स्वतंत्र भारद्वाज की याचिका पर हाईकोर्ट ने तुरंत सुनवाई की अनुमति दी
जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान मारपीट मामले में गिरफ्तार हिंदुत्व इन्फ्लुएंसर की हिरासत चुनौती पर फैसला
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्वतंत्र भारद्वाज की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर तुरंत सुनवाई करने की अनुमति दी है, जिसमें उन्होंने अपनी गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताया है। भारद्वाज को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक नाबालिग कार्यकर्ता के पिता के साथ कथित मारपीट के मामले में गिरफ्तार किया गया था और वे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में हैं। अदालत अब दोनों पक्षों की दलीलों को सुनकर मामले में आगे की कार्रवाई करेगी।
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नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक नाबालिग कार्यकर्ता के पिता के साथ कथित मारपीट के मामले में गिरफ्तार स्वतंत्र भारद्वाज की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सोमवार को तत्काल सुनवाई करने की अनुमति दी।
याचिका और सुनवाई
स्वतंत्र भारद्वाज ने अपनी गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की। इस याचिका में उन्होंने अपनी रिहाई की मांग की है। चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की पीठ ने याचिका को उसी दिन सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने की अनुमति दी। भारद्वाज के वकील ने बताया कि वह पिछले कुछ दिनों से हिरासत में हैं और मामले की तत्काल सुनवाई जरूरी है। अदालत अब दोनों पक्षों की दलीलें सुनेगी और गिरफ्तारी से जुड़े कानूनी पहलुओं पर विचार करेगी।
यह मामला जुलाई में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी के एक नाबालिग कार्यकर्ता के पिता के साथ कथित मारपीट से जुड़ा है। भारद्वाज को चार सितंबर को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया गया था और बाद में दिल्ली लाया गया। पुलिस ने इस मामले में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और पॉक्सो अधिनियम के तहत भी धाराएं जोड़ी हैं।
पुलिस की ओर से जांच जारी है और अदालत में पेश किए जाने के बाद भारद्वाज को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
गिरफ्तारी के बाद की स्थिति
भारद्वाज ने एक पॉडकास्ट में दावा किया था कि प्रदर्शन के दौरान उन्होंने नाबालिग कार्यकर्ता के पिता का सिर फोड़ दिया था और राजनीतिक प्रभाव के कारण गिरफ्तारी से बच गए थे। इस वीडियो के वायरल होने के बाद उनके खिलाफ FIR दर्ज कर गिरफ्तारी की गई।
अदालत में मामले की सुनवाई के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका विधिसम्मत नहीं है, क्योंकि उसको 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। स्वतंत्र भारद्वाज के वकील ने तर्क दिया कि उनकी गिरफ्तारी अवैध है, क्योंकि जिस FIR के तहत उन्हें गिरफ्तार किया गया है, उसे सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश में रद्द कर दिया गया है।
दिल्ली पुलिस
भारद्वाज को तिहाड़ जेल में कुछ ‘राष्ट्र-विरोधी तत्वों’ से हमले का खतरा है।
पीयूष जैन, वकील
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- स्वतंत्र भारद्वाज की याचिका पर आगे क्या कार्रवाई हो सकती है?
- अदालत दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद गिरफ्तारी से जुड़े कानूनी पहलुओं पर विचार करेगी और आगे की कार्रवाई तय करेगी।
- स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी को क्यों अवैध बताया जा रहा है?
- उनके वकील का कहना है कि जिस FIR के तहत उन्हें गिरफ्तार किया गया है, उसे सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश में रद्द कर दिया गया है।
- भाद्र्वाज की सुरक्षा को लेकर क्या चिंता जताई गई है?
- उनके वकील ने बताया कि तिहाड़ जेल में उन्हें ‘राष्ट्र-विरोधी तत्वों’ द्वारा हमले का खतरा है।
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