स्वरा भास्कर के जौहर बयान पर विवाद, राजवीर सर और करणी सेना ने जताई आपत्ति
अभिनेत्री ने फिल्म पद्मावत के जौहर दृश्य पर सवाल उठाए, करणी सेना ने भाषा सुधारने को कहा
अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने फिल्म "पद्मावत" में महिलाओं के जौहर पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा चित्रण यौन हिंसा झेल चुकी महिलाओं को गलत संदेश दे सकता है। इस पर राजवीर सर और करणी सेना की कीर्ति राठौड़ ने कड़ी आपत्ति जताई, स्वरा की भाषा सुधारने की मांग की, और जौहर को इतिहास के संदर्भ में देखने की बात कही।
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अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने फिल्म पद्मावत में महिलाओं को जौहर करते दिखाए जाने पर सवाल उठाए। इस बयान पर राजवीर सर ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और करणी सेना की महिला विंग की अध्यक्ष कीर्ति राठौड़ ने स्वरा से अपनी भाषा सुधारने को कहा। विवाद में दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी बात रखी।
स्वरा भास्कर ने दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि फिल्म में करीब 800 महिलाओं को जौहर करते हुए दिखाया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी महिला के साथ यौन हिंसा होती है और वह जिंदा रहने का फैसला करती है, तो क्या उसे कायर माना जाना चाहिए। स्वरा ने बताया, "फिल्म में महिलाओं को जौहर करते दिखाने से मुझे यह सवाल परेशान करता था कि इससे यौन हिंसा झेल चुकी महिलाओं को क्या संदेश जाता है।" उन्होंने कहा कि उनके पत्र का मकसद यह कहना था कि किसी महिला की पहचान सिर्फ उसके शरीर या निजी अंगों से नहीं होती।
उन्होंने स्वरा के बयान पर कड़ा सवाल उठाते हुए पद्मिनी के जौहर को सम्मान और गरिमा से जोड़कर अपनी बात रखी।
करणी सेना की महिला विंग की राष्ट्रीय अध्यक्ष कीर्ति राठौड़ ने कहा, "किसी को भी सनातन परंपराओं या राजपूत महिलाओं से जुड़े बलिदानों के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।" राठौड़ ने बताया कि जौहर जैसी ऐतिहासिक प्रथाओं को उस दौर की परिस्थितियों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए, जब वे घटित हुई थीं।
कुछ लोगों का कहना है कि जौहर को आज के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए क्योंकि उस समय युद्ध और बंदी बनाए जाने का खतरा अलग तरह का था। इतिहास में जौहर को सामूहिक आत्मदाह की प्रथा के रूप में बताया गया है, जो मुख्य रूप से युद्ध के समय राजपूत महिलाओं से जुड़ी है। जब किसी किले की हार तय मानी जाती थी और महिलाओं के बंदी बनाए जाने, हिंसा या गुलामी का डर होता था, तब सामूहिक रूप से आग में प्रवेश करने की परंपरा का उल्लेख मिलता है। यह सामान्य समय की कोई धार्मिक या रोजमर्रा की परंपरा नहीं थी।
स्वरा ने कहा कि फिल्म में 'जौहर' के चित्रण ने उन्हें सोचने पर मजबूर किया कि यह फिल्म बलात्कार का शिकार हुई और उसके बाद जिंदा बचीं महिलाओं को क्या संदेश दे सकती है। उन्होंने साफ किया कि उन्होंने रानी पद्मावती या जौहर करने वाली महिलाओं को कायर नहीं कहा था, बल्कि उनकी आपत्ति उस दृश्य के संदेश से थी। उन्होंने अपनी बात को गलत तरीके से पेश किए जाने पर अफसोस जताया।
स्वरा को अपनी भाषा में सुधार करना चाहिए.
कीर्ति राठौड़, करणी सेना महिला विंग की राष्ट्रीय अध्यक्ष
किसी इंसान के लिए सिर्फ जिंदा रहना ही जरूरी नहीं, बल्कि सम्मान के साथ जीवन जीना भी मायने रखता है
राजवीर सर
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