ऊधमसिंह नगर में आठ विशेष पीठों के साथ लोक अदालत का आयोजन
लंबित और प्री-लिटिगेशन मामलों का आपसी सहमति से निस्तारण किया जा रहा है
ऊधमसिंह नगर जिले के जिला मुख्यालय पर आठ विशेष पीठों के साथ राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया, जिसमें लंबित और प्री-लिटिगेशन मामलों का त्वरित समाधान किया गया। लोक अदालत के दौरान बैंक, बीमा और अन्य विभागों के सहायता काउंटर भी लगाए गए, जिससे पक्षकारों को न्यायिक प्रक्रिया में लगने वाले समय और खर्च से बचत हुई। जिले के अन्य स्थानों और गाजियाबाद कोर्ट परिसर में भी इसी प्रकार की लोक अदालतें आयोजित की गईं।
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ऊधमसिंह नगर जिले के जिला मुख्यालय पर आठ विशेष पीठों के गठन के साथ राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। यह लोक अदालत लंबित और प्री-लिटिगेशन मामलों को त्वरित और सुलभ तरीके से आपसी सहमति से निपटाने के उद्देश्य से सुबह 10 बजे शुरू होकर शाम पांच बजे तक चली।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से आयोजित इस लोक अदालत में विभिन्न न्यायालयों में लंबित मामलों के साथ-साथ ऐसे प्री-लिटिगेशन मामले भी लिए गए जो अभी न्यायालय में दाखिल नहीं हुए थे। पक्षकारों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया से राहत देने के लिए आपसी सहमति से विवादों का समाधान कराया गया।
लोक अदालत में पक्षकारों की सुविधा के लिए बैंक, बीमा समेत अन्य विभागों के सहायता काउंटर और स्टॉल लगाए गए थे। जिला मुख्यालय के अलावा काशीपुर, खटीमा, बाजपुर, किच्छा समेत जिले की सभी अधीनस्थ अदालतों और बाह्य पीठों में भी लोक अदालत का आयोजन किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि लोक अदालत में अधिक से अधिक मामलों के निस्तारण का प्रयास किया गया। इससे पक्षकारों को न्यायिक प्रक्रिया में लगने वाले समय और खर्च से बचत होगी।
गाजियाबाद कोर्ट परिसर में भी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन हुआ, जहां सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग अपने लंबित मामलों के निस्तारण के लिए पहुंचे। मोटर चालान के पंजीकरण और भुगतान के लिए लंबी कतारें लगीं और कोर्ट परिसर में बने ई-सेवा केंद्र पर लोगों की भीड़ देखी गई।
राष्ट्रीय लोक अदालत में केवल यातायात और मोटर चालान से जुड़े मामले ही नहीं, बल्कि आपराधिक, सिविल, पारिवारिक, बैंक, विद्युत और अन्य प्रकार के लंबित वादों को भी आपसी सहमति और सुलह के आधार पर निस्तारित किया गया।
कोर्ट परिसर में सुबह से ही काफी चहल-पहल बनी रही और लोगों ने अपने मामलों का समाधान कराने के लिए कतारों में धैर्यपूर्वक इंतजार किया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य क्या था?
- मुख्य उद्देश्य लंबित और प्री-लिटिगेशन मामलों का त्वरित समाधान था।
- क्या केवल न्यायालय में दर्ज मामलों को ही देखा गया?
- नहीं, ऐसे भी प्री-लिटिगेशन मामले लिए गए जो अभी न्यायालय में दाखिल नहीं हुए थे।
- लोक अदालत में किन विभागों के सहायता काउंटर लगाए गए थे?
- बैंक, बीमा और अन्य विभागों के काउंटर लगा कर पक्षकारों की सुविधा बढ़ाई गई।
- क्या गाजियाबाद में भी यह कार्यक्रम हुआ था?
- हाँ, गाजियाबाद कोर्ट परिसर में भी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन हुआ जहां बड़ी संख्या में लोग आए।
- लोक अदालत में किन प्रकार के मामलों का समाधान किया गया?
- यातायात, मोटर चालान, आपराधिक, सिविल, पारिवारिक, बैंक, विद्युत और अन्य लंबित वादों का समाधान किया गया।
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