जयपुर वोटर लिस्ट में राष्ट्रपति, ओबामा और अमरीश पुरी के नाम
दिल्ली में अवैध कब्जाधारियों के नाम वोटर सूची में जुड़ने पर सवाल
जयपुर की मतदाता सूची में ‘राष्ट्रपति’, ‘ओबामा’ और ‘अमरीश पुरी’ जैसे असामान्य नाम शामिल होने से विवाद उत्पन्न हुआ है। वहीं दिल्ली में सिंचाई विभाग की जमीन पर अवैध रूप से रहने वालों के नाम मतदाता सूची में जुड़े हैं, जिससे मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठे हैं।
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जागरण संवाददाता। जयपुर की मतदाता सूची में ‘राष्ट्रपति’, ‘ओबामा’ और ‘अमरीश पुरी’ जैसे नाम शामिल होने से विवाद खड़ा हो गया है। वहीं, दिल्ली में सिंचाई विभाग की जमीन पर अवैध रूप से रहने वालों के नाम मतदाता सूची में जुड़ने को लेकर सवाल उठे हैं।
जयपुर की वोटर लिस्ट में असामान्य नामों के शामिल होने की खबर सामने आई है, जिसमें ‘राष्ट्रपति’, ‘ओबामा’ और ‘अमरीश पुरी’ जैसे नाम भी हैं। इस मामले ने मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दिल्ली में भी मतदाता सूची को लेकर विवाद है। राजधानी के भीतर उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की जमीन पर अवैध रूप से रहने वालों के नाम मतदाता सूची में जुड़ गए हैं। आवेदन फॉर्म में लोगों ने यहीं के पते दिए और उसी पते पर पंजीकरण भी किया गया।
पिछले साल मई में उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने इन अवैध मकानों को तोड़ने के लिए नोटिस जारी किए थे, लेकिन मामला कोर्ट में लंबित है। ओखला विहार, खिज्र बाबा दरगाह, धोबी घाट और चार नंबर ठोकर जैसे इलाकों में लगभग 20 हजार की आबादी इस जमीन पर बसी है, जिनमें करीब 10 हजार मतदाता हैं। SIR प्रक्रिया में इनमें से लगभग छह हजार को मतदाता सूची में शामिल किया गया है।
दक्षिणी पूर्वी जिले के जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. बागड़िया ने कहा कि दस्तावेजों की जांच के बाद ही मामले में टिप्पणी की जा सकेगी। उन्होंने बताया कि SIR प्रक्रिया में केवल यह देखा जाता है कि आवेदन करने वाला फॉर्म में दिए गए पते पर वास्तव में रहता है या नहीं। वह किरायेदार हो, भवन स्वामी हो या झुग्गी में रहता हो, इसका प्रक्रिया पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
जामिया नगर में भी उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की जमीन पर रहने वालों के नाम मतदाता सूची में जुड़े हैं। ज्यादातर लोग उत्तर प्रदेश और बिहार के रहने वाले हैं। जिन लोगों ने वहां की SIR प्रक्रिया में स्वयं को मतदाता पंजीकृत कराया था, केवल उनके नाम सूची से काटे गए हैं।
ओखला विधानसभा क्षेत्र में कुल 3.80 लाख मतदाता पंजीकृत थे, जिनमें 2025 में 2,09,000 ने मतदान किया। SIR प्रक्रिया में लगभग 1,82,000 मतदाताओं के नाम काट दिए गए। शेष 1,98,000 मतदाताओं की सूची में 52,000 में मिसमैच और 19,000 में नो मैचिंग दिख रही है। इससे 71,000 मतदाताओं को लेकर संशय बना हुआ है।
यह क्षेत्र ओखला का हिस्सा है और यहां रहने वाले दिल्ली सरकार की सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं। इस विवाद में सवाल नाम जोड़ने को लेकर नहीं, बल्कि सूची में नाम काटने को लेकर होना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- अवैध रूप से रहने वालों की वोटर सूची में शामिलगी का क्या कारण है?
- आवेदकों ने आवेदन फॉर्म में अवैध बसे हुए अपने पते दिए और उसी पते पर पंजीकरण करवाया, जिससे उनका नाम वोटर लिस्ट में जुड़ गया।
- SIR प्रक्रिया क्या देखती है?
- SIR प्रक्रिया में केवल यह जांच की जाती है कि आवेदन करने वाला फॉर्म में दिए गए पते पर वास्तव में रहता है या नहीं, भले ही वह किरायेदार, भवन स्वामी या झुग्गी में रहता हो।
- उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की जमीन पर निवासियों की संख्या कितनी है?
- लगभग 20 हजार लोग इस जमीन पर रहते हैं, जिनमें करीब 10 हजार मतदाता हैं और लगभग 6 हजार का नाम मतदाता सूची में जोड़ा गया।
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