आज दर्श अमावस्या पर पिठोरी माता की पूजा और गुरुवार व्रत
सिद्ध योग, तर्पण, दीपदान और व्रत कथा के साथ मनाई जा रही है अमावस्या
10 सितंबर को भाद्रपद कृष्ण चतुर्दशी को दर्श अमावस्या और पिठोरी अमावस्या मनाई गई। इस दिन पिठोरी माता की पूजा और गुरुवार व्रत किया जाता है, साथ ही पितरों को तर्पण देना शुभ माना जाता है। पंचांग के अनुसार सिद्ध योग का प्रभाव शाम 07:17 बजे तक रहेगा, जो शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त समय होता है।
AI-निर्मित सार · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
आज दर्श अमावस्या। 10 सितंबर को भाद्रपद कृष्ण चतुर्दशी तिथि पर दर्श अमावस्या और पिठोरी अमावस्या मनाई जा रही है। इस दिन सिद्ध योग का समय शाम 07:17 बजे तक रहेगा, जो शुभ कार्यों के लिए उत्तम माना जाता है।
आज के पंचांग के अनुसार मघा नक्षत्र, शकुनि करण, सिद्ध योग, दक्षिण का दिशाशूल और सिंह राशि में चंद्रमा है। सिद्ध योग शाम 07:17 बजे तक रहेगा, इसके बाद साध्य योग बनेगा। यह समय शत्रुओं पर विजय, कानूनी मामलों को सुलझाने और बड़े निर्णय के लिए शुभ माना जाता है। इस योग का स्वामी ग्रह राहु और अधिष्ठात्री देवी मां काली हैं।
सुबह 10:33 बजे के बाद स्नान करके पितरों को तर्पण देना शुभ होता है, जिससे पितर प्रसन्न होते हैं और पितृ दोष दूर होता है। शाम को घर के बाहर तेल का दीपक दक्षिण दिशा में जलाना चाहिए।
पिठोरी अमावस्या को कुशग्रहणी अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन कुशा एकत्रित कर पूजा, कर्मकांड और संस्कारों में उपयोग किया जाता है। गुरुवार व्रत भगवान विष्णु की पूजा पंचामृत, तुलसी के पत्ते, हल्दी, चंदन, पीले फूल, फल और नैवेद्य से किया जाता है। व्रत कथा पढ़कर और क्षमता अनुसार पीली वस्तुओं का दान कर सकते हैं।
पिठोरी अमावस्या की कथा के अनुसार एक परिवार में सात भाई थे, जिनके सात बेटे थे। परिवार में सुख-शांति थी, लेकिन बच्चों की सलामती को लेकर महिलाओं को चिंता थी। सातों भाइयों की पत्नियों ने संतान की लंबी उम्र के लिए व्रत रखा। परंतु हर साल व्रत के बाद एक-एक बेटे की मृत्यु हो गई। सातवें वर्ष तक सबसे बड़ी बहू ने अपने सातों बेटों को खो दिया।
उसने अपने मृत बेटों के शव छिपा दिए। उसी समय गांव की देवी मां पोलेरम्मा वहां भ्रमण कर रही थीं। देवी ने उसकी पीड़ा सुनी और हर उस स्थान पर हल्दी चढ़ाने को कहा जहां बेटों का अंतिम संस्कार हुआ था। महिला ने देवी के बताए अनुसार हल्दी छिड़की और अपने घर लौट आई।
आज सुबह 10:33 बजे तक श्मशान में पूजा की जाती है, उसके बाद गौरी पूजा होती है। पंचांग में दिनभर के मुहूर्त और अशुभ समय भी बताए गए हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:31 से 05:17 तक, अमृत काल 11:47 से 13:18 तक, विजय मुहूर्त 14:23 से 15:13 तक है। निशिता मुहूर्त देर रात 23:55 से अगले दिन 00:41 तक रहेगा।
दिन के शुभ समय में 06:03 से 07:37, 12:18 से 13:51, 15:51 से 17:25, 16:32 से 19:59 तक शुभ-उत्तम और अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त हैं। राहुकाल 13:51 से 15:25 तक है।
गुरुवार व्रत कथा पढ़कर और पूजा-अर्चना से मां पिठोरी और मातृ शक्तियों की कृपा प्राप्त होती है। इस दिन पीली वस्तुओं का दान और तर्पण करना शुभ माना जाता है।
सिद्ध योग और मुहूर्त
सिद्ध योग का स्वामी ग्रह राहु और अधिष्ठात्री देवी मां काली हैं। इस योग में किए गए शुभ कार्य सफल होते हैं। पंचांग के अनुसार दिशाशूल दक्षिण दिशा में है।
दिन के विभिन्न मुहूर्तों में ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:31 से 05:17 तक, अमृत काल 11:47 से 13:18 तक, विजय मुहूर्त 14:23 से 15:13 तक, निशिता मुहूर्त 23:55 से अगले दिन 00:41 तक है। राहुकाल 13:51 से 15:25 तक रहता है।
इन मुहूर्तों का ध्यान रखकर पूजा और व्रत करने से लाभ होता है।
पिठोरी अमावस्या व्रत कथा
पिठोरी अमावस्या के दिन सात भाइयों की पत्नियों ने संतान की लंबी उम्र और स्वास्थ्य के लिए व्रत रखा। सबसे बड़ी बहू ने श्रद्धा से व्रत किया, लेकिन उसके सातों बेटे एक-एक करके मर गए। उसने अपने मृत बेटों के शव छिपा दिए।
गांव की देवी मां पोलेरम्मा ने उसकी पीड़ा सुनी और हर अंतिम संस्कार स्थल पर हल्दी छिड़कने को कहा। महिला ने देवी के निर्देशानुसार हल्दी चढ़ाई और अपने घर लौट आई।
इस व्रत में स्नान, तर्पण, दीपदान और दान करना शुभ माना जाता है। माता पिठोरी और मातृ शक्तियों की पूजा की जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- सिद्ध योग का स्वामी ग्रह कौन है?
- सिद्ध योग का स्वामी ग्रह राहु है और अधिष्ठात्री देवी मां काली हैं।
- पिठोरी अमावस्या का व्रत कैसे किया जाता है?
- गुरुवार व्रत में पंचामृत, तुलसी के पत्ते, हल्दी, चंदन, पीले फूल, फल और नैवेद्य से पूजा करते हैं।
- इस दिन कौन-कौन से मुहूर्त शुभ माने गए हैं?
- इस दिन ब्रह्म मुहूर्त, अमृत काल, विजय मुहूर्त, निशिता मुहूर्त और दिन में कई शुभ-उत्तम समय बताए गए हैं।
- पिठोरी अमावस्या की कथा में क्या घटना घटित हुई थी?
- सात भाइयों की पत्नियों ने संतान की लंबी उम्र के लिए व्रत रखा, लेकिन सातों बेटों की मृत्यु हो गई और देवी मां पोलेरम्मा ने हल्दी छिड़कने को कहा।
- राहुकाल कब होता है?
- राहुकाल 13:51 से 15:25 बजे तक रहता है।
AI-निर्मित · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
50 free articles left today
0 of 50 free reads used today.
पाठकों की पसंद




Comments
0 threadsNo approved comments yet. Start the discussion.