रास में सात दिवसीय भागवत कथा का धार्मिक आयोजन के साथ समापन
भगवान श्रीराम की झांकी रही आकर्षण का केंद्र, श्रद्धालुओं ने महाप्रसादी ग्रहण की
राजस्थान के ब्यावर क्षेत्र में रास में सात दिनों तक चले भागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव का नोहरे के जैन स्थानक मठ में धार्मिक कार्यक्रमों के साथ समापन हुआ। आयोजन में कथावाचक मुकेश तिवाड़ी ने श्रीमद्भागवत कथा के प्रसंग सुनाए और भजन-कीर्तन हुआ। समापन पर श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम की झांकी का दर्शन किया और महाप्रसादी ग्रहण की।
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ब्यावर। राजस्थान के ब्यावर क्षेत्र में रास में सात दिनों तक चले भागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव का रविवार को धार्मिक कार्यक्रमों के साथ समापन हुआ। नोहरे के जैन स्थानक मठ में आयोजित समापन समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
सात दिवसीय आयोजन में कथावाचक मुकेश तिवाड़ी ने श्रीमद्भागवत कथा के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन करते हुए भक्ति, धर्म, सदाचार और संस्कारों का महत्व बताया। भगवान की लीलाओं और धार्मिक प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
आयोजन के दौरान प्रकाश नागौरी एंड पार्टी और भजन कलाकार मनोज खिंयाला ने भजन प्रस्तुतियां दीं, जिससे कथा स्थल भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। रविवार को समापन अवसर पर भी देर शाम तक भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम चलते रहे।
समापन समारोह के लिए कथा स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। भगवान श्रीराम की झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही, जिसे बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने देखा और पूजा-अर्चना कर क्षेत्र में सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की।
कथा के समापन के बाद महाप्रसादी का आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने पंगत में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन को सफल बनाने में भामाशाहों, ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं ने सहयोग किया। आयोजकों ने सभी सहयोगियों और श्रद्धालुओं का आभार जताया।
समापन अवसर पर नाथूलाल सोनी, पारस छीपा, रतन खारा, विजय राज जोशी, सविता मैडम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु मौजूद रहे। सात दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन से रास क्षेत्र में भक्ति और आध्यात्मिकता का माहौल बना रहा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- भागवत कथा आयोजन कहाँ हुआ था?
- यह आयोजन राजस्थान के ब्यावर क्षेत्र में हुआ था।
- कथा के समापन पर क्या कार्यक्रम आयोजित किया गया?
- समापन पर देर शाम तक भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ।
- समापन समारोह में कौन-कौन उपस्थित थे?
- नाथूलाल सोनी, पारस छीपा, रतन खारा, विजय राज जोशी, सविता मैडम और अन्य ग्रामीण और श्रद्धालु मौजूद थे।
- आयोजन को सफल बनाने में किसका सहयोग रहा?
- भामाशाहों, ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग किया।
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