बूंदी में राजस्थानी-हाड़ौती कवि सम्मेलन में ठहाकों और तालियों की गड़गड़ाहट
कुंभा स्टेडियम में हास्य, व्यंग्य और राष्ट्रभक्ति की रचनाओं ने भोर तक बांधे रखा
बूंदी के कुंभा स्टेडियम में कजली तीज मेले के दौरान राजस्थानी-हाड़ौती कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसमें शहर और ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रोता शामिल हुए। कवियों ने हाड़ौती और राजस्थानी भाषाओं में हास्य, व्यंग्य, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक विषयों पर रचनाएं प्रस्तुत कीं, जिनका श्रोताओं ने देर रात तक आनंद लिया।
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बूंदी। बूंदी के कुंभा स्टेडियम में शनिवार रात कजली तीज मेले के दौरान राजस्थानी-हाड़ौती कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रोता देर रात तक कवि सम्मेलन में रुचि लेते रहे।
मंच पर प्रस्तुत रचनाओं में हाड़ौती और राजस्थानी भाषा की मिठास के साथ हास्य, व्यंग्य, शृंगार और राष्ट्रभक्ति का संगम देखने को मिला। वरिष्ठ हास्य गीतकार बाबू बंजारा बारां, मंच संचालक प्रेम शास्त्री कोटा, हास्य कवि अंदाज हाड़ौती करवर, और अन्य कवियों ने स्वर्णिम इतिहास, दाम्पत्य प्रगाढ़ता, लोकतंत्र, और सामाजिक विषयों पर रचनाएं सुनाईं।
कवि सम्मेलन में कभी चुटीली पंक्तियों पर पूरा स्टेडियम ठहाकों से गूंज उठा तो राष्ट्रभक्ति की ओजपूर्ण रचनाओं पर तालियों की गड़गड़ाहट हुई। श्रोताओं ने हास्य-व्यंग्य के तीरों पर खुलकर हंसी और कार्यक्रम देर रात से भोर तक चलता रहा।
मंच पर मायड़ भाषा की मिठास ने बूंदी की लोक संस्कृति और हाड़ौती की पहचान को उजागर किया। कवियों ने रोजमर्रा के जीवन और समसामयिक परिस्थितियों पर हास्य-व्यंग्य के माध्यम से सामाजिक सरोकारों को भी छुआ।
शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों से आए श्रोता कवि सम्मेलन की प्रस्तुतियों में इस कदर रम गए कि वे अपनी जगहों पर देर तक डटे रहे। कई बार तालियों की गड़गड़ाहट इतनी तेज हुई कि पूरा स्टेडियम गूंज उठा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- कवि सम्मेलन में किन विषयों पर कविताएं पेश की गईं?
- कवियों ने स्वर्णिम इतिहास, दाम्पत्य प्रगाढ़ता, लोकतंत्र और सामाजिक मुद्दों पर रचनाएं सुनाईं।
- प्रस्तुत कविताओं की भाषाई विशेषताएं क्या थीं?
- मंच पर मायड़ भाषा की मिठास ने स्थानीय लोक संस्कृति को उजागर किया।
- कवि सम्मेलन के वक्ता कौन-कौन थे?
- वरिष्ठ हास्य गीतकार बाबू बंजारा, मंच संचालक प्रेम शास्त्री, हास्य कवि अंदाज हाड़ौती सहित अन्य कवि शामिल थे।
- कवि सम्मेलन में श्रोताओं की प्रतिक्रिया कैसी रही?
- श्रोताओं ने हास्य-व्यंग्य को खुलकर सराहा और कार्यक्रम के दौरान देर तक रुके रहे।
- कार्यक्रम की अवधि कितनी थी?
- कार्यक्रम देर रात से भोर तक चला।
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