अमित शाह ने हिंदी को भारतीय भाषाओं का पूरक बताया
गृह मंत्री ने कहा, हिंदी का उद्देश्य प्रतिस्पर्धा नहीं बल्कि संवाद है
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि हिंदी किसी भी भारतीय भाषा की प्रतिस्पर्धी नहीं है बल्कि सभी भाषाओं की पूरक और राष्ट्रीय एकता की कड़ी है। उन्होंने युवाओं से अपनी मातृभाषा को नहीं छोड़ने और नई भाषाएं सीखने की अपील की। शाह ने बताया कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था।
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हिंदी दिवस के अवसर पर कहा कि हिंदी का दूसरी भारतीय भाषाओं से कोई मुकाबला नहीं है। उन्होंने युवाओं से दुनिया की भाषाएं सीखने के साथ अपनी मातृभाषा न छोड़ने की अपील की। शाह ने बताया कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था।
हिंदी और भारतीय भाषाओं का तालमेल
अमित शाह ने कहा कि हिंदी किसी भाषा की प्रतिद्वंद्वी नहीं है, बल्कि भारतीय भाषाओं के बीच संवाद और राष्ट्रीय एकता की कड़ी है। उन्होंने बताया कि भारत की भाषाई विविधता उसकी सबसे बड़ी ताकत है और हर भाषा अपने साथ इतिहास, लोक परंपराएं और संस्कृति लेकर चलती है। गृह मंत्री ने कहा, "हिंदी का उद्देश्य दूसरी भारतीय भाषाओं से प्रतिस्पर्धा करना नहीं है।" शाह ने युवाओं से अपील की कि वे अधिक से अधिक भाषाएं सीखें, लेकिन अपनी मातृभाषा को न छोड़ें।
हिंदी का इतिहास और योगदान
शाह ने हिंदी को आगे बढ़ाने में स्वामी दयानंद सरस्वती, महात्मा गांधी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि स्वामी दयानंद सरस्वती की मातृभाषा गुजराती थी, फिर भी उन्होंने 'सत्यार्थ प्रकाश' हिंदी में लिखा। महात्मा गांधी ने 1918 में मद्रास में दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा की स्थापना की थी। नेताजी सुभाष चंद्र बोस बंगाली भाषी थे, लेकिन उन्होंने आजाद हिंद फौज में हिंदी को संवाद की भाषा बनाया और देश को 'जय हिंद' का नारा दिया। गृह मंत्री ने कहा कि अलग-अलग भाषाई पृष्ठभूमि से आने वाले अनेक महान लोगों ने हिंदी को जनसंचार की भाषा के रूप में मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
हिंदी और राष्ट्रीय स्वाभिमान
अमित शाह ने कहा कि भारतीय भाषाओं को सम्मान देना केवल भाषा का विषय नहीं है, बल्कि यह देश की संस्कृति, इतिहास और आत्मगौरव से जुड़ा हुआ मुद्दा है। उन्होंने बताया कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में हिंदी को भारतीय संघ की राजभाषा के रूप में अपनाया था। शाह ने राजपथ को कर्तव्य पथ में बदलने को केवल नाम बदलना नहीं बताया और कहा कि अंग्रेजों के बनाए आपराधिक कानूनों की जगह भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम लाए गए। यह केवल शब्दों का बदलाव नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वाभिमान और गौरव की पुनर्स्थापना है।
हिंदी का आधुनिक युग में महत्व
गृह मंत्री ने कहा कि हिंदी देश में सुशासन को पारदर्शी बनाने और आम जनमानस तक सरकारी योजनाओं को पहुँचाने का सशक्त माध्यम बनी है। उन्होंने बताया कि तकनीकी समावेश के चलते हिंदी अब प्रौद्योगिकी और शोध की भाषा के रूप में स्थापित हो रही है। शाह ने स्पष्ट किया कि हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के बीच कोई प्रतिस्पर्धा या विरोध नहीं है, बल्कि हिंदी सभी भारतीय भाषाओं की मित्र और पूरक है। उन्होंने कहा कि जब देश की सभी भाषाएं मजबूत होंगी, तभी भारत का सर्वांगीण विकास संभव हो सकेगा।
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अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री
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अमित शाह, केंद्रीय गृह मंत्री
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- हिंदी को राष्ट्रीय स्वाभिमान से कैसे जोड़ा जाता है?
- अमित शाह के अनुसार, हिंदी केवल भाषा नहीं बल्कि देश की संस्कृति, इतिहास और आत्मगौरव से जुड़ा हुआ मुद्दा है।
- हिंदी ने आधुनिक भारत में सुशासन को कैसे सशक्त किया है?
- हिंदी सरकारी योजनाओं को आम जनमानस तक पहुंचाने और सुशासन को पारदर्शी बनाने में एक प्रभावी माध्यम बन चुकी है।
- अंग्रेजों के बनाए कानूनों के स्थान पर क्या नया लाया गया है?
- अमित शाह ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम अंग्रेजी आपराधिक कानूनों की जगह लाए गए हैं।
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