बूंदी के नैनवां वार्ड में देवरानी-जेठानी के बीच मुकाबला
वार्ड नंबर 4 में 11 सितंबर को मतदान, 952 मतदाता तय करेंगे जीत
बूंदी के नैनवां नगर पालिका वार्ड नंबर 4 में देवरानी नीतू मारवाड़ा (निर्दलीय) और जेठानी मोनिका मारवाड़ा (कांग्रेस) के बीच मुकाबला है, जबकि भाजपा ने वैशाली को टिकट दिया है। दोनों परिवार के सदस्य हैं और चुनाव विकास के एजेंडे पर हो रहा है। वोटिंग 11 सितंबर को होगी।
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बूंदी। बूंदी जिले के नैनवां नगर पालिका के वार्ड नंबर 4 में इस बार चुनाव परिवार के दो सदस्यों के बीच दिलचस्प मुकाबला है। देवरानी नीतू मारवाड़ा भाजपा से निर्दलीय और जेठानी मोनिका मारवाड़ा कांग्रेस से चुनाव लड़ रही हैं। 11 सितंबर को मतदान होगा।
वार्ड नंबर 4 में इस बार मुकाबला किसी बाहरी प्रत्याशी से नहीं, बल्कि एक ही परिवार की देवरानी और जेठानी के बीच है। मोनिका मारवाड़ा कांग्रेस के टिकट पर मैदान में हैं, जबकि नीतू मारवाड़ा भाजपा से टिकट न मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ रही हैं।
दोनों परिवारों के बीच सामान्य पारिवारिक संबंध हैं और वे एक-दूसरे के यहां आना-जाना भी करते हैं। पति अंकित मारवाड़ा ने बताया कि यह लड़ाई रिश्तों की नहीं, विचारधारा की है।
वार्ड में कुल 952 मतदाता हैं जो इस अनोखे मुकाबले का फैसला करेंगे। कागजों पर मुकाबला त्रिकोणीय है क्योंकि भाजपा ने यहां वैशाली को टिकट दिया है।
दोनों प्रत्याशी शिक्षित हैं और विकास के एजेंडे पर वोट मांग रही हैं। मोनिका बीकॉम शिक्षित हैं और उनके तीन पुत्र हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस ने चयन प्रक्रिया के बाद उन्हें प्रत्याशी बनाया है।
नीतू के पति अंकित मारवाड़ा ने बताया कि वार्ड से नीतू का टिकट के लिए आवेदन किया गया था, लेकिन पार्टी ने उन्हें प्रत्याशी नहीं बनाया। इसके बाद समर्थकों और वार्डवासियों के समर्थन के आधार पर नीतू ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया।
अंकित ने कहा कि उनका परिवार लंबे समय से भाजपा की विचारधारा से जुड़ा रहा है। वर्ष 1990 से 1995 तक उनकी माता मुना देवी भाजपा के टिकट पर वार्ड पार्षद निर्वाचित हुई थीं और बाद में मेला संयोजक की जिम्मेदारी भी संभाली।
मोनिका के पति विनोद मारवाड़ा व्यापारी हैं और लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े हैं। दोनों बहुएं अपने-अपने परिवार की जिम्मेदारियों के साथ चुनाव मैदान में सक्रिय हैं।
दोनों प्रत्याशियों का कहना है कि वार्ड के विकास और लोगों की समस्याओं को प्राथमिकता देना उनके चुनावी एजेंडे में है।
चुनावी गणित कागजों पर त्रिकोणीय मुकाबले का संकेत देता है, लेकिन राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र देवरानी नीतू और जेठानी मोनिका ही बनी हुई हैं।
पूर्व कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी और पूर्व मंत्री एवं मौजूदा कांग्रेस विधायक अशोक चांदना समेत दोनों दलों के नेता क्षेत्र में जनसभाओं और जनसंपर्क के जरिए अपने-अपने प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हैं।
रिश्ते अपनी जगह, राजनीति अपनी जगह: परिवार के स्तर पर किसी प्रकार का विवाद नहीं है। दोनों का कहना है कि मतदाता अपने विवेक से फैसला करेंगे और चुनावी प्रतिस्पर्धा को पारिवारिक विवाद से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- नीतू मारवाड़ा ने निर्दलीय क्यों चुनाव लड़ा?
- भाजपा ने नीतू को टिकट नहीं दिया, जिसके बाद उन्होंने समर्थकों और वार्डवासियों के समर्थन से चुनाव लड़ा।
- दोनों प्रत्याशियों का चुनावी एजेंडा क्या है?
- दोनों विकास को प्राथमिकता देते हैं और वार्ड की समस्याओं का समाधान करना चाहते हैं।
- क्या परिवार में चुनाव को लेकर कोई विवाद है?
- दोनों ने स्पष्ट किया है कि परिवारिक विवाद नहीं है और चुनावी प्रतिस्पर्धा विचारधारा पर आधारित है।
- राजनीतिक दलों के नेता कैसे चुनाव प्रचार में शामिल हैं?
- पूर्व मंत्री प्रभुलाल सैनी और अशोक चांदना सहित दोनों दलों के नेता जनसभाओं और जनसंपर्क के जरिए प्रचार कर रहे हैं।
- मोनिका मारवाड़ा की शिक्षा और पारिवारिक स्थिति क्या है?
- मोनिका बीकॉम शिक्षित हैं और उनके तीन पुत्र हैं।
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