बालोतरा में एक सप्ताह से तापमान स्थिर, बारिश का इंतजार
गर्मी और उमस से लोगों को परेशानी, खरीफ फसलों पर संकट बढ़ा
बालोतरा और आसपास के क्षेत्रों में पिछले एक सप्ताह से तापमान स्थिर बना हुआ है, जबकि मानसून कमजोर रहने से खरीफ फसलों पर असर पड़ा है। मौसम विभाग ने 12 से 14 सितंबर के बीच पूर्वानुमानित बौछारों की संभावना जताई है, लेकिन फिलहाल अच्छी बारिश नहीं हुई है। किसानों को बारिश का इंतजार है ताकि फसलों और पशुधन के लिए राहत मिल सके।
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बालोतरा। बालोतरा और आसपास के इलाके में पिछले एक सप्ताह से तापमान में ज्यादा बदलाव नहीं आया है। दिन का अधिकतम तापमान 35 से 37 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है और न्यूनतम 26 से 27 डिग्री के बीच दर्ज किया गया। इस दौरान धूप और उमस के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
गर्मी के कारण दोपहर के समय बाजारों और मुख्य मार्गों पर आवाजाही कम रही और सन्नाटा पसरा नजर आया। मानसून की बेरुखी का असर ग्रामीण इलाकों में सबसे ज्यादा दिख रहा है, जिससे खरीफ फसलों की बढ़वार रुक गई है। किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं क्योंकि बारिश होने पर उन्हें राहत मिलने की संभावना है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 12 से 14 सितंबर के बीच पश्चिमी राजस्थान में मेघगर्जन और बिजली चमकने के साथ बूंदाबांदी हो सकती है। हालांकि बालोतरा सहित पश्चिमी राजस्थान में फिलहाल बारिश की संभावना छिटपुट है, इसलिए किसानों को अच्छी बारिश के लिए इंतजार करना होगा।
राज्य में नए मौसम तंत्र के प्रभाव से 11 सितंबर से बारिश की गतिविधियां बढ़ने के संकेत मिले हैं। लंबे समय से बारिश न होने के कारण ग्रामीण इलाकों में खरीफ फसलों पर संकट गहरा गया है। सावन में अपेक्षित बारिश न होने के बाद भादवा में भी मानसून कमजोर बना हुआ है।
बारिश के लंबे अंतराल से खेतों की नमी कम हो रही है, जिससे बाजरा, मूंग, मोठ और ग्वार जैसी फसलों पर संकट बढ़ गया है। किसानों को फसल के साथ-साथ पशुधन के लिए चारे की भी चिंता सताने लगी है। आगामी दिनों में मौसम साफ रहने और बारिश की संभावना न होने से अन्नदाताओं की चिंताएं बढ़ गई हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- बारिश की कमी से किस प्रकार की फसलों को नुकसान हो रहा है?
- बाजरा, मूंग, मोठ और ग्वार जैसी फसलों पर नमी की कमी के कारण संकट बढ़ रहा है।
- बारिश न होने से किसानों को और क्या समस्याएं हो रही हैं?
- पशुधन के लिए चारे की कमी की चिंता भी किसानों को सताने लगी है।
- सावन और भादवा महीनों में मानसून कैसा रहा?
- सावन में अपेक्षित बारिश न होने के बाद भादवा में भी मानसून कमजोर बना हुआ है।
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