इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आकृति चौधरी के खिलाफ रासुका कार्रवाई रद्द की
हाईकोर्ट ने पांच लाख रुपये मुआवज़ा देने का आदेश दिया, लेकिन आकृति अभी हिरासत में हैं
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा आकृति चौधरी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत की गई कार्रवाई को रद्द कर दिया है और पांच लाख रुपये का मुआवज़ा देने का भी आदेश दिया है, जो संबंधित अधिकारियों के वेतन से वसूला जाएगा। हालांकि, आकृति फिलहाल हिरासत में रहेंगी क्योंकि अन्य मामलों में उन्हें ज़मानत नहीं मिली है।
AI-निर्मित सार · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा आकृति चौधरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा श्रमिक प्रदर्शन मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत लगाई गई एहतियाती हिरासत रद्द कर दी है। अदालत ने पांच लाख रुपये मुआवज़ा देने का भी आदेश दिया है, जो संबंधित अधिकारियों के वेतन से वसूला जाएगा।
हाईकोर्ट का फैसला और मुआवज़ा
दो जजों की पीठ ने 2 सितंबर को आकृति चौधरी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत की गई कार्रवाई को रद्द कर दिया। अदालत ने यह भी कहा कि पांच लाख रुपये का मुआवज़ा उन अधिकारियों के वेतन से वसूला जाएगा जो इस कानूनी कार्रवाई में शामिल थे। हालांकि, आकृति फिलहाल हिरासत में ही रहेंगी क्योंकि अन्य मामलों में उन्हें ज़मानत नहीं मिली है।
अदालत में सुनवाई और दलीलें
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि क्या आकृति ने किसी हिंसा में भाग लिया या किसी को उकसाया। राज्य ने एक वीडियो पेश करने का दावा किया था, लेकिन वह वीडियो पेश नहीं किया गया।
पिता का बयान और आगे की कार्रवाई
आकृति के पिता अरुण चौधरी ने कहा कि उन्हें हाईकोर्ट के फैसले से खुशी और राहत मिली है। उन्होंने बताया कि आकृति को 11 मामलों में से पांच में ज़मानत मिल चुकी है और बाकी मामलों की सुनवाई के लिए वे हाईकोर्ट का रुख करेंगे। बचाव पक्ष ने कहा कि आकृति को गैर-कानूनी तरीके से गिरफ्तार किया गया और उन पर बिना ठोस सबूत रासुका की धाराएं लगाई गईं।
प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई
अप्रैल में नोएडा में श्रमिकों के प्रदर्शन के दौरान आकृति चौधरी को गिरफ्तार किया गया था। प्रदर्शन में बेहतर वेतन और काम की स्थितियों की मांग की गई थी। पुलिस ने आरोप लगाया था कि प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में आकृति की भूमिका थी, लेकिन हाईकोर्ट ने अभियोजन पक्ष के सबूतों को अपर्याप्त बताया।
रासुका का इस्तेमाल, जो एक अपवाद होना चाहिए, केवल इस आधार पर किसी व्यक्ति को हिरासत में रखने के लिए नहीं किया जा सकता कि उसके जमानत पर बाहर आने की संभावना है.
इलाहाबाद हाई कोर्ट
हाईकोर्ट ने बुधवार को प्रतिरोध के अधिकार के बारे में टिप्पणियां कीं, मुख्य रूप से यह कि विरोध प्रदर्शन लोकतंत्र का अहम हिस्सा हैं और एहतियाती हिरासत से पहले किसी छात्र के रिकॉर्ड और बैकग्राउंड पर विचार किया जाना चाहिए.
गुप्ता
5 free articles left today
0 of 5 free reads used today.
पाठकों की पसंद










Comments
0 threadsNo approved comments yet. Start the discussion.