बागाबा खेड़ा में श्मशान भूमि न होने से खुले में अंतिम संस्कार
बारिश में रास्ते की दिक्कत और सुविधाओं के अभाव से ग्रामीण परेशान
भीलवाड़ा के बागाबा खेड़ा गांव में श्मशान भूमि न होने के कारण ग्रामीणों को शवों का अंतिम संस्कार खुले में करना पड़ता है। रास्ते की खराब स्थिति और बारिश के समय सुविधाओं की कमी से ग्रामीणों को कठिनाई का सामना करना पड़ता है। पंचायत प्रशासन को कई बार समस्या की सूचना दी गई है, लेकिन अभी तक इसका समाधान नहीं हुआ है।
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भीलवाड़ा। भीलवाड़ा के बागाबा खेड़ा गांव में श्मशान भूमि न होने के कारण ग्रामीणों को शवों का अंतिम संस्कार खुले में करना पड़ रहा है। रास्ते में अंग्रेजी बबूल की झाड़ियां होने से शव ले जाना मुश्किल हो जाता है। बारिश के दिनों में स्थिति और खराब हो जाती है।
गांव में श्मशान भूमि की व्यवस्था न होने से खारी नदी के किनारे अंतिम संस्कार किया जाता है। रास्ता ठीक न होने के कारण शव को ले जाने में काफी परेशानी होती है। बारिश के दौरान चार घंटे तक इंतजार करना पड़ता है क्योंकि पीने का पानी, बैठने की जगह और टीन शेड जैसी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है।
ग्रामीणों ने पंचायत प्रशासन को कई बार इस समस्या की जानकारी दी है, लेकिन अभी तक इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है। वे जल्द श्मशान भूमि के साथ रास्ता और जरूरी सुविधाएं देने की मांग कर रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- ग्रामीण अंतिम संस्कार के लिए कौन सी जगह इस्तेमाल करते हैं?
- ग्रामीण खारी नदी के किनारे शवों का अंतिम संस्कार करते हैं क्योंकि गांव में श्मशान भूमि नहीं है।
- बारिश के दौरान ग्रामीणों को क्या समस्याएँ होती हैं?
- बरसात के दिनों में पीने के पानी, बैठने की जगह और टीन शेड जैसी सुविधाओं का अभाव होता है।
- ग्रामीणों की प्रशासन से क्या मांग है?
- ग्रामीण श्मशान भूमि के साथ-साथ रास्ता और आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने की मांग कर रहे हैं।
- क्या पंचायत प्रशासन ने इस समस्या का समाधान किया है?
- ग्रामीणों ने कई बार शिकायत की है लेकिन अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है।
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