योगी सरकार ने स्वाइन फ्लू जांच निःशुल्क करने के निर्देश दिए
सरकारी अस्पतालों में जांच मुफ्त, निजी केंद्रों में अधिकतम शुल्क तय, ICU वार्ड बनाए जाएंगे
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में स्वाइन फ्लू की गंभीरता को देखते हुए इन्फ्लुएंजा-ए (एच1एन1) जांच को सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क करने का निर्णय लिया है। निजी अस्पतालों में जांच के लिए 3000 रुपये की अधिकतम शुल्क सीमा तय की गई है और स्वास्थ्य विभाग की टीमें संभावित मरीजों की पहचान कर उन्हें तत्काल जांच और उपचार प्रदान करेंगी।
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में स्वाइन फ्लू की स्थिति की समीक्षा कर जांच और इलाज की व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में इन्फ्लुएंजा-ए (एच1एन1) की जांच निःशुल्क करने का फैसला किया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को बीमारी की रोकथाम, जांच और उपचार की व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि लोगों में अनावश्यक डर या पैनिक की स्थिति न बने। निजी अस्पतालों और पैथोलॉजी केंद्रों को निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली से मना किया गया है। सीएमओ की अध्यक्षता में हुई बैठक में निजी केंद्रों में स्वाइन फ्लू की आरटीपीसीआर जांच के लिए अधिकतम शुल्क तीन हजार रुपये तय किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग की टीमें संभावित मरीजों की पहचान कर लक्षण मिलने पर उन्हें तत्काल जांच और उपचार उपलब्ध कराएंगी। मुख्यमंत्री ने एएनएम, आशा कार्यकर्ताओं और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की मदद से सघन जांच अभियान चलाने के निर्देश भी दिए हैं। सरकार का फोकस बीमारी की शुरुआती पहचान कर उसे गंभीर होने से रोकने पर है।
मुरादाबाद के मंडलीय जिला अस्पताल में स्वाइन फ्लू की जांच के लिए आरटीपीसीआर टेस्टिंग किट की कमी से परेशानी हो रही है। अस्पताल प्रशासन ने जांच किट मुहैया कराने के लिए शासन में मांग भेजी है और किट बुधवार तक पहुंचने की संभावना है। जांच किट मिलने के बाद स्वाइन फ्लू आशंकित मरीजों में संक्रमण की पुष्टि के लिए आरटीपीसीआर जांच शुरू कर दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने गंभीर मरीजों के लिए अलग आईसीयू वार्ड तैयार करने के निर्देश दिए हैं ताकि जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ उपचार तुरंत मिल सके। उन्होंने टेलिकन्सल्टेशन व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया है ताकि मरीजों को डॉक्टरों की सलाह आसानी से मिल सके और अस्पतालों पर दबाव कम हो।
चिकित्साधीक्षक डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय ने बताया कि तीस से अधिक रैपिड जांच किट प्राप्त हो चुकी हैं।
स्वाइन फ्लू के लगातार बढ़ते मामलों के बीच योगी सरकार ने निगरानी और उपचार व्यवस्था कड़ी कर दी है। प्रदेश में अब तक 685 मामले सामने आ चुके हैं। सरकार ने लोगों तक सही और जरूरी जानकारी पहुंचाने पर भी जोर दिया है ताकि अफवाह या डर का माहौल न बने।
स्वाइन फ्लू जांच शुल्क और व्यवस्था
राजधानी लखनऊ के निजी अस्पतालों और पैथोलॉजी केंद्रों में स्वाइन फ्लू की आरटीपीसीआर जांच के लिए अधिकतम शुल्क तीन हजार रुपये तय किया गया है। इससे अधिक शुल्क वसूलने वाले केंद्रों पर कार्रवाई की जाएगी। सरकारी अस्पतालों में जांच निःशुल्क होगी।
मुरादाबाद के मंडलीय जिला अस्पताल में जांच किट की कमी से परेशानी हो रही है, लेकिन किट जल्द ही पहुंचने की संभावना है। जांच किट मिलने के बाद आरटीपीसीआर जांच शुरू कर दी जाएगी।
सरकार ने निजी चिकित्सा संस्थानों को भी जांच के लिए निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली न करने की हिदायत दी है।
बीमारी से बचाव और जागरूकता
मुख्यमंत्री ने लोगों को बीमारी से बचाव के लिए सावधानियां बरतने और किन परिस्थितियों में डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है, इसकी जानकारी देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि लोगों के बीच किसी तरह की अफवाह या डर का माहौल नहीं बनना चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग की टीमें संभावित मरीजों की पहचान करेंगी और लक्षण मिलने पर उन्हें तत्काल जांच और उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। टेलिकन्सल्टेशन की व्यवस्था को प्रभावी बनाकर मरीजों को डॉक्टरों की सलाह आसानी से मिल सकेगी।
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