बागपत में आलू किसानों को भामाशाह योजना से 100 रुपये प्रति क्विंटल अनुदान
आलू किसानों को बाजार भाव गिरने पर आर्थिक मदद देने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण शुरू
बागपत में आलू किसानों के लिए भामाशाह भाव स्थिरता योजना के तहत पंजीकरण शुरू हो गया है, जिसमें बाजार भाव में गिरावट होने पर प्रति क्विंटल 100 रुपये तक का अनुदान मिलेगा। इस योजना का लाभ केवल पंजीकृत किसानों को मिलेगा, और इसके लिए विभागीय पोर्टल पर पंजीकरण आवश्यक है।
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बागपत। बागपत में आलू उत्पादक किसानों के लिए भामाशाह भाव स्थिरता योजना के तहत पंजीकरण शुरू हो गया है। इस योजना के तहत किसानों को बाजार भाव में गिरावट होने पर प्रति क्विंटल 100 रुपये तक का अनुदान मिलेगा। योजना का लाभ केवल विभागीय पोर्टल पर पंजीकृत किसानों को मिलेगा।
उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर उद्यान विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए भामाशाह भाव स्थिरता योजना और निजी शीतगृहों में आलू भंडारण प्रभार पर अनुदान की कार्ययोजना लागू कर दी है। जिले के सभी आलू उत्पादक किसानों से योजना का लाभ लेने के लिए आनलाइन पंजीकरण कराने की अपील की गई है।
योजना के तहत अधिकतम दो हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की फसल करने वाले प्रति किसान ही पात्र होंगे। प्रति हेक्टेयर 200 क्विंटल की सीमा के अनुसार 100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अधिकतम 20 हजार रुपये तक अनुदान मिलेगा।
अनुदान का लाभ पाने के लिए किसानों का विभागीय पोर्टल पर पंजीकरण और किसान आईडी होना अनिवार्य है। साथ ही आधार कार्ड, बैंक पासबुक, मोबाइल नंबर, आलू वाली भूमि की खतौनी-खसरा तथा कोल्ड स्टोरेज की हस्ताक्षरित भंडारण रसीद, किराया भुगतान रसीद, गेट पास और बोरी गणना की रसीदें अपलोड करनी होंगी।
निरीक्षक पुष्पेंद्र यादव ने बताया कि योजना का लाभ पाने के लिए आलू किसानों को विभागीय पोर्टल पर आवेदन करना होगा। अधिकारी पारस नाथ ने कहा कि भामाशाह भाव स्थिरता कोष योजना का उद्देश्य आलू किसानों को बाजार भाव में गिरावट की स्थिति में राहत देना है।
प्याज और लहसुन के दामों में भी उतार-चढ़ाव जारी है। मंडी में छोटे आकार का लहसुन 90 से 100 रुपये प्रति किलो और बड़े आकार का 140 से 150 रुपये प्रति किलो थोक में बिक रहा है। प्याज के दाम 30 से 40 रुपये प्रति किलो के बीच बने हुए हैं। लगातार बारिश के कारण प्याज की खेप सड़ने की समस्या बनी हुई है, जिससे दाम बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
व्यापारियों के अनुसार श्रावण मास के कारण प्याज की मांग कम थी, लेकिन रक्षाबंधन पर्व के बाद मांग बढ़ने की संभावना है। होटलों और ढाबों में प्याज की खपत बढ़ने से दामों में स्थिरता आ सकती है।
महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की मंडियों में भारी बारिश के कारण प्याज की फसल और स्टॉक प्रभावित हुआ है। आढ़तियों का कहना है कि दाम पर अंकुश तभी लगेगा, जब इस सप्ताह कम से कम 10 टन प्याज की आमद होगी।
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