सैदुलाजाब में गिरा चार मंजिला मकान, छह की मौत
दिल्ली में अवैध पीजी और जर्जर इमारतों पर कार्रवाई में कमी बनी है
दिल्ली के सैदुलाजाब में 30 मई को चार मंजिला इमारत गिरने से छह लोगों की मौत हुई, जिनमें मेडिकल छात्र भी शामिल थे। इस दुर्घटना के बाद भी अवैध पीजी और जर्जर इमारतों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे हादसे बार-बार हो रहे हैं। प्रशासन और संबंधित विभागों ने कुछ कर्मचारियों को निलंबित या हटाया है, लेकिन व्यापक सुधार नहीं हुआ है।
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सैदुलाजाब। 30 मई को सैदुलाजाब में चार मंजिला इमारत गिरने से छह लोगों की मौत हो गई थी। इसमें मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्र भी शामिल थे। इस हादसे के बाद भी दिल्ली में अवैध पीजी और जर्जर इमारतों पर कार्रवाई नहीं हो पाई है।
दिल्ली सरकार के आदेश पर सैदुलाजाब इलाके के जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति बनी थी, जिसमें एमसीडी, पुलिस और अग्निशमन विभाग के अधिकारी शामिल थे। इस समिति का काम अवैध और जर्जर इमारतों के साथ नियमों के खिलाफ चल रही व्यावसायिक गतिविधियों की पहचान कर उन्हें बंद कराना था।
लेकिन, जिला प्रशासन ने नियमों के विपरित चल रहे पीजी की पहचान कर कार्रवाई नहीं की, जिससे हादसा हुआ। पीजी एक साल से चल रहा था और मरम्मत के नाम पर अंदरखाने बदलाव किए गए थे।
दिल्ली के मुनिरका, कालू सराय, सत्य निकेतन, राजेंद्र नगर, करोल बाग, लक्ष्मी नगर, शकरपुर, पांडव नगर, मुखर्जी नगर, उत्तम नगर जैसे इलाकों में संकरी गलियों में 50-60 गज के मकानों में 20-25 बच्चे रहते हैं। ये पीजी दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों के छात्रों को आवास की सुविधा देते हैं।
30 मई की घटना के बाद 3 जून को हौजरानी में आग लगने से 23 लोगों की मौत हुई थी। एमसीडी समेत दूसरी एजेंसियों को जिम्मेदार पाया गया, लेकिन एमसीडी को छोड़ अन्य विभागों ने कोई कार्रवाई नहीं की।
एमसीडी ने सैदुलाजाब हादसे में जेई और एई को निलंबित किया था, जबकि हौजरानी आग में सहायक निगम स्वास्थ्य निरीक्षक को नौकरी से हटाया गया। दिल्ली पुलिस को भी आदेश के बाद काम न रोकने का जिम्मेदार माना गया।
पर्यटन विभाग को लाइसेंस देते समय वास्तविक स्थिति की जांच न करने और बिजली कंपनी को अवैध हिस्से की बिजली काटने के अनुरोध पर कार्रवाई न करने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया।
इन घटनाओं के बाद भी दिल्ली में कोई सुधार नहीं आया है और अवैध पीजी संचालित हो रहे हैं।
सैदुलाजाब में 30 मई को चार मंजिला इमारत गिरने से छह लोगों की मौत हुई। इसमें मेडिकल के छात्र भी शामिल थे। तीन जून को हौजरानी में आग लगने से 23 लोगों की जान गई। एमसीडी ने सैदुलाजाब हादसे में जेई और एई को निलंबित किया। हौजरानी आग में सहायक निगम स्वास्थ्य निरीक्षक को नौकरी से हटाया गया।
दिल्ली पुलिस, पर्यटन विभाग और बिजली कंपनी को भी जिम्मेदार माना गया, लेकिन अन्य विभागों ने कोई कार्रवाई नहीं की। दिल्ली के कई इलाकों में अवैध पीजी संचालित हो रहे हैं, जहां 20-25 बच्चे रहते हैं। जिला प्रशासन की लापरवाही से हादसे होते रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- सैदुलाजाब हादसे के बाद क्या प्रयास किए गए?
- दिल्ली सरकार ने एक समिति बनाई जिसमें एमसीडी, पुलिस और अग्निशमन विभाग शामिल थे, पर नियम उल्लंघन के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।
- हौजरानी आग लगने के बाद किन अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया गया?
- एमसीडी को ज़िम्मेदार पाया गया और सहायक निगम स्वास्थ्य निरीक्षक को नौकरी से हटाया गया, जबकि अन्य विभागों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
- दिल्ली में अवैध पीजी की समस्या क्या है?
- खासकर संकरी गलियों में 20-25 बच्चे एक साथ रहते हैं जिनमें कई दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र शामिल हैं, मगर प्रशासन की लापरवाही से पीजी पर नियंत्रण नहीं हो पाया।
- पर्यटन और बिजली विभागों की क्या भूमिका रही है?
- पर्यटन विभाग ने लाइसेंस देते समय असली स्थिति नहीं जानी और बिजली कंपनी ने अवैध हिस्से की बिजली काटने के अनुरोध पर कार्रवाई नहीं की।
- क्या दिल्ली पुलिस की भी कोई जवाबदेही रही?
- हाँ, दिल्ली पुलिस को आदेश के बाद कार्रवाई न करने का जिम्मेदार माना गया है।
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