राजसमंद में अभिनव सामायिक दिवस पर 158 श्रावक-श्राविकाओं ने लिया हिस्सा
तेरापंथ युवक परिषद के निर्देश पर तेरापंथ सभा भवन में आयोजन हुआ
राजसमंद के कालू में पर्युषण महापर्व के तीसरे दिन अभिनव सामायिक दिवस का आयोजन किया गया, जिसमें 158 श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में ध्यान साधना, मंत्र जाप, तपस्वियों का सम्मान और आध्यात्मिक प्रवचन शामिल थे।
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राजसमंद। राजसमंद के कालू में पर्युषण महापर्व के तीसरे दिन अभिनव सामायिक दिवस श्रद्धा से मनाया गया। तेरापंथ सभा भवन में 158 श्रावक-श्राविकाओं ने इस आयोजन में भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रतिनिधि पवन कच्छारा ने मंगलाचरण से की।
प्रतिनिधि पवन कच्छारा ने कहा कि सामायिक तो समता का अभ्यास है और इसे करने वाला नया प्रकाश पाता है। उपासक सुभाष सामोता ने सामायिक के दौरान ध्यान साधना करवाई और मंत्रों का जाप कराया। इस अवसर पर कंठी तप करने वाली विमला देवी श्रीश्रीमाल और शकुंतला देवी भंडारी का सम्मान किया गया।
तेले की तपस्या करने वाले जीवन ज्योति बाफना, कमला देवी डूंगरवाल, टमु देवी चोरड़िया, निर्मला देवी मेहता, ज्ञानेश्वर मेहता और देवेंद्र मेहता ने भी तपस्वियों का सम्मान किया। महिला मंडल मंत्री संगीता चंडालिया ने तपस्वियों के तप की अनुमोदना की।
कार्यक्रम के अंत में सामायिक संयोजक सुदीप छाजेड़ ने सभी का आभार व्यक्त किया। उपासिका सुधा बांठिया और ललिता सेठिया ने सामायिक के महत्व और आध्यात्मिक फायदों के बारे में बताया। उन्होंने भगवान सुमतिनाथ, पद्मप्रभु, सुपार्श्वनाथ, चंद्रप्रभु, सुविधिनाथ और शीतलनाथ के जीवन से जुड़े प्रसंगों की विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने सामायिक को आत्मशुद्धि, संयम और साधना का अहम तरीका बताया। कार्यक्रम में कन्या मंडल ने प्रेरणादायक गीतिका प्रस्तुत की। तेरापंथ समाज के कई श्रावक-श्राविकाएं श्रद्धा और उत्साह के साथ पर्युषण महापर्व की आराधना में शामिल हुए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- सामायिक दिवस का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- सामायिक आत्मशुद्धि, संयम और साधना का अहम तरीका है जो नए प्रकाश की प्राप्ति करता है।
- कार्यक्रम में कौन-कौन से धार्मिक प्रसंग साझा किए गए?
- भगवान सुमतिनाथ, पद्मप्रभु, सुपार्श्वनाथ, चंद्रप्रभु, सुविधिनाथ और शीतलनाथ के जीवन से जुड़े प्रसंग बताए गए।
- किसने सामायिक के दौरान ध्यान साधना और मंत्र जाप कराए?
- उपासक सुभाष सामोता ने सामायिक के दौरान ध्यान साधना करवाई और मंत्रों का जाप कराया।
- तपस्वियों का किस तरह सम्मान किया गया?
- कंठी तप करने वाली विमला देवी श्रीश्रीमाल और शकुंतला देवी भंडारी तथा तले की तपस्या करने वाले जीवन ज्योति बाफना और अन्य तपस्वियों का सम्मान किया गया।
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