मांचड़ी से देवनारायण धाम की 21वीं पदयात्रा शुरू
श्रद्धालुओं ने भंडारे के लिए सहयोग राशि दी, 14 सितंबर को पूजा के बाद जोधपुरिया धाम के लिए रवाना
टोंक जिले के मांचड़ी गांव के शिव मंदिर से श्री देव सेवा समिति की ओर से 21वीं देवनारायण भगवान की पदयात्रा शुरू हुई है, जिसमें आसपास के कई गांवों के श्रद्धालु शामिल हैं। यह यात्रा 16 सितंबर को जोधपुरिया स्थित श्री देवनारायण धाम पहुंचेगी और इसमें लगभग 350 श्रद्धालु भाग लेंगे। पदयात्रा के दौरान ठहरने और पूजा-पाठ की व्यवस्था की गई है।
AI-निर्मित सार · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
टोंक। टोंक जिले के मांचड़ी गांव के शिव मंदिर से श्री देव सेवा समिति की ओर से उत्साह और जयकारों के बीच 21वीं देवनारायण भगवान की पदयात्रा रवाना हुई। इस धार्मिक यात्रा में मांचड़ी समेत आसपास के कई गांवों के श्रद्धालु शामिल हैं। पदयात्रा में भाजपा नेता नेतराम मावई और समाजसेवी भीमसिंह गुर्जर ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर इसे शुरू किया।
पदयात्रा में मांचड़ी, खुर्द, भांवरा, बालाखेड़ा, रूगनाथपुरा जैसे गांवों के श्रद्धालुओं ने भाग लिया। समिति के महेश खटाना, प्यार सिंह सूबेदार, लखन पीलवाल, रूप सिंह, विकास फौजी और विजय मीना ने अतिथियों का साफा और माला पहनाकर स्वागत किया। डीजे पर भजनों के बीच यह यात्रा शिव मंदिर से शुरू हुई।
ग्राम पंचायत रूपपुरा क्षेत्र से 18वीं पैदल यात्रा 14 सितंबर को सुबह 8 बजे श्री देवनारायण भगवान के मंदिर में पूजा-पाठ के बाद जोधपुरिया धाम के लिए रवाना होगी। रूपपुरा, परवन बूंदी, श्रीपुरा और मोटना के महिला-पुरुष श्रद्धालु भक्ति गीतों पर नृत्य करते हुए यात्रा में शामिल होंगे।
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था की गई है। 14 सितंबर की शाम को यात्री टोंक में और 15 सितंबर की शाम को निवाई में विश्राम करेंगे। 16 सितंबर को यात्रा जोधपुरिया गांव स्थित श्री देवनारायण धाम पहुंचेगी। इस धार्मिक यात्रा में करीब 350 श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। युवा, महिलाएं और बुजुर्ग उत्साह से भाग लेने की तैयारी कर रहे हैं।
यह पदयात्रा पिछले दिनों भीलवाड़ा में विधायक के साथ शुरू हुई यात्रा से अलग है। मौके पर अतिथियों ने भंडारे के लिए सहयोग राशि भी प्रदान की। पदयात्राओं से लोगों में आपसी प्रेम, भाईचारा और सौहार्द बढ़ता है, अतिथियों ने कहा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- पदयात्रा में कौन-कौन से गांवों के श्रद्धालु शामिल हैं?
- मांचड़ी, खुर्द, भांवरा, बालाखेड़ा और रूगनाथपुरा के श्रद्धालु यात्रा में भाग ले रहे हैं।
- यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए क्या व्यवस्थाएं की गई हैं?
- यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था की गई है, जिसमें 14 सितंबर को टोंक और 15 सितंबर को निवाई में विश्राम शामिल है।
- पदयात्राओं का समाज में क्या महत्व बताया गया है?
- अतिथियों ने कहा कि पदयात्राओं से लोगों में आपसी प्रेम, भाईचारा और सौहार्द बढ़ता है।
- क्या यह पदयात्रा हाल ही में हुई अन्य यात्रा से जुड़ी है?
- यह पदयात्रा भीलवाड़ा में विधायक के साथ शुरू हुई यात्रा से अलग है।
AI-निर्मित · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
50 free articles left today
0 of 50 free reads used today.
पाठकों की पसंद






Comments
0 threadsNo approved comments yet. Start the discussion.