हेमंत सोरेन के भरोसेमंद रणनीतिकार सुदिव्य कुमार का निधन
पर्दे के पीछे सक्रिय नेता, संकट प्रबंधन में निभाई अहम भूमिका
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के करीबी रणनीतिकार और पूर्व मंत्री सुदिव्य कुमार का निधन हो गया है। वे विपक्ष के नेता के सलाहकार और सरकार में मंत्री के रूप में कार्यरत थे तथा पर्यटन, उच्च शिक्षा और नगर विकास विभागों में भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री ने उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताया है।
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झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के करीबी और पार्टी के रणनीतिकार सुदिव्य कुमार का निधन हो गया है। वे लंबे समय तक विपक्ष के नेता के सलाहकार और सरकार में मंत्री के रूप में सक्रिय रहे। मुख्यमंत्री ने उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताया।
सुदिव्य कुमार 2014 से 2019 के बीच विपक्ष के नेता हेमंत सोरेन के भरोसेमंद सलाहकार और रणनीतिकार रहे। पार्टी में उन्हें थिंक टैंक के रूप में देखा जाता था। हेमंत सोरेन की राजनीतिक यात्रा के कई निर्णायक मोड़ों पर उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही।
2024 में हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के दौरान पार्टी के संकट प्रबंधन से लेकर कल्पना सोरेन को स्थापित करने की रणनीति में सुदिव्य की सक्रिय भागीदारी रही। गांडेय उपचुनाव में कल्पना सोरेन के अभियान की कमान संभालना इसका बड़ा उदाहरण था।
सरकार में आने के बाद वे पर्यटन, उच्च शिक्षा और नगर विकास जैसे विभागों के मंत्री बने। खासकर पर्यटन में उनके काम ने यह दिखाया कि उनकी राजनीतिक समझ केवल चुनावी रणनीति तक सीमित नहीं थी। वे नए विचारों को नीतियों और परियोजनाओं में बदलने की क्षमता रखते थे।
सरकार के भीतर संकट की घड़ी में संवाद स्थापित करने की उनकी क्षमता भी महत्वपूर्ण थी। हालिया छात्र आंदोलन के दौरान सरकार की ओर से बातचीत के लिए उन्हें प्रमुख वार्ताकार बनाया गया था, जो मुख्यमंत्री के उनके राजनीतिक विवेक और संवाद कौशल पर भरोसे को दर्शाता है।
विधानसभा में उनकी प्रभावशाली और तथ्यपरक भूमिका की चर्चा सत्ता पक्ष के साथ विपक्ष के नेताओं ने भी की। शायद इसी वजह से उनके निधन पर राजनीतिक दलों की सीमाएं धुंधली पड़ गईं।
उनका अंतिम सरकारी दौरा कर्नाटक मॉडल का अध्ययन कर झारखंड के पर्यटन रिसॉर्ट और वन पर्यटन को बेहतर बनाने की योजना लेकर था। निधन से करीब 60 घंटे पहले किया गया उनका सोशल मीडिया पोस्ट भी इसी प्रयास से जुड़ा था। यह उनकी कार्यशैली की मार्मिक तस्वीर है कि अंतिम समय तक वे काम और योजना में सक्रिय रहे।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रविवार को गिरिडीह के हरसिंहरायडीह स्थित सुदिव्य के आवास पहुंचे। उन्होंने पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और शोक-संतप्त परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की।
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि विश्वास नहीं हो रहा कि वे अब हमारे बीच नहीं हैं। सोनू भैया मेरे लिए बड़े भाई का स्नेह और मित्र का अपनापन दोनों थे। शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया, लेकिन उनके साथ बिताए पल हमेशा जीवित रहेंगे।
झारखंड में बीते छह साल में पद पर रहते चार मंत्रियों का असामयिक निधन हो चुका है। हाजी हुसैन अंसारी, जगरनाथ महतो, रामदास सोरेन के बाद अब सुदिव्य कुमार का निधन हुआ है। झारखंड गठन के बाद से वे पांचवें मंत्री हैं जिनकी पद पर रहते आकस्मिक मौत हुई।
सोनू भैया का जाना अपूरणीय क्षति है
हेमंत सोरेन, मुख्यमंत्री
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- सुदिव्य कुमार की राजनीतिक यात्रा में उनकी क्या खास भूमिका थी?
- वे हेमंत सोरेन की राजनीतिक यात्रा के निर्णायक मोड़ों पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।
- सुदिव्य कुमार ने सरकार में किस विभाग में खास काम किया?
- उनका खास योगदान पर्यटन विभाग में था, जहां उन्होंने नए विचारों को नीतियों में बदला।
- सुदिव्य कुमार का अंतिम सरकारी दौरा किस विषय से जुड़ा था?
- उन्होंने कर्नाटक मॉडल का अध्ययन कर झारखंड के पर्यटन और वन पर्यटन में सुधार की योजना बनाई थी।
- उनके निधन पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने क्या कहा?
- मुख्यमंत्री ने उन्हें बड़े भाई और मित्र का स्नेह बताया और उनके साथ बिताए पलों को याद किया।
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