निमोद बोचलिया नाड़ी में 200 से अधिक पौधे लगाए गए
फलदार और छायादार पौधों के साथ बाड़ लगाकर पौधों की सुरक्षा भी की गई
राजस्थान के निमोद गांव की बोचलिया नाड़ी में पर्यावरण संरक्षण के लिए 200 से अधिक नीम, पीपल, बरगद, शीशम और विभिन्न फलदार पौधे लगाए गए। पौधों की सुरक्षा के लिए बाड़ और मेड़ लगाई गई तथा नरेगा कर्मचारियों को उनकी देखभाल की जिम्मेदारी दी गई।
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डीडवाना। डीडवाना के निमोद गांव की बोचलिया नाड़ी में पर्यावरण बचाने और हरियाली बढ़ाने के लिए 200 से ज्यादा पौधरोपण किए गए। पुष्कर नर्सरी से लाए गए नीम, पीपल, बरगद, शीशम समेत कई फलदार पौधे लगाए गए। पौधों की सुरक्षा के लिए नाड़ी के चारों ओर बाड़ लगाई गई।
गौशाला अध्यक्ष भूराराम कूदना की मौजूदगी में हुए इस कार्यक्रम में आम, अमरूद, जामुन, अनार, आंवला, बेर, सीताफल, नींबू, पपीता और शहतूत जैसे फलदार पौधे भी लगाए गए। हर पौधे के आसपास मेड़ बनाई गई ताकि पशुओं से नुकसान न हो।
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण संस्कृति की झलक देखने को मिली। लोकगीत और बधावे गाए गए, जिससे नाड़ी परिसर में खुशी और उत्साह का माहौल बना। ग्रामीणों ने पारंपरिक तरीके से इस अभियान में भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
सभी नरेगा कर्मचारियों को पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्हें नियमित पानी देने, पौधों की सुरक्षा करने और निगरानी करने के निर्देश दिए गए। इस मौके पर भंवरू खान, किशन लाल, आनंदी लाल शर्मा, भंवर लाल गढ़वाल, जोराराम कूदना समेत कई नरेगा श्रमिक और ग्रामीण मौजूद थे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- पौधों की सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था की गई?
- हर पौधे के आसपास मेड़ बनाई गई है ताकि पशु उनसे नुकसान न पहुंचा सकें।
- कार्यक्रम में ग्रामीण संस्कृति कैसे दिखाई दी?
- कार्यक्रम के दौरान लोकगीत और बधावे गाए गए, जिससे खुशी और उत्साह का वातावरण बना।
- पौधरोपण अभियान में कौन-कौन शामिल थे?
- भंवरू खान, किशन लाल, आनंदी लाल शर्मा, भंवर लाल गढ़वाल, जोराराम कूदना और कई अन्य नरेगा श्रमिक तथा ग्रामीण शामिल थे।
- नरेगा कर्मचारियों को क्या जिम्मेदारी दी गई?
- उन्हें पौधों को नियमित पानी देने, सुरक्षा करने और निगरानी करने के निर्देश दिए गए।
- किस नाड़ी में पौधरोपण किया गया?
- यह पौधरोपण डीडवाना के निमोद गांव की बोचलिया नाड़ी में किया गया।
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