बांसवाड़ा के मुद्ररी में ग्राम एकीकरण समिति का गठन
भील आदिवासी परंपराओं को संरक्षित रखने और सामुदायिक व्यवस्था सशक्त बनाने पर जोर
बांसवाड़ा के मुद्ररी ग्राम पंचायत में ग्राम एकीकरण समिति का गठन किया गया है, जिसमें सुखलाल पारगी को वीसीसी प्रभारी और महेश पारगी को पंचायत प्रभारी नियुक्त किया गया। बैठक में आदिवासी समाज की पारंपरिक व्यवस्थाओं के संरक्षण, सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने और विभिन्न सामाजिक-आर्थिक व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर चर्चा हुई।
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बांसवाड़ा। बांसवाड़ा जिले के मुद्ररी ग्राम पंचायत में ग्राम एकीकरण समिति का गठन किया गया है। बैठक में सुखलाल पारगी को वीसीसी प्रभारी और महेश पारगी को पंचायत प्रभारी नियुक्त किया गया। आदिवासी समाज की पारंपरिक व्यवस्थाओं को संरक्षित रखने और सामुदायिक सहभागिता बढ़ाने पर चर्चा हुई।
मुद्ररी ग्राम पंचायत में आयोजित बैठक में भील आदिवासी पुरखाई पालवीराज की गणतंत्रात्मक व्यवस्था को मजबूत करने पर विचार-विमर्श हुआ। ग्राम, फला, पाल, पंचायत और मंडल स्तर पर सामुदायिक व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।
बैठक में वडहाळा-भांजगड़ा न्याय व्यवस्था, हुण्डेल-लाह सामुदायिक खेतीबाड़ी, मांडवा-नोतरा लगन सहकार व्यवस्था तथा होळ-फाळा सहकार व्यवस्था को आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई गई। प्रकृति एवं फसली उत्सव की सामुदायिक उपासना पद्धति, हांडा सहयोग भाव, हाट बाजार आधारित अर्थव्यवस्था तथा सामूहिक नृत्य-गान जैसी परंपराओं को बचाए रखने पर भी बल दिया गया।
बैठक में बीसीसी प्रभारी दिलीप रजात, तेजपुरा सरपंच हकर सिंह, गुलाब ताबियाड, महेश, महेंद्र, अरविंद, ईश्वर और नरेश गरासिया सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे। महेश, डायालाल, मानसिंह और चम्पालाल ने सामुदायिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सहयोग का भरोसा दिया।
वक्ताओं ने कहा, "आदिवासी परिवार विजन बुक की मूल भावना के अनुरूप समाज व्यवस्था विकसित करने के लिए सामुदायिक सहभागिता और एकजुटता आवश्यक है।" उन्होंने पारंपरिक व्यवस्थाओं के संरक्षण के साथ नई पीढ़ी को इन सामाजिक मूल्यों से जोड़ने की भी आवश्यकता बताई।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- ग्राम एकीकरण समिति का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- यह समिति आदिवासी समाज की पारंपरिक व्यवस्थाओं को संरक्षित रखना और सामुदायिक सहभागिता बढ़ाना चाहती है।
- बैठक में किन सामाजिक व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर जोर दिया गया?
- भील आदिवासी पुरखाई पालवीराज की गणतंत्रात्मक व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया है।
- बैठक में कौन-कौन से पारंपरिक आयोजन और व्यवस्थाएं शामिल हैं?
- प्रकृति एवं फसली उत्सव की सामुदायिक उपासना, हांडा सहयोग भाव, हाट बाजार आधारित अर्थव्यवस्था, और सामूहिक नृत्य-गान जैसी परंपराएं शामिल हैं।
- बैठक में कौन-कौन ग्रामीण उपस्थित थे?
- बीसीसी प्रभारी दिलीप रजात, तेजपुरा सरपंच हकर सिंह, गुलाब ताबियाड, महेश, महेंद्र, अरविंद, ईश्वर और नरेश गरासिया सहित कई ग्रामीण मौजूद थे।
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