पटना में SVU ने पांच ठिकानों पर छापेमारी की
लघु जल संसाधन विभाग के इंजीनियर राजेंद्र कुमार पर आय से अधिक संपत्ति का मामला
पटना में स्पेशल विजिलेंस यूनिट ने लघु जल संसाधन विभाग के सुपरिटेंडेंट इंजीनियर राजेंद्र कुमार के पांच ठिकानों पर छापेमारी की है, जिन पर 3 करोड़ रुपये से अधिक की आय से अधिक संपत्ति रखने का आरोप है। गया में प्रवर्तन निदेशालय ने रामनंदी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स लिमिटेड से जुड़े ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन किया है, कंपनी पर 85 करोड़ रुपये के लोन में से 58 करोड़ रुपये के गलत उपयोग का आरोप है।
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पटना में स्पेशल विजिलेंस यूनिट ने लघु जल संसाधन विभाग के सुपरिटेंडेंट इंजीनियर राजेंद्र कुमार के पांच ठिकानों पर छापेमारी की है। राजेंद्र कुमार पर 3 करोड़ रुपए से अधिक की आय से अधिक संपत्ति रखने का आरोप है। हाल ही में उन्होंने मुंबई के पनवेल इलाके में 1.75 करोड़ रुपए की जमीन खरीदी है।
SVU की पांच अलग-अलग टीमें एक साथ कार्रवाई कर रही हैं। टीम पटना स्थित लघु जल संसाधन विभाग के दफ्तर में भी पहुंची है। राजेंद्र कुमार की वर्तमान पोस्टिंग छपरा अंचल में अधीक्षण अभियंता के रूप में है।
गया में प्रवर्तन निदेशालय ने रामनंदी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स लिमिटेड से जुड़े ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया है। कंपनी पर बैंकों के कंसोर्टियम से मिले 85 करोड़ रुपये के लोन में से 58 करोड़ रुपये डायवर्ट करने का आरोप है।
जांच में पता चला है कि यह रकम फर्जी प्रोजेक्ट कंप्लीशन रिपोर्ट के आधार पर ली गई थी। कंपनी का नियंत्रण अखौरी गोपाल और उनके बेटों निशांत एवं नितेश के पास है। लोन के बदले पर्सनल गारंटी भी दी गई थी।
इसके अलावा, पांच संपत्तियों को टाटा मोटर्स से जुड़े बकाए के खिलाफ गिरवी रखा गया था, जिन्हें बाद में बेच दिया गया जबकि वे पहले से गिरवी थीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- राजेंद्र कुमार की वर्तमान जिम्मेदारी क्या है?
- राजेंद्र कुमार वर्तमान में छपरा अंचल में अधीक्षण अभियंता के पद पर तैनात हैं।
- प्रवर्तन निदेशालय की जांच में लोन डायवर्शन का आधार क्या पाया गया?
- जांच में पता चला कि लोन फर्जी प्रोजेक्ट कंप्लीशन रिपोर्ट के आधार पर लिया गया था।
- रामनंदी होटल्स एंड रिसॉर्ट्स का नियंत्रण किसके पास है?
- कंपनी का नियंत्रण अखौरी गोपाल और उनके बेटों निशांत व नितेश के पास है।
- टाटा मोटर्स से जुड़ी संपत्तियों का क्या मामला है?
- पांच संपत्तियाँ टाटा मोटर्स के बकाए के खिलाफ गिरवी रखी गई थीं, जिन्हें बाद में बेचा गया था।
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