सवाई माधोपुर से 30वीं पैदल यात्रा शुरू, श्रद्धालु रणथंभौर के लिए निकले
श्री चारभुजा नाथ मंदिर से निकली यात्रा में 80 किलोमीटