हैं और भाजपा के टिकट वितरण में उनकी भूमिका रही है। पुष्कर नगर परिषद क्षेत्र की 25 सीटों में कांग्रेस के लिए निराशाजनक परिणाम रहे हैं। कैबिनेट मंत्री सुरेश सिंह रावत का टिकट वितरण में दखल रहा है।
सरवाड़ नगर पालिका में भाजपा का अध्यक्ष बनना तय है, जहां पूर्व सभापति अनिल मित्तल के कांग्रेस में आने से कांग्रेस को बल मिला। पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. रघु शर्मा की साख दांव पर थी। केकड़ी से विधायक शत्रुघ्न गौतम भाजपा को स्पष्ट बहुमत नहीं दिला पाए।
टांटोटी नगर पालिका में भाजपा ने 20 वार्डों में से 14 पर जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस को छह वार्ड मिले। पीसांगन नगर पालिका में कांग्रेस और भाजपा दोनों को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। यहां भाजपा को दो और कांग्रेस को तीन पार्षदों की जरूरत है। परिणामों के अनुसार भाजपा को 9, कांग्रेस को 8 और निर्दलीय को 8 वार्ड मिले हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- भाजपा को इस चुनाव में किन कारणों से नुकसान हुआ?
- भाजपा को महंगाई, यूजीसी मुद्दे और टिकट वितरण को लेकर कार्यकर्ताओं की नाराजगी से नुकसान हुआ है।
- कांग्रेस में मेयर पद के लिए कौन-कौन दावेदार हैं?
- रश्मि हिंगोरानी, रश्मि शर्मा, काजल यादव, आशा तुनवाल, भावना चौहान और बबीता नियर मेयर पद के दावेदार हैं।
- अजमेर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में क्या खास हुआ?
- अजमेर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से भाजपा को बड़ा झटका लगा और विधायक अनीता भदेल अपना वार्ड हार गईं।
- क्या कोई भाजपा के दिग्गज नेता चुनाव हार गए हैं?
- हाँ, पूर्व सभापति सुरेंद्र सिंह शेखावत की पत्नी मधु शेखावत चुनाव हार गई हैं।
- पुष्कर नगर परिषद क्षेत्र के चुनाव परिणाम कैसे रहे?
- पुष्कर नगर परिषद क्षेत्र की 25 सीटों में कांग्रेस के लिए निराशाजनक परिणाम रहे।
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