सोनीपत में किसानों का धरना तीसरे दिन भी जारी
किसान अपनी जमीन के उचित मुआवजे की मांग पर अड़े, समाधान न होने तक आंदोलन जारी
सोनीपत के खरखौदा में किसानों का धरना तीसरे दिन भी जारी रहा, जहां वे अपनी जमीन के उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि सरकार उचित मुआवजा नहीं देती है, तो वे अपनी जमीन पर पावर ग्रिड लाइन के खंभे नहीं लगने देंगे। इसी बीच, भल्डगांव में ग्रामीणों का विस्थापन और पुनर्वास की मांग को लेकर धरना 22वें दिन भी जारी है, जिसमें प्रशासन के साथ बातचीत निष्फल रही।
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सोनीपत के खरखौदा में किसानों का धरना तीसरे दिन भी जारी रहा। वे अपनी जमीन के उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं और जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। किसानों ने सरकार और प्रशासन से जल्द समाधान की उम्मीद जताई है।
धरनारत किसानों का कहना है कि उनकी मांगें जायज हैं और लंबे समय से वे अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं हुआ है। किसान शांतिपूर्ण तरीके से अपना आंदोलन चला रहे हैं और प्रशासन व सरकार से उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करने की अपील कर रहे हैं।
धरने पर बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे और उन्होंने सरकार व प्रशासन से उनकी समस्याओं का जल्द समाधान करने की मांग की। किसानों का कहना है कि आज के समय में लॉटरी सिस्टम के तहत मुआवजा देकर बहकाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन वे अपनी जमीन का उचित मुआवजा चाहते हैं। यदि सरकार ऐसा नहीं करती है तो किसान अपनी जमीन पर पावर ग्रिड लाइन के खंभे नहीं लगने देंगे।
इस अवसर पर विकास, अश्वनी, प्रताप सिंह छिल्लर, अनिल, बलराज, सतीश राव व प्रवीन दहिया भी धरने में शामिल रहे।
इसी बीच भल्डगांव में विस्थापन और पुनर्वास की मांग को लेकर ग्रामीणों का धरना 22वें दिन भी जारी रहा। प्रशासन की ओर से एसडीएम देवानंद शर्मा और तहसीलदार जब्बर सिंह असवाल आंदोलन स्थल पर पहुंचे और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए धरना स्थल बदलने का प्रस्ताव रखा। ग्रामीणों ने इस प्रस्ताव को साफ मना कर दिया और कहा कि आंदोलन को किसी दूसरी जगह ले जाने का सवाल ही नहीं उठता।
बातचीत के दौरान प्रशासन और ग्रामीणों के बीच मांगों पर सहमति बनाने की कोशिश की गई, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। ग्रामीणों ने पहले लिए गए जल समाधि के फैसले पर भी कायम रहने की बात कही। इससे प्रशासन और ग्रामीणों के बीच बातचीत विफल हो गई।
ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से विस्थापन और पुनर्वास की मांग उठा रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई पक्का समाधान नहीं मिला है। इसी वजह से वे आंदोलन जारी रखने को मजबूर हैं। धरना स्थल पर गोपीनाथ सिंह रावत, सागर भंडारी, कमलू लाल, कमल लाल, दीपक, जगदीश प्रसाद, वीरू लाल, बुद्धि लाल, राहुल, सुंदर मणि नौटियाल, विमला देवी, सुमति देवी, जूरी देवी और प्यारी देवी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। उन्होंने साफ किया कि जब तक उनकी मांगों का समाधान नहीं होता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
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