हिमुडा सीईओ नियुक्ति रद्द, CAPF में IPS डेपुटेशन पर जवाब मांगा
हिमाचल हाईकोर्ट ने अपात्र नियुक्ति को अवैध ठहराया, सुप्रीम कोर्ट ने 46 IPS अधिकारियों के डेपुटेशन पर केंद्र से स्पष्टीकरण मांगा
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने हिमुडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति को अवैध कर रद्द कर दिया है और नई नियुक्ति के लिए दो सप्ताह में पात्र उम्मीदवार चुनने का निर्देश दिया है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में 46 आईपीएस अधिकारियों को डेपुटेशन पर भेजने के मामले में केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है और डेपुटेशन की संख्या को कम करने के निर्देश दिए हैं।
AI-निर्मित सार · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने हिमुडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी-सह-सचिव की नियुक्ति को अवैध कर रद्द कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में 46 आईपीएस अधिकारियों को डेपुटेशन पर भेजने के मामले में केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है।
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय की न्यायाधीश ज्योत्सना रेवाल दुआ की पीठ ने 2012 के सेवा नियमों के विरुद्ध अपात्र अधिकारी की नियुक्ति को रद्द करते हुए दो सप्ताह में पात्र उम्मीदवार की नई नियुक्ति का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ता मुख्य अभियंता अंजोरी कपूर ने जूनियर अधिकारी सुरिंदर कुमार वशिष्ठ की सीईओ पद पर नियुक्ति को चुनौती दी थी। न्यायालय ने पाया कि प्रतिवादी को नियमित मुख्य अभियंता के रूप में पदोन्नत नहीं किया गया था और वे इस पद के लिए पात्र नहीं थे। अदालत ने 27 मई, 2025 को जारी अधिसूचना को भी खारिज कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने 2025 के फैसले के बावजूद केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में 46 आईपीएस अधिकारियों को डेपुटेशन पर भेजने के मामले में गृह मंत्रालय से विस्तृत जवाब मांगा है। इसमें दो एसपी, 26 डीआईजी और 18 आईजी शामिल हैं। सबसे अधिक डेपुटेशन बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स में हुए हैं। कोर्ट ने डेपुटेशन की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि क्या संबंधित बलों ने औपचारिक मांग की और मई 2025 के फैसले के बाद ये डेपुटेशन क्यों किए गए।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि CAPF कैडर में डेपुटेशन पदों की संख्या धीरे-धीरे कम की जाए और इसे दो साल की अधिकतम अवधि में पूरा किया जाए। कोर्ट अपने 23 मई, 2025 के फैसले के कार्यान्वयन की निगरानी जारी रखेगा। अवमानना की कार्यवाही से जुड़े मामलों की अगली सुनवाई 22 सितंबर, 2026 को होगी।
सुप्रीम कोर्ट में नौ सितंबर को बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण मामले की सुनवाई तय है। बनभूलपुरा का मामला तीसरे नंबर पर सूचीबद्ध है। पुलिस ने इस क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है। मामले में जल्द फैसला आने की उम्मीद है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- हिमुडा सीईओ नियुक्ति रद्द क्यों की गई?
- न्यायालय ने पाया कि नियुक्त अधिकारी पद के लिए पात्र नहीं था और सेवा नियमों का उल्लंघन हुआ।
- केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में IPS डेपुटेशन मामले की मुख्य चिंता क्या है?
- कोर्ट ने पूछा कि क्या संबंधित बलों ने औपचारिक मांग की और मई 2025 के फैसले के बाद डेपुटेशन क्यों किए गए।
- सुप्रीम कोर्ट ने डेपुटेशन नीति पर क्या निर्देश दिए हैं?
- डीपुटेशन पदों की संख्या धीरे-धीरे कम कर दो साल की अधिकतम अवधि में समाप्त करने को कहा गया है।
- बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण मामले की वर्तमान स्थिति क्या है?
- इस मामले की सुनवाई 9 सितंबर को होनी है और पुलिस ने क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है।
AI-निर्मित · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
50 free articles left today
0 of 50 free reads used today.
पाठकों की पसंद






Comments
0 threadsNo approved comments yet. Start the discussion.