इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मौलाना तौकीर रजा की जमानत याचिका खारिज की
कोर्ट ने कहा, 'सर तन से जुदा' नारा देश की संप्रभुता के लिए चुनौती है
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बरेली हिंसा के आरोपी मौलाना तौकीर रजा की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि 'सर तन से जुदा' जैसे नारे भारत की संप्रभुता के खिलाफ हैं और तौकीर रजा ने सरकारी कार्रवाई का विरोध कर हिंसा भड़काई। अदालत ने मामले में आरोपपत्र दाखिल होने और हिंसा की गंभीरता को देखते हुए उन्हें जमानत देने से इनकार किया।
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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बरेली हिंसा के मास्टरमाइंड मौलाना तौकीर रजा की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि 'सर तन से जुदा' जैसे नारे की तुलना 'जय श्री राम' या 'अल्लाहू अकबर' से नहीं की जा सकती।
कोर्ट का आदेश और टिप्पणी
जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव ने सोमवार को अपने आदेश में कहा कि तौकीर रजा ने शुक्रवार की नमाज के बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों को इस्लामिया इंटर कॉलेज के मैदान में एकत्रित होने को कहा था। यह आह्वान सरकार की कार्रवाई का विरोध करने और जिला मजिस्ट्रेट के जरिए राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने के लिए था। कोर्ट ने बताया कि याचिकाकर्ता ने अपने धार्मिक और राजनीतिक हितों को पूरा करने के लिए इस मौके का फायदा उठाया।
कोर्ट ने यह भी कहा कि 'सर तन से जुदा' जैसे नारेबाजी भारत की संप्रभुता और अखंडता के लिए चुनौती हैं। याचिकाकर्ता के खिलाफ 21 दिसंबर, 2025 को आरोपपत्र दाखिल किया गया था, लेकिन आरोप तय होना बाकी हैं।
हिंसा और पुलिस से टकराव
तौकीर रजा पिछले साल सितंबर में बरेली में हुई हिंसा के संबंध में 13 अक्टूबर, 2025 से जेल में हैं। 26 सितंबर, 2025 को जुमे की नमाज के बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इस्लामिया इंटर कॉलेज परिसर में एकत्र होकर 'आई लव मोहम्मद' अभियान के समर्थन में प्रस्तावित रैली की अनुमति न मिलने का विरोध किया।
करीब 200-250 लोगों की भीड़ ने मौलाना आजाद इंटर कॉलेज से श्यामगंज चौराहा की ओर मार्च किया। भीड़ ने भड़काऊ नारे लगाए और पुलिस की चेतावनी को नजरअंदाज किया। स्थिति बिगड़ने पर भीड़ ने पुलिस पर पथराव, तेजाब से भरी बोतलें फेंकी और गोलीबारी भी की। हिंसा में पुलिसकर्मियों की वर्दी फाड़ दी गई और दो अधिकारियों को चोटें आईं। पुलिस को आत्मरक्षा में हवा में गोलियां चलानी पड़ीं।
याचिकाकर्ता का तर्क और कोर्ट की प्रतिक्रिया
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि अनुमति न मिलने और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू होने के कारण इस्लामिया इंटर कॉलेज के मैदान में एकत्र होने का आह्वान रद्द कर दिया गया था। लेकिन कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम समुदाय से बड़ी संख्या में लोगों ने मार्च निकाला और पुलिस द्वारा रोके जाने पर उनके साथ मारपीट हुई तथा संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया। इस कृत्य की अनुमति नहीं दी जा सकती।
सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद अदालत याचिकाकर्ता को जमानत पर रिहा करने के पक्ष में नहीं है इसलिए जमानत याचिका खारिज की जाती है।
जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव, इलाहाबाद हाई कोर्ट
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- तौकीर रजा पर कब आरोप पत्र दाखिल किया गया था?
- तौकीर रजा के खिलाफ 21 दिसंबर, 2025 को आरोप पत्र दाखिल किया गया था, लेकिन अभी आरोप तय होना बाकी हैं।
- पुलिस ने हिंसा के दौरान अपनी सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए?
- हिंसा के दौरान पुलिस को आत्मरक्षा में हवा में गोलियां चलानी पड़ीं।
- कोर्ट ने तौकीर रजा की जमानत याचिका क्यों खारिज की?
- कोर्ट ने पाया कि तौकीर रजा ने धार्मिक और राजनीतिक हितों के लिए इस मौके का फायदा उठाया और बड़ी संख्या में लोगों ने पुलिस से टकराव किया तथा संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।
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