राजस्थान के 2550 वार्डों में भाजपा-कांग्रेस ने नहीं उतारे प्रत्याशी
प्रदेश के 309 निकायों के 10245 वार्डों में करीब 25 फीसदी वार्डों में दोनों दलों का अभाव
दोनों प्रमुख दलों के मैदान से हटने का फायदा स्थानीय और
राजस्थान में 309 नगरीय निकायों के 10245 वार्डों में करीब 2550 वार्ड ऐसे हैं जहां भाजपा या कांग्रेस ने कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है, जो कुल वार्डों का लगभग 25% है। इससे स्थानीय और क्षेत्रीय दलों को फायदा हो रहा है और चुनावी नतीजे प्रभावित हो सकते हैं। भाजपा और कांग्रेस ने क्रमशः 1050 और 1500 वार्ड खाली छोड़े हैं।
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जयपुर। राजस्थान के 309 नगरीय निकायों के 10245 वार्डों में करीब 2550 ऐसे वार्ड हैं, जहां भाजपा या कांग्रेस में से किसी एक ने उम्मीदवार नहीं उतारा है। यह संख्या कुल वार्डों का लगभग 25 फीसदी है, जिससे स्थानीय समीकरण और चुनावी नतीजे प्रभावित हो सकते हैं।
दोनों प्रमुख दलों के मैदान से हटने का फायदा स्थानीय और क्षेत्रीय दलों को मिल रहा है, जिससे निकायों में बहुमत के समीकरण बदल सकते हैं।
वार्डों में खालीपन और कारण
भाजपा ने करीब 1050 वार्डों में उम्मीदवार नहीं उतारे, जबकि कांग्रेस ने लगभग 1500 वार्ड खाली छोड़े हैं। भाजपा के लिए यह करीब 10 फीसदी वार्ड हैं, जबकि कांग्रेस के लिए यह संख्या लगभग 14 फीसदी है।
भाजपा सूत्रों के अनुसार, मुस्लिम बहुल इलाकों और जहां पार्टी की पकड़ कमजोर है, वहां प्रत्याशी नहीं उतारे गए। कांग्रेस में गुटबाजी और सिंबल आवंटन में देरी के कारण कई दावेदार नामांकन नहीं कर सके। नामांकन के अंतिम दिन तक कई जिलों में सिंबल जारी नहीं हो पाने से भी उम्मीदवार प्रभावित हुए।
इस वजह से दोनों दलों ने कुल मिलाकर करीब 25 फीसदी वार्डों में चुनावी मैदान खाली छोड़ा है। इससे स्थानीय उम्मीदवारों और छोटे दलों को मुकाबला करने का मौका मिला है।
चुनावी प्रक्रिया और नामांकन
प्रदेश भर में 10,245 वार्डों के लिए कुल 69,939 नामांकन दाखिल किए गए, जिनमें से 7,854 नामांकन तकनीकी कमियों के कारण रद्द कर दिए गए। नामांकन प्रक्रिया सोमवार आधी रात तक ऑनलाइन जारी रही, जिससे अंतिम आंकड़े मंगलवार सुबह सामने आए।
नाम वापसी की प्रक्रिया बुधवार से शुरू होकर गुरुवार दोपहर तीन बजे तक चलेगी।
बीकानेर में भाजपा और कांग्रेस ने चुनाव समन्वय समिति का गठन किया है, जबकि छह नगर निकायों के लिए समन्वय टोली भी बनाई गई है।
नगर निगम चुनाव में आरक्षण के बाद टिकट वितरण ने नया सियासी समीकरण खड़ा किया है, जिसमें ओबीसी, एससी और एसटी उम्मीदवारों को भी टिकट दिए गए हैं।
चुनावी नतीजों पर असर
जहां दोनों प्रमुख दलों में से कोई एक मैदान में नहीं है, वहां निर्दलीय और क्षेत्रीय दलों के उम्मीदवारों की भूमिका बढ़ गई है। ऐसे वार्डों में प्रत्याशियों की व्यक्तिगत छवि और स्थानीय मुद्दे चुनाव परिणाम तय करेंगे।
चुनाव के बाद निकायों में बोर्ड बनाने के समीकरण भी इन वार्डों के परिणामों पर निर्भर होंगे।
राजस्थान में निकाय चुनाव की यह स्थिति पिछले नौ दिनों से चर्चा में है, जिसमें दोनों प्रमुख दलों के बीच टिकट वितरण और प्रत्याशी चयन को लेकर जटिलताएं सामने आई हैं।
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