भाजपा-कांग्रेस ने बूंदी के सभी नगर निकायों में जीत के दावे किए
दोनों पार्टियों ने चुनाव की रणनीति और प्राथमिकताएं बताईं
बूंदी के नगर निकाय चुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही सभी नगर निकायों में जीत का दावा कर रही हैं। भाजपा अपने संगठन और कार्यकर्ताओं की ताकत को जीत का कारण बता रही है, जबकि कांग्रेस स्थानीय विकास, टैक्स में कटौती और शहरी व्यवस्था सुधार को अपना प्राथमिक मुद्दा मान रही है।
AI-निर्मित सार · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
बूंदी। बूंदी में 2026 के नगर निकाय चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। जिले के तीनों विधायक कांग्रेस के हैं, लेकिन भाजपा जिला प्रभारी इंद्रमल सेठिया ने एक नगर परिषद और सात नगरपालिकाओं में भाजपा का बोर्ड बनने का दावा किया है।
प्रभारी इंद्रमल सेठिया ने कहा कि बूंदी आने के बाद उन्होंने जिले के राजनीतिक इतिहास और मौजूदा परिस्थितियों का आकलन किया। उन्होंने बताया, "जिले में भले ही तीनों विधायक कांग्रेस के हैं, लेकिन निकाय चुनाव में भाजपा अपने कार्यकर्ताओं की ताकत के दम पर जीत हासिल करेगी।" उन्होंने बूंदी जिले के भाजपा कार्यकर्ताओं को उत्साही, मेहनती और पार्टी के प्रति वफादार बताया।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष महावीर मीणा ने कहा कि कांग्रेस पूरे जिले में एकजुट होकर चुनाव लड़ रही है और सभी नगर निकायों में कांग्रेस का बोर्ड बनेगा। उन्होंने बताया, "कांग्रेस के बोर्ड बनने पर आम लोगों से जुड़े चार काम प्राथमिकता के आधार पर किए जाएंगे।" मीणा ने कहा कि गरीबों को राहत देने के लिए कांग्रेस शासन में चल रही 500 रुपए में पट्टा योजना को फिर से लागू किया जाएगा।
मीणा ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार बदलने के बाद शहरों में विकास के काम ठप हो गए हैं। उन्होंने बताया कि भाजपा सरकार ने यूडी टैक्स में काफी बढ़ोतरी की है, जबकि कांग्रेस के बोर्ड बनने पर यूडी टैक्स को कम कर तर्कसंगत किया जाएगा ताकि आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।
उन्होंने बूंदी की पहचान पर्यटन नगरी के रूप में बताते हुए कहा कि गंदगी और अव्यवस्था के कारण शहर की छवि प्रभावित हुई है। कांग्रेस बोर्ड बनने पर शहर को साफ-सुथरा बनाने और उसकी पर्यटन पहचान को विश्व स्तर पर मजबूत करने पर काम किया जाएगा।
मीणा ने स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि कांग्रेस के बोर्ड बनने पर इसे दुरुस्त करने को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने बताया कि ऐसे चेयरमैन को प्राथमिकता दी जाएगी जिनकी सोच लोकतांत्रिक हो और जो गरीब व पिछड़े वर्गों के हितों को सर्वोपरि मानते हों।
निकाय चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस के दावों के बीच चुनावी मुकाबला दिलचस्प होता दिख रहा है। भाजपा अपने संगठन और कार्यकर्ताओं की ताकत को जीत का आधार बता रही है, जबकि कांग्रेस स्थानीय मुद्दों और विकास के एजेंडे के सहारे मतदाताओं तक पहुंचने की तैयारी में है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- भाजपा ने बूंदी निकाय चुनाव में अपनी जीत का आधार क्या बताया?
- इंद्रमल सेठिया ने कहा कि भाजपा अपने कार्यकर्ताओं की ताकत के दम पर जीत हासिल करेगी।
- कांग्रेस की प्रमुख प्राथमिकताएं निकाय चुनाव जीतने पर क्या होंगी?
- कांग्रेस आम लोगों से जुड़े चार काम प्राथमिकता के आधार पर करेगी, जिसमें शहर को साफ-सुथरा बनाना शामिल है।
- कांग्रेस ने यूडी टैक्स को लेकर क्या योजना बनाई है?
- कांग्रेस के बोर्ड बनने पर यूडी टैक्स को कम कर तर्कसंगत किया जाएगा ताकि आम जनता पर आर्थिक बोझ न पड़े।
- भाजपा और कांग्रेस के चुनावी रणनीतियों में क्या फर्क है?
- भाजपा संगठन और कार्यकर्ताओं की ताकत पर भरोसा करती है, जबकि कांग्रेस स्थानीय मुद्दों और विकास एजेंडे पर ज्यादा फोकस कर रही है।
AI-निर्मित · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
50 free articles left today
0 of 50 free reads used today.
पाठकों की पसंद





Comments
0 threadsNo approved comments yet. Start the discussion.