गौला नदी के कटाव से बागपत में 10 बीघा कृषि भूमि डूबी
विधायक ने जिलाधिकारी को नुकसान की जानकारी देने और तटबंध की सुरक्षा का भरोसा दिया
बागपत में गौला नदी के कटाव के कारण लगभग 10 बीघा कृषि भूमि फसल समेत नदी में समा गई है। प्रभावित किसानों ने अपनी उपजाऊ जमीन के खतरे की जानकारी विधायक को दी, जिन्होंने जिलाधिकारी और उच्चाधिकारियों को सूचित करने का आश्वासन दिया। वहीं, मारकंडा और हिंडन नदियों के उफान से भी कई क्षेत्रों में फसल और जन-धन की हानि हुई है, जिस पर किसानों ने मुआवजा देने की मांग की है।
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बागपत। बागपत में गौला नदी के भू-कटाव से करीब 10 बीघा कृषि भूमि फसल समेत नदी में समा गई है। प्रभावित किसानों ने विधायक को बताया कि नदी का कटाव लगातार बढ़ रहा है, जिससे उनकी उपजाऊ जमीन खतरे में है। विधायक ने जिलाधिकारी और उच्चाधिकारियों को इस नुकसान की जानकारी देने का आश्वासन दिया है।
विधायक बेहड़ ने बताया कि करीब दस वर्ष पूर्व उन्होंने विधायक रहते हुए गौला नदी के तट पर जो तटबंध बनवाए थे, वे आज भी सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा, "गौला नदी के भू-कटाव से किसानों की कृषि भूमि को हो रहे नुकसान की जानकारी जिलाधिकारी और संबंधित उच्चाधिकारियों को दी जाएगी।" प्रभावित किसानों में रमेश दानू, धन सिंह मेहता, पनीराम, डिगर राम, पोखर राम, पंकज आर्य, भवान राम, प्रताप राम, भगवान सिंह, शेर सिंह और मोहन सिंह नेगी शामिल हैं।
किसानों ने अधिकारियों से जल्द सर्वे कराकर मुआवजा देने की अपील की है। ग्रामीणों ने तटबंध की मरम्मत न होने को विभागीय लापरवाही बताया। निरीक्षण के दौरान पूर्व प्रधान नारायण सिंह कोरंगा, रमेश लोहनी, सुरेंद्र कार्की, दीप सिंह कोरंगा, चंचल सिंह कोरंगा, रमेश दानू, पनीराम, पोखर राम समेत कई ग्रामीण और किसान मौजूद रहे।
मारकंडा नदी में लगातार तीन दिन पानी आने से नदी के किनारे बसे निचले इलाकों के खेत जलमग्न हो गए हैं। बुधवार तड़के पहाड़ों पर हुई बरसात से मारकंडा में 12 हजार क्यूसिक पानी पहुंच गया। इससे कठवा, तंगौर, कलसाना, गुमटी, मुगल माजरा, मलिकपुर, रावा, झरौली और अरूपनगर जैसे करीब 30 गांवों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। सैकड़ों एकड़ फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं।
अधिवक्ता अमरिंदर सिंह ने बताया कि सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने और पानी भरने से स्कूली वैनें गांव में नहीं पहुंच पा रही हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश बैंस ने प्रशासन को सुझाव दिया कि डार्क जोन में व्यर्थ जा रहे नदी के पानी का सदुपयोग करने की योजना बनाई जानी चाहिए।
हिंडन नदी का जलस्तर बढ़ने से सरफाबाद गांव में किसानों की सैकड़ों बीघा फसलें जलमग्न हो गई हैं। किसानों ने प्रशासन से उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है। नदी किनारे बसे घरों को भी खतरा पैदा हो गया है। प्रभावित फसलों में ज्वार, बाजरा, मूली, धान, गेंदा और लौकी शामिल हैं।
हल्द्वानी की जमरानी बांध परियोजना पर भी भारी बारिश का असर पड़ा है। गौला नदी के उफान से बांध का काम थम गया है। निर्माण स्थल पर तैनात कर्मचारियों, श्रमिकों और मशीनरी को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया है। प्रबंधन का मुख्य उद्देश्य जन-धन की हानि से बचाव है। परियोजना के पूरा होने पर उत्तराखंड के नैनीताल और ऊधमसिंह नगर जिलों के साथ उत्तर प्रदेश के बरेली और रामपुर जिलों के किसानों को सिंचाई का पानी मिलेगा।
जानकारों के अनुसार, जमरानी जैसी विशाल परियोजनाओं में एक दिन का काम ठप होना बड़ा नुकसान है। इससे परियोजना के पूरा होने की तारीख और आर्थिक बोझ दोनों प्रभावित होंगे।
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