जोधपुर में शेखावत-गहलोत की कांटे की टक्कर
उदयपुर में कांग्रेस को बागियों से खतरा, पाली में राठौड़ के गढ़ में बदलाव
जोधपुर नगर निगम चुनाव में भाजपा के केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच कड़ा मुकाबला चल रहा है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ने विभिन्न वार्डों में टिकट वितरण और जीत के लिए अपनी टीमों को जिम्मेदारी सौंपी है, जबकि जातिगत और क्षेत्रीय वोटों का प्रभावित होना चुनावी परिणाम में अहम भूमिका निभा सकता है।
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जोधपुर। जोधपुर नगर निगम चुनाव में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की प्रतिष्ठा दांव पर है। यहां 100 वार्डों में कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। उदयपुर और पाली में भी चुनावी समीकरण बदल रहे हैं।
जोधपुर में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला कड़ा है। भाजपा से केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और कांग्रेस से तीन बार मुख्यमंत्री रहे अशोक गहलोत की प्रतिष्ठा इस चुनाव में दांव पर लगी है। भाजपा के दो विधायक अतुल भंसाली और देवेंद्र जोशी भी बोर्ड बनाने के लिए अपनी ताकत लगा रहे हैं। टिकट की पैरवी में इस बार विधायकों के साथ केंद्रीय मंत्री की भी भागीदारी रही। जयपुर में टिकट बंटवारे से पहले संभाग की बैठक में गजेंद्र सिंह शेखावत भी शामिल हुए थे।
कांग्रेस में गहलोत के करीबी नेता राजेंद्र सोलंकी और पूर्व विधायक मनीषा पंवार पूरी ताकत के साथ लगे हैं, जबकि चुनावी मैनेजमेंट गहलोत ही संभाल रहे हैं। दोनों पार्टियों ने विधानसभावार जिम्मेदारियां सौंपी हैं, जिसमें टिकट वितरण और जीत की जिम्मेदारी तय की गई है।
सरदारपुरा विधानसभा क्षेत्र के वार्डों की जिम्मेदारी भाजपा ने जेडीए के पूर्व चेयरमैन महेंद्र राठौड़ को दी है, जबकि कांग्रेस से राजेंद्र सोलंकी इसकी कमान संभाल रहे हैं। कांग्रेस की माइनॉरिटी और एससी-एसटी वोटरों में मजबूत पकड़ है, जबकि भाजपा जनरल वोटर के सहारे चुनाव लड़ रही है। ओबीसी वोटर दोनों पार्टियों में बंटा हुआ है।
इस बार एक निगम पर चुनाव होने से कांग्रेस की चुनौतियां बढ़ी हैं क्योंकि पिछली बार दो निगम थे, जिनमें से एक में भाजपा और दूसरे में कांग्रेस का बोर्ड था। तब परिसीमन में वार्डों की सीमा तय करने को लेकर पक्षपात के आरोप लगे थे।
जातिगत प्रभाव की बात करें तो जोधपुर नगर निगम की 25 प्रतिशत सीटों पर जीत-हार ओबीसी वोटर तय करते हैं। दोनों पार्टियों को इस जातिगत वोट बैंक का बराबर लाभ मिलता दिख रहा है। मेयर के लिए ओपन सीट होने से कई बड़े नेता और उनके रिश्तेदार चुनावी मैदान में हैं। भाजपा के पूर्व शहर अध्यक्ष दिनेश भट्ट, सहकारिता प्रदेश संयोजक प्रमोद सामर, पूर्व डिप्टी मेयर पारस सिंघवी और महेंद्र सिंह शेखावत भी चुनावी मैदान में हैं। कांग्रेस से शहर अध्यक्ष फतहसिंह राठौड़ की पत्नी डॉ. पूनम कुंवर और पूर्व मेयर पद प्रत्याशी अरुण टांक शामिल हैं।
भाजपा में उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत, शहर विधायक ताराचंद जैन, ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा और शहर भाजपा अध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़ की प्रतिष्ठा दांव पर है। कांग्रेस से शहरी वार्डों में शहर अध्यक्ष फतहसिंह राठौड़ और ग्रामीण वार्डों में पूर्व सांसद रघुवीर सिंह मीणा पूरी ताकत लगा रहे हैं।
