जयपुर के रामपुरा स्कूल का 18 लाख रुपए से नवनिर्माण शुरू
सीजेपी के विरोध के बाद जर्जर स्कूल की बिल्डिंग गिराकर निर्माण कार्य शुरू हुआ
जयपुर के रामपुरा सरकारी प्राथमिक स्कूल की जर्जर इमारत को गिराकर 18 लाख रुपए की लागत से नए भवन का निर्माण शुरू हो गया है, जिसमें 12 लाख जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट और 6 लाख विधायक कोष से हैं। स्कूल सितंबर 2025 में असुरक्षित घोषित किया गया था और तब से अस्थायी तौर पर भैंसों के बाड़े में संचालित हो रहा था।
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जयपुर के बगरू विधानसभा क्षेत्र में स्थित रामपुरा सरकारी प्राथमिक स्कूल की पुरानी और जर्जर बिल्डिंग को सरकार की ओर से स्वीकृत 18 लाख रुपए की राशि से गिराकर नया भवन बनाना शुरू कर दिया गया है। यह वही स्कूल है जहां 21 अगस्त को कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया था।
सरकार ने करीब 18 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की है, जिसमें डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट से 12 लाख और विधायक कोष से 6 लाख रुपए शामिल हैं। इसके बाद स्कूल की पुरानी बिल्डिंग को धराशायी कर निर्माण कार्य की शुरुआत कर दी गई।
बगरू विधानसभा क्षेत्र के रामपुरा गांव में स्थित इस स्कूल को सितंबर 2025 में असुरक्षित घोषित कर बंद कर दिया गया था। तब से इसमें पढ़ रहे 18 छात्रों के लिए स्थानीय नागरिकों ने दो कमरों और एक टिन शेड की व्यवस्था की थी, जहां स्कूल चल रहा था।
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने बताया कि स्कूल एक भैंसों के बाड़े से चल रहा था। 21 अगस्त को पार्टी के कार्यकर्ता निरीक्षण के लिए पहुंचे थे, लेकिन ग्रामीणों ने उनका विरोध किया और विवाद की स्थिति बन गई थी। रांका और उनके साथियों पर हमला भी हुआ था।
स्कूल शिक्षिका आशा ने कहा कि सरकार ने पहले ही फंड जारी कर दिया था। वहीं, निवासी जगदीश शर्मा ने बताया कि फंड आवंटित हो चुका है और जल्द काम शुरू होगा।
सीजेपी की जॉइंट सेक्रेटरी रेखा शर्मा ने रामपुरा स्कूल के नवनिर्माण के फैसले को पार्टी की बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा कि यह स्कूल पहले भैंसों के बाड़े में संचालित हो रहा था और अब इसका नवनिर्माण होगा। रेखा शर्मा ने कहा कि सरकार यह काम पहले भी कर सकती थी, इसके लिए हिंसा की जरूरत नहीं थी।
ग्रामीण लालचंद शर्मा ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि गांव के जर्जर स्कूल भवन को हटाकर नए सिरे से निर्माण कराया जा रहा है, जो स्वागत योग्य कदम है। उन्होंने कहा कि स्कूल ज्ञान का मंदिर है और इसके नाम पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। पूरा गांव सरकार के इस फैसले से खुश है और निर्माण कार्य में सहयोग करेगा।
ग्रामीणों को उम्मीद है कि नए भवन के बनने के बाद बच्चों को बेहतर और सुरक्षित माहौल में शिक्षा मिलेगी। अब नजर इस बात पर है कि नया भवन कब तक तैयार होता है और बच्चों को कब सुरक्षित स्कूल परिसर मिल पाता है।
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