कांग्रेस-भाजपा के पूर्व पार्षद निर्दलीय चुनाव में उतरे
दोनों दलों के बड़े नेताओं की समझाइश भी बागी उम्मीदवारों को रोक नहीं सकी
बूंदी नगर परिषद चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के कई पूर्व पार्षद और उनके परिजन निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में हैं, क्योंकि उन्हें अपने दलों की टिकट नहीं मिली। इससे कई वार्डों में त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। दोनों प्रमुख दलों की समझाइश के बावजूद ये उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं।
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बूंदी। बूंदी नगर परिषद चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के कई पूर्व पार्षद और उनके परिजन अब निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। दोनों प्रमुख दलों के बड़े नेताओं की मान मनुहार के बावजूद ये पूर्व पार्षद अपने दल की टिकट न मिलने पर चुनाव मैदान में हैं। इससे कई वार्डों में त्रिकोणीय मुकाबला बन गया है।
वार्ड 52 में भाजपा पार्षद हरिशंकर सैनी ने अपनी पत्नी रेखा सैनी के लिए टिकट मांगा था, लेकिन यह सीट सामान्य महिला के लिए आरक्षित होने के कारण भाजपा ने टिकट नहीं दिया। रेखा सैनी अब निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रही हैं। इस वार्ड से भाजपा ने पूर्व सभापति महावीर मोदी के पुत्र यश मोदी को टिकट दिया है, जबकि रामवीर भी निर्दलीय उम्मीदवार हैं।
वार्ड 27 से भाजपा ने स्थानीय भरत शर्मा को टिकट दिया है, जबकि पूर्व नेता प्रतिपक्ष मुकेश माधवानी निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। इस वार्ड में कुल पांच उम्मीदवार हैं, जिनमें पूर्व निर्दलीय पार्षद हरिओम गुर्जर भी शामिल हैं।
कांग्रेस में वार्ड 54 से टिकट के लिए पूर्व पार्षद देवराज गोचर ने आवेदन किया था, लेकिन कांग्रेस ने भरतराम गुर्जर को टिकट दिया है। इस वार्ड में दो निर्दलीय और आम आदमी पार्टी का प्रत्याशी भी चुनावी मैदान में हैं।
वार्ड 44 से कांग्रेस ने सुरेश कुमार को टिकट दिया है, जबकि पूर्व पार्षद अंकित बुलीवाल ने टिकट न मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया है।
वार्ड एक से कांग्रेस पार्षद रहे रोहित बैरागी की मां प्रभात देवी को टिकट नहीं मिला, इसलिए वे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव में हैं।
शहर की नगर परिषद के पहले कांग्रेस सभापति रहे सदाकत अली की पत्नी सरूर बेगम पार्षद थीं। इस बार उनके परिवार से भतीजे जिशान ने कांग्रेस से टिकट मांगा था, लेकिन टिकट न मिलने पर वे वार्ड 17 से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस ने इस वार्ड से जाहिर मोहम्मद को टिकट दिया है।
दोनों प्रमुख दलों के बड़े नेताओं की समझाइश भी इन बागी उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से नहीं रोक सकी है। वार्ड 17 में मीना भी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में हैं, जिससे इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला बन गया है।
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