कौशांबी की शालिनी कुशवाहा को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026
सरकारी स्कूल की शिक्षिका ने अनूठे शिक्षण से पूरे राज्य का नाम रोशन किया
उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले की शालिनी कुशवाहा को शिक्षक दिवस पर राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया है। वे चायल ब्लॉक के कंपोजिट विद्यालय रसूलाबाद कोइलहा में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत हैं और बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाने के लिए जानी जाती हैं। इस वर्ष कुल 48 शिक्षकों को यह पुरस्कार मिला है, जिनमें उत्तर प्रदेश के तीन शिक्षक शामिल हैं।
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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले की शालिनी कुशवाहा को 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति भवन नई दिल्ली में आयोजित समारोह में उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान मिला।
शालिनी कुशवाहा चायल ब्लॉक के कंपोजिट विद्यालय रसूलाबाद कोइलहा में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। वे बच्चों को पारंपरिक तरीकों की बजाय खेल-खेल में और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से पढ़ाती हैं। उनके इस अनूठे शिक्षण के कारण स्कूल में बच्चों के एडमिशन में वृद्धि हुई है और उनकी उपस्थिति तथा सीखने की क्षमता में सुधार हुआ है।
शालिनी वर्तमान में चायल बीआरसी में एकेडमिक रिसोर्स पर्सन के रूप में कार्यरत हैं, जहां उनका मुख्य काम क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना और शिक्षकों तथा विद्यार्थियों की मदद करना है। उन्होंने बताया कि पुरस्कार के लिए आवेदन के बाद शिक्षा विभाग और केंद्रीय मूल्यांकन टीम ने उनके कार्यों का बारीकी से आकलन किया।
देशभर से इस वर्ष कुल 48 शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार मिला है, जिनमें उत्तर प्रदेश के तीन शिक्षक शामिल हैं। कौशांबी के अलावा गाजियाबाद की डॉ. रेनू त्रिपाठी और बलिया के डॉ. इफ्तिखार खान को भी यह सम्मान मिला है।
डॉ. रेनू त्रिपाठी ने विज्ञान को प्रयोगात्मक और तकनीक आधारित तरीकों से विद्यार्थियों तक पहुंचाने में उल्लेखनीय कार्य किया है। बलिया के डॉ. इफ्तिखार खान ने आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए निःशुल्क कला शिक्षा की व्यवस्था की है।
आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर शंकर प्रसाद रथ को उच्च शिक्षा और शोध में योगदान के लिए राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्होंने अपने शिक्षकों, सहकर्मियों और विद्यार्थियों की जिज्ञासा को इस पुरस्कार का कारण बताया।
शिक्षा विभाग ने शालिनी कुशवाहा को इस उपलब्धि पर बधाई दी है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि वे सरकारी स्कूलों के शिक्षकों पर भरोसा करें और बच्चों को बेहतर भविष्य के लिए सरकारी स्कूलों में भेजें।
देश के विभिन्न हिस्सों से पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों ने नवाचार, समावेशी शिक्षण, तकनीक के प्रभावी उपयोग और वंचित वर्ग के बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के लिए उल्लेखनीय योगदान दिया है। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के गबर सिंह बिष्ट ने 35 वर्षों तक दुर्गम क्षेत्रों में शिक्षा को बढ़ावा दिया है।
इस प्रकार, इस वर्ष के राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार ने देश के विभिन्न राज्यों के शिक्षकों की मेहनत और समर्पण को सम्मानित किया है।
यह पुरस्कार उनके शिक्षकों, सहकर्मियों, आईआईटी कानपुर और विशेष रूप से उनके विद्यार्थियों की जिज्ञासा को समर्पित है
प्रो. शंकर प्रसाद रथ, आईआईटी कानपुर प्रोफेसर
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- शालिनी कुशवाहा की शिक्षण पद्धति क्या खास है?
- वे खेल-खेल में और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को पढ़ाती हैं, जिससे बच्चों की उपस्थिति और सीखने की क्षमता में सुधार होता है।
- राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन प्रक्रिया कैसी होती है?
- शिक्षा विभाग और केंद्रीय मूल्यांकन टीम शिक्षकों के कार्यों का बारीकी से आकलन करती है।
- डॉ. रेनू त्रिपाठी ने किस क्षेत्र में योगदान दिया है?
- उन्होंने विज्ञान को प्रयोगात्मक और तकनीक आधारित तरीकों से विद्यार्थियों तक पहुंचाने में उल्लेखनीय कार्य किया है।
- बालिया के डॉ. इफ्तिखार खान ने क्या सेवा की है?
- उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए निःशुल्क कला शिक्षा की व्यवस्था की है।
- राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से जुड़ी शिक्षा विभाग की क्या अपील है?
- अभिभावकों से आग्रह किया गया है कि वे सरकारी स्कूलों के शिक्षकों पर भरोसा करें और बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजें।
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