35 साल बाद हनुमानगढ़ में हत्या का आरोपी गाजियाबाद से गिरफ्तार
35 साल से फरार आरोपी रमेश दुबे को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया
हनुमानगढ़ के रामपुर मझिला गांव में 1991 में हुई हत्या के आरोपी रमेश दुबे को पुलिस ने 35 साल बाद गाजियाबाद से गिरफ्तार किया है। रमेश दुबे ने अपनी पहचान छिपाकर फरार रहते हुए फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र भी दाखिल किया था, लेकिन हाल ही में उसकी पिटारी हुई और कोर्ट में पेश किया गया।
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हनुमानगढ़। हनुमानगढ़ के इंदरगढ़ थाना क्षेत्र के रामपुर मझिला गांव से जुड़ा 35 साल पुराना हत्या का मामला सुलझ गया है। पुलिस ने फरार आरोपी रमेश दुबे को गाजियाबाद से गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया है।
हत्या का मामला और फरार आरोपी
30 जुलाई 1991 को ठठिया थाना क्षेत्र के नथुआपुर गांव में रमेश दुबे ने अपनी बहन की ननद के घर आए मोची की हत्या कर दी थी। इस मामले में रमेश दुबे और किशन तिवारी आरोपी थे। किशन तिवारी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन रमेश दुबे फरार हो गया। उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज था और कोर्ट ने कुर्की वारंट भी जारी किया था।
रमेश दुबे ने अपनी पहचान छिपाकर अलग-अलग जगहों पर रहना शुरू किया और पुलिस की तलाश से बचता रहा। उसके परिवार ने उसे मृत साबित करने के लिए फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र कोर्ट में पेश किया था। करीब साढ़े तीन दशक तक फरार रहने के दौरान वह पुलिस की गतिविधियों की जानकारी हासिल करता रहा।
गिरफ्तारी और जांच
कुछ महीने पहले रमेश दुबे खुद कोतवाली पहुंचा और एक मुकदमा दर्ज कराया, जिससे पुलिस को पता चला कि वह जिंदा है। इसके बाद पुलिस ने पुराने रिकॉर्ड और जमीन विवाद के मुकदमे से सुराग जुटाकर उसकी पहचान की पुष्टि की।
पुलिस ने गाजियाबाद में कार्रवाई कर रमेश दुबे को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। इस गिरफ्तारी को पुलिस ने बड़ी सफलता बताया है। वहीं, किशन तिवारी की जमानत पर बाहर आने के बाद मौत हो गई।
हनुमानगढ़ सदर थाना इलाके में पिता-पुत्र ने शराब पीने के बाद हुए विवाद में अपने साथी अमित कुमार की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। मृतक के भाई ने सदर थाने में हत्या का मामला दर्ज कराया है।
मृतक अमित कुमार 3 यूटीएस का रहने वाला था
राजीव रॉयल, थानाधिकारी
पूछताछ में आरोपी राजेश ने बताया कि अमित ने उसे थप्पड़ मारा था
राजीव रॉयल, सीआई
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- रमेश दुबे को आखिरकार गिरफ्तार करने में पुलिस को कैसे सफलता मिली?
- कुछ महीने पहले रमेश दुबे खुद कोतवाली पहुंचा था और एक मामला दर्ज कराया था, जिससे पुलिस को उसकी मौजूदगी का पता चला और पुराने रिकॉर्ड व जमीन विवाद के मुकदमे से उसकी पहचान की पुष्टि हुई।
- रमेश दुबे ने अपनी गिरफ्तारी से पहले कैसे पुलिस की निगरानी से बचा था?
- वह अपनी पहचान छिपाकर अलग-अलग जगहों पर रह रहा था और पुलिस की गतिविधियों की जानकारी जुटाता रहा, साथ ही परिवार ने उसके लिए फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र भी कोर्ट में प्रस्तुत किया था।
- अब गिरफ्तार रमेश दुबे का क्या होगा?
- पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश किया है, जहां आगे की कानूनी कार्रवाई होगी।
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