जैसलमेर में बाबा रामदेव मेले में 11 हजार लड्डुओं का भोग
देशभर से लाखों श्रद्धालु आस्था और सेवा के इस महाकुंभ में जुटे हैं
जैसलमेर के रामदेवरा मेला में गुजरात के अहमदाबाद से आए सेवादारों ने 11 हजार ड्राई फ्रूट और मोतीचूर के लड्डुओं का भोग बाबा रामदेव की समाधि पर चढ़ाया। मेला में लगभग चार लाख श्रद्धालु आते हैं और पहलगाम कुश्ती दंगल के जरिए नशे से दूर रहने का संदेश भी दिया जा रहा है। मेले में विभिन्न संस्कृतियों के लोग एकता के साथ भाग ले रहे हैं।
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जैसलमेर। जैसलमेर जिले के रामदेवरा में भादवा मेला पूरे उत्साह के साथ चल रहा है। देश के कोने-कोने से लगभग चार लाख श्रद्धालु बाबा रामदेव के दरबार में दर्शन और सेवा के लिए पहुंच रहे हैं। इस मेला में आस्था, भक्ति और सेवा का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है।
रामदेवरा-पोकरण सड़क मार्ग पर पदयात्रियों की सेवा के लिए गुजरात के अहमदाबाद से आए करीब चार दर्जन से अधिक सेवादारों ने अपना विशाल पड़ाव बनाया है। वे पिछले 10 साल से लगातार यहां आकर श्रद्धालुओं की निस्वार्थ सेवा कर रहे हैं। इस बार उन्होंने 11 हजार ड्राई फ्रूट और मोतीचूर के शुद्ध देसी घी वाले लड्डुओं का निर्माण किया है। पिछले तीन दिनों से गुजरात के कुशल कारीगर इन लड्डुओं को बनाने में जुटे हैं।
आयोजकों के अनुसार सबसे पहले इन लड्डुओं का भोग बाबा रामदेव की पवित्र समाधि पर चढ़ाया जाएगा। इसके बाद इन्हें पैदल चलकर आने वाले हजारों भक्तों में महाप्रसाद के रूप में वितरित किया जाएगा। इस सेवा कार्य को लेकर गुजरात से आए कार्यकर्ता पूरी श्रद्धा और मेहनत से लगे हुए हैं।
मेले में केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि समाज सुधार का भी संदेश दिया जा रहा है। पंजाब से आए लोहार समाज के लगभग 10 हजार लोग रामदेवरा में खुले आसमान के नीचे डेरा डाले हैं। उन्होंने युवा पीढ़ी को नशे से दूर रखने के लिए कुश्ती दंगल का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि युवा पौष्टिक आहार लेकर अपने शरीर को मजबूत करें और नशे से दूर रहें।
कुश्ती दंगल में परिवार और समाज में बच्चों के लिए अच्छे उदाहरण पेश करने पर जोर दिया गया। इस कार्यक्रम को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
बाबा रामदेव का यह मेला विविधता में एकता की मिसाल है, जहां अलग-अलग संस्कृति, भाषा और वेशभूषा के लोग प्रेम से मिलते हैं। सभी श्रद्धालु ऊंच-नीच, अमीर-गरीब और जाति-पाति के भेदभाव को भुलाकर केवल रामसापीर की समाधि के दर्शन कर रहे हैं। यहां इंसानियत को सबसे बड़ा धर्म माना जाता है।
पदयात्रियों की मनुहार के लिए मार्ग पर अलग-अलग स्थानों पर लोग भोजन और पानी उपलब्ध करा रहे हैं। इस भादवा मेले में श्रद्धालुओं की सेवा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- गुजरात के सेवादारों ने लड्डुओं का निर्माण कैसे किया?
- पिछले तीन दिनों से गुजरात के कुशल कारीगर शुद्ध देसी घी वाले ड्राई फ्रूट और मोतीचूर के लड्डू बना रहे हैं।
- कुश्ती दंगल का उद्देश्य क्या था?
- यह कार्यक्रम युवा पीढ़ी को नशे से दूर रखने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए आयोजित किया गया।
- क्या मेले में सिर्फ धार्मिक आयोजन होते हैं?
- नहीं, मेले में धार्मिक अनुष्ठान के अलावा समाज सुधार संबंधी कार्यक्रम भी होते हैं।
- मेले में विभिन्न समुदायों के लोग कैसे भाग लेते हैं?
- मेले में लोग भाषा, संस्कृति और वेशभूषा की परवाह किए बिना प्रेम और भाईचारे के साथ शामिल होते हैं।
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