मायलावास में कस्तूरबा छात्रावास की सड़क चार साल से खराब
करीब डेढ़ किलोमीटर सड़क पर गड्ढे और पत्थर, 200 छात्राओं और ग्रामीणों को दिक्कत
मायलावास गांव में कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास तक जाने वाली सड़क पिछले चार साल से खराब हालत में है, जिससे करीब 200 छात्राओं को आवागमन में समस्या हो रही है। ग्रामीणों ने कई बार अधिकारियों को इसकी जानकारी दी है, लेकिन सड़क की मरम्मत का काम अभी तक नहीं हुआ है।
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बालोतरा। मायलावास गांव में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका छात्रावास और स्कूल तक जाने वाली सड़क चार साल से खराब हालत में है। करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी इस सड़क पर गड्ढे और बिखरे पत्थरों के कारण गाड़ी चलाना मुश्किल हो गया है। करीब 200 छात्राएं रोज इसी रास्ते से स्कूल आती-जाती हैं।
सड़क पर जगह-जगह बड़े पत्थर और कंकड़ बिखरे हैं, जो बड़े वाहनों के गुजरने पर उछलते हैं। इससे छात्राओं के चोटिल होने का खतरा बना रहता है। खराब सड़क के कारण वाहनों के आने-जाने पर धूल भी उड़ती है, जिससे छात्राओं को स्कूल जाते समय परेशानी होती है। बाइक चालकों के लिए यह रास्ता खतरनाक हो गया है और कई बार बाइक असंतुलित होने से हादसे की स्थिति बन जाती है।
ग्रामीणों ने बताया कि सड़क की समस्या को लेकर पिछले करीब सात सालों से लगातार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को कई बार जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन मरम्मत के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- सड़क खराब होने से छात्राओं को क्या परेशानी होती है?
- सड़क पर धूल उड़ने और गड्ढों के कारण छात्राओं को चोटिल होने का खतरा रहता है।
- ग्रामीणों ने सड़क की समस्या कब से बताई है?
- ग्रामीण पिछले लगभग सात सालों से जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को समस्या से अवगत करा रहे हैं।
- बाइक चालकों के लिए सड़क क्यों खतरनाक है?
- सड़क पर उछलते पत्थरों और गड्ढों के कारण बाइक असंतुलित हो कर हादसे का खतरा बढ़ जाता है।
- सड़क सुधार के लिए क्या कार्रवाई हुई है?
- अब तक मरम्मत के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
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