अजा एकादशी पर करें ये चार काम, व्रत होगा पूर्ण और फलदायी
7 सितंबर को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अजा एकादशी, विधिपूर्वक व्रत से मिलेगा विष्णुलोक का वरदान
अजा एकादशी इस वर्ष 7 सितंबर को होगी और इसे भगवान विष्णु को समर्पित व्रत माना जाता है। व्रत पूर्ण करने के लिए संकल्प लेना, तुलसी के पास दीपक जलाना, कथा सुनना और रात्रि जागरण करना आवश्यक है। यह व्रत स्वास्थ्य, शांति और आध्यात्मिक उन्नति दिलाने वाला माना जाता है।
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भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अजा एकादशी इस वर्ष 7 सितंबर को रखी जाएगी। पंचांग के अनुसार, यह तिथि 6 सितंबर की शाम से शुरू होकर 7 सितंबर की शाम तक रहेगी। इस व्रत को विधि से करने वाले को सुख-शांति और आध्यात्मिक उन्नति के साथ विष्णुलोक की प्राप्ति होती है।
अजा एकादशी को भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है और इसे समस्त पापों का नाश करने वाला तथा अश्वमेध यज्ञ के समान फल देने वाला व्रत कहा गया है। इस दिन चार विशेष कर्मों का पालन आवश्यक है: संकल्प करना, तुलसी के पास दीपक जलाना, व्रत कथा सुनना और रात्रि जागरण करना।
सुबह सूर्योदय से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए। संकल्प में स्वास्थ्य, धन, संतान या मोक्ष जैसे उद्देश्य स्पष्ट रूप से कहने चाहिए क्योंकि मान्यता है कि संकल्प से कार्य देवताओं तक पहुंचता है।
सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास शुद्ध देसी घी का दीपक जलाना अनिवार्य है। इसके बाद तुलसी की सात बार परिक्रमा कर तुलसी-लक्ष्मी मंत्र का जाप करना चाहिए। ऐसा करने से भगवान विष्णु के साथ मां लक्ष्मी की कृपा भी प्राप्त होती है और धन संबंधी अड़चनें कम होती हैं।
पूजन के बाद अजा एकादशी की कथा पढ़ना या सुनना चाहिए। अगले दिन ब्राह्मण को भोजन और दक्षिणा देने के बाद स्वयं भोजन करना व्रत को पूर्ण करता है। बिना कथा और सही पारण के व्रत अधूरा माना जाता है।
स्कंदपुराण में एकादशी पर रात्रि जागरण का विशेष उल्लेख है। रात में पुराण पाठ, धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्प, चंदन और फल अर्पित कर विष्णु जी की पूजा करनी चाहिए। आलस छोड़कर जागरण करने वाले भक्त मोक्ष और श्रीहरि के धाम के अधिकारी माने जाते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, अजा एकादशी भक्ति, दान और संयम का विशेष अवसर है। घरों में सुबह से पूजा की तैयारी होती है और कई भक्त मंदिर जाकर विष्णु दर्शन करते हैं। सच्चे मन से किया गया यह व्रत स्वास्थ्य, शांति और आध्यात्मिक उन्नति देता है।
शास्त्रों में कहा गया है कि संकल्प के बिना पूजा और व्रत का पुण्य अधूरा रहता है। तुलसी विष्णु प्रिया हैं, इसलिए उनके पास दीपदान इस व्रत का अनिवार्य अंग माना जाता है।
घर की सीढ़ियों का वास्तु बिगाड़ सकता है सुख-शांति, इसलिए सही दिशा और नियमों का पालन जरूरी है।
नवनीत राठौर इस क्षेत्र में करीब 5 सालों से काम कर रहे डिजिटल पत्रकार हैं, जो ज्योतिषीय विषयों को सरल और विश्वसनीय भाषा में पाठकों तक पहुंचाते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों को प्रेरणादायक जानकारी प्रदान करना है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- अजा एकादशी व्रत का प्रमुख उद्देश्य क्या है?
- यह व्रत सुख-शांति, आध्यात्मिक उन्नति और विष्णुलोक प्राप्ति के लिए किया जाता है।
- संकल्प करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
- संकल्प में स्वास्थ्य, धन, संतान या मोक्ष जैसे स्पष्ट उद्देश्य कहने चाहिए।
- रात्रि जागरण में कौन-कौन से पूजा सामग्रियों का प्रयोग होता है?
- रात्रि में पुराण पाठ, धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्प, चंदन और फल अर्पित किये जाते हैं।
- अजा एकादशी कथा सुनना क्यों आवश्यक है?
- कथा सुनने से व्रत की पूर्णता होती है, बिना कथा व्रत अधूरा माना जाता है।
- क्या घर की सीढ़ियाँ सुख-शांति पर प्रभाव डालती हैं?
- हाँ, घर की सीढ़ियों का वास्तु बिगाड़ सकता है सुख-शांति इसलिए सही दिशा जरूरी है।
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