मुंबई में दही हांडी के दौरान दो गोविंदाओं की मौत, 306 घायल
महाराष्ट्र में जन्माष्टमी पर उत्सव के बीच हादसों ने जश्न को गमगीन किया
मुंबई में जन्माष्टमी के अवसर पर मनाए गए दही हांडी उत्सव के दौरान दो गोविंदाओं की मौत और 306 से अधिक घायल होने की सूचना मिली है। प्रशासन ने घायलों को बेहतर इलाज देने के निर्देश दिए हैं और सरकार ने इलाज का खर्च उठाने की घोषणा की है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने गोविंदाओं की सुरक्षा पर जोर दिया है।
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महाराष्ट्र में जन्माष्टमी के अवसर पर 6 सितंबर को दही हांडी उत्सव जोश-ख़रोश से मनाया गया। मुंबई महानगर क्षेत्र में दो गोविंदाओं की मौत हो गई और 306 से अधिक घायल हुए। प्रशासन ने घायलों को बेहतर इलाज देने के निर्देश दिए हैं।
मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई समेत राज्य के कई हिस्सों में गोविंदा पथकों ने मानव पिरामिड बनाकर दही हांडी फोड़ी। इस दौरान मुंबई के मालवणी इलाके में 7 वर्षीय एक गोविंदा पर सीमेंट का ब्लॉक गिर गया, जिससे उसकी मौत हो गई। नवी मुंबई के घणसोली इलाके में भी एक गोविंदा की जान चली गई।
प्राथमिक जानकारी के अनुसार, दही हांडी के दौरान करीब 10 थर की मानव पिरामिड बनाई जा रही थी। इसी दौरान सदानंद नीचे गिर गए और उनकी मौत हो गई।
शहर में उत्सव की धूम के बीच बड़ी संख्या में गोविंदाओं के घायल होने की खबर भी सामने आई। रात 12 बजे तक मुंबई के सरकारी और बीएमसी अस्पतालों में 306 घायल गोविंदाओं का इलाज किया गया। मटकी फोड़ने के लिए मानव पिरामिड बनाते समय गिरने, चोट लगने और अन्य कारणों से ये घायल हुए।
मुंबई की महापौर रितू तावड़े ने केईएम अस्पताल पहुंचकर घायल गोविंदाओं से मुलाकात की और प्रशासन को घायलों को बेहतर और समय पर उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। सरकार ने घायल गोविंदाओं के इलाज का खर्च उठाने की बात कही है।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने गोविंदाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा, "मटकी जरूर फोड़ें, लेकिन अपनी जान जोखिम में डालकर नहीं। हर गोविंदा के परिवार वाले घर पर उसका इंतजार कर रहे हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक गोविंदा को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके साथी घायल न हों।
सरकार ने दही हांडी को साहसिक खेल का दर्जा दिया है, सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है और प्रतिभागियों के लिए सरकार समर्थित बीमा कवरेज उपलब्ध कराया है। पारंपरिक दही हांडी को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए ‘प्रो गोविंदा’ जैसे आयोजन भी शुरू किए गए हैं।
भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के मौके पर मनाया जाने वाला दही हांडी उत्सव महाराष्ट्र की लोकप्रिय परंपराओं में शामिल है। हर साल हजारों गोविंदा पथक इस उत्सव में हिस्सा लेते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- दही हांडी उत्सव कब मनाया जाता है?
- यह उत्सव भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के मौके पर मनाया जाता है।
- दही हांडी उत्सव में सुरक्षा के क्या प्रावधान हैं?
- सरकार ने प्रतिभागियों के लिए बीमा कवरेज उपलब्ध कराया है और घायल गोविंदाओं के इलाज का खर्च उठाने का आश्वासन दिया है।
- गोविंदाओं की सुरक्षा के लिए क्या कहा गया है?
- महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री ने गोविंदाओं से अपनी जान जोखिम में न डालने और साथियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
- दही हांडी उत्सव पर प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं?
- प्रशासन ने घायलों को बेहतर इलाज देने के निर्देश दिए और महापौर ने घायलों से अस्पताल में मुलाकात की।
- दही हांडी के पारंपरिक स्वरूप को बढ़ावा देने के लिए क्या किया जा रहा है?
- प्रो गोविंदा जैसे आयोजन शुरू किए गए हैं ताकि दही हांडी को राष्ट्रीय पहचान मिल सके।
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