टिकट बंटवारे में भाजपा ने सभी गुटों को साधा है। उदयपुर शहर अध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़, सांसद-विधायकों के करीबी और गुलाबचंद कटारिया गुट के लोगों को भी टिकट मिले हैं। कांग्रेस में रघुवीर मीणा और फतहसिंह राठौड़ ने मिलकर प्रदेश नेताओं की सहमति से टिकट बांटे हैं।
कांग्रेस में करीब 12 बागियों ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पार्टी 22 बागियों में से 10 को मनाने में कामयाब रही, लेकिन 12 बागी अभी भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं। भाजपा में महज एक बागी है, जो उदयपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के विधायक फूलसिंह मीणा के वार्ड से है।
भाजपा नेता सातवीं बार बोर्ड बनाने का दावा कर रहे हैं। कांग्रेस के जिला अध्यक्ष फतहसिंह राठौड़ का कहना है कि आयड़ नदी और 272 प्लॉट घोटाला बड़ा मुद्दा बनेगा और बदलाव होगा।
जातिगत प्रभाव के लिहाज से जोधपुर में जैन और ब्राह्मण वर्ग बड़ा है, जो परंपरागत रूप से एकजुट होकर वोट करता है। इसके बाद मुस्लिम वोटर आते हैं, जो कुछ वार्डों में गणित तय करते हैं।
उदयपुर में 80 वार्ड हैं, जहां भाजपा मजबूत दिख रही है, लेकिन मुकाबला एकतरफा नहीं होगा। यहां दिग्गज नेता और पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के दो दामादों के भाई चुनावी मैदान में हैं।
पाली में 65 वार्ड हैं, जहां भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मदन सिंह राठौड़ की प्रतिष्ठा दांव पर है। हालांकि छह वार्डों में कांग्रेस का कोई प्रत्याशी नहीं है, जिससे भाजपा की चुनौतियां कुछ कम हैं।
जोधपुर, उदयपुर और पाली में कांग्रेस और भाजपा के कई दिग्गज नेता या तो बागी हैं या विरोधी पार्टी से चुनावी मैदान में हैं।
पिछले दिनों हमने देशनोक में 25 वार्डों में भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय प्रत्याशियों के मैदान में होने की खबर छापी थी। इसके अलावा कांग्रेस-भाजपा के पूर्व पार्षद निर्दलीय चुनाव में उतरे हैं।
इस बार दोनों पार्टियों ने वार्ड स्तर पर चुनावी रणनीति को मजबूत किया है और टिकट वितरण में गुटों को साधा है। चुनावी समीकरणों में बदलाव के बीच जोधपुर में शेखावत और गहलोत के बीच कांटे की टक्कर बनी हुई है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- भाजपा और कांग्रेस ने टिकट वितरण कैसे किया?
- दोनों पार्टियों ने विधानसभावार जिम्मेदारी सौंपी और गुटों को साधकर रणनीति बनाई है।
- जातिगत वोटर किस तरह प्रभावित करते हैं चुनाव परिणाम?
- जोधपुर में 25% सीटों पर ओबीसी वोटर निर्णायक हैं, वहीं जैन, ब्राह्मण और मुस्लिम वोटर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- भाजपा और कांग्रेस में बागी उम्मीदवार कितने हैं?
- कांग्रेस में 12 बागी हैं, जिनमें से 10 को मनाने का प्रयास हुआ है; भाजपा में एक ही बागी है।
- अमनोहर मुद्दे क्या हैं जो चुनाव परिणाम प्रभावित कर सकते हैं?
- आयड़ नदी और 272 प्लॉट घोटाला कांग्रेस के लिए चुनावी मुद्दे बने हुए हैं।
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