आजम खान समेत पांच पर हज समिति जमीन बिक्री में FIR दर्ज
विजिलेंस जांच में 2.08 करोड़ रुपये राजस्व नुकसान का खुलासा, नियमों की अनदेखी का आरोप
लखनऊ के ऐशबाग में हज समिति की लगभग 60 हजार वर्गफीट जमीन की बिक्री में अनियमितता के आरोप में आजम खान समेत पांच लोगों के खिलाफ विजिलेंस ने FIR दर्ज की है। जांच में 2.08 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व नुकसान और नियमों की अवहेलना पाई गई है, जिस पर आईपीसी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज हुआ है।
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राजधानी के ऐशबाग क्षेत्र में हज समिति की करीब 60 हजार वर्गफीट जमीन की बिक्री में अनियमितता के आरोप में विजिलेंस ने आजम खान समेत पांच लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। जांच में 2.08 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व नुकसान सामने आया है और नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया गया है।
विजिलेंस को शिकायत मिली थी कि जमीन की बिक्री में आजम खान और अन्य आरोपियों ने निजी फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया। जांच में पाया गया कि जमीन बेचने में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया। इसके बाद 8 सितंबर को लखनऊ सेक्टर थाने में FIR दर्ज की गई।
FIR में तत्कालीन हज समिति अध्यक्ष आजम खान के साथ सचिव लईक अहमद, डॉ. एमएए खान, अमीश डेवलपर्स के मालिक मोहम्मद अयूब और मुस्तकीम अहमद को आरोपी बनाया गया है। FIR नंबर 0018 है और इसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 120-बी के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 12, 13(1)(बी) और 13(2) भी शामिल हैं।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, ऐशबाग क्षेत्र के कायमखेड़ा (दुगांवा) में हज समिति की करीब 60 हजार वर्गफीट जमीन थी। विजिलेंस जांच में जमीन की बिक्री से समिति को 2.08 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हुआ है।
जांच के दौरान जमीन बिक्री से जुड़े दस्तावेजों और प्रक्रिया की भी पड़ताल की गई। विजिलेंस ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने नियमों की अनदेखी कर निजी फर्म को लाभ पहुंचाया।
पूर्व मंत्री आजम खान के करीबी माने जाने वाले बिल्डर और ठेकेदार सैयद खालिद से प्रवर्तन निदेशालय पूछताछ करने जा रहा है। ईडी ने जौहर ट्रस्ट के ठिकानों पर छापे मारे थे, जिसमें कई बिल्डरों और ठेकेदारों द्वारा चंदा देने के सुराग मिले।
जांच में पता चला कि दिल्ली, लखनऊ, नोएडा, रामपुर, मुरादाबाद, सहारनपुर, मेरठ और बरेली के कई कारोबारियों और शैक्षणिक संस्थानों ने जौहर ट्रस्ट को चंदा दिया था। इनमें से कुछ लोगों से ईडी ने दो वर्ष पहले पूछताछ की थी, जिसमें उन्होंने कबूला था कि चंदे की रकम का चेक देने के बदले उन्हें नगदी दी गई।
जांच में 60 करोड़ रुपये की राशि चंदे में मिलने और कुछ शेल कंपनियों के इस्तेमाल के सुराग मिलने पर दोबारा पड़ताल की जा रही है।
राज्य सरकार ने 3 मई 2024 को इस मामले की जांच के आदेश दिए थे। विजिलेंस ने धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज कर विवेचना इंस्पेक्टर संजय कुमार सिंह को सौंपी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- FIR में कौन-कौन आरोपी बनाए गए हैं?
- FIR में तत्कालीन हज समिति अध्यक्ष आजम खान, सचिव लईक अहमद, डॉ. एमएए खान, अमीश डेवलपर्स के मालिक मोहम्मद अयूब और मुस्तकीम अहमद को आरोपी बनाया गया है।
- प्रवर्तन निदेशालय (ED) की भूमिका क्या रही?
- ED ने जौहर ट्रस्ट के ठिकानों पर छापे मारे और कई बिल्डरों व ठेकेदारों से चंदे संबंधी पूछताछ की है।
- जांच में और किन शहरों के कारोबारियों के चंदे की जानकारी मिली?
- डिली, लखनऊ, नोएडा, रामपुर, मुरादाबाद, सहारनपुर, मेरठ और बरेली के कारोबारियों ने जौहर ट्रस्ट को चंदा दिया।
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