हनुमान अंश के गाने 'जिद पर आ गई पार्वती' में माता पार्वती का दृढ़ संकल्प
यह गीत भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की पौराणिक कथा को बुंदेली लोक-भजन में प्रस्तुत करता है
हनुमान अंश फिल्म का गाना 'जिद पर आ गई पार्वती' माता पार्वती की भगवान शिव से विवाह के प्रति अडिग संकल्प को दर्शाता है। पंजाबी भाषा में प्रस्तुत यह गीत बुंदेली लोक-भजन का स्वाद देता है और श्रीरामचरितमानस के बालकांड की कथा से जुड़ा हुआ है, जिसमें सप्तर्षियों की परीक्षाओं के बावजूद पार्वती का संकल्प नहीं बदलता और आकाशवाणी के बाद उनकी मनोकामना पूरी होती है।
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हनुमान अंश फिल्म का गाना 'जिद पर आ गई पार्वती' सोशल मीडिया पर खूब लोकप्रिय हो रहा है। यह गीत माता पार्वती की तपस्या और भगवान शिव से विवाह के प्रति उनके अटूट संकल्प पर आधारित है। बुंदेली भाषा में यह लोक-भजन कथा का स्वाद देता है और श्रीरामचरितमानस के बालकांड की कथा से जुड़ा है।
गीत में माता पार्वती के संकल्प को 'जिद' के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसमें उन्होंने भगवान शिव को अपना पति मान लिया था। सप्तर्षियों ने पार्वती की परीक्षा लेने के लिए शिव के बारे में नकारात्मक बातें कही, लेकिन पार्वती ने अपना निर्णय नहीं बदला। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह शिव को ही वर स्वीकार करेंगी, चाहे कितने भी जन्म क्यों न लेने पड़ें।
यह तपस्या इतनी कठोर थी कि पार्वती ने अन्न, फल और पत्तों का त्याग कर दिया। उनकी तपस्या के बाद आकाशवाणी हुई कि उनकी मनोकामना पूरी होगी। सप्तर्षियों ने पार्वती को प्रणाम किया और कहा कि वे माया स्वरूपा हैं और शिव भगवान हैं। इसके बाद शिव-पार्वती विवाह की राह खुली, जो पौराणिक कथाओं की सबसे प्रसिद्ध घटनाओं में से एक है।
यह गीत साधु तिवारी द्वारा लिखा, गाया और संगीतबद्ध किया गया है। बुंदेली लोक-भजन के अंदाज में यह कथा लोक रंग और भाव दोनों को जीवंत करता है।
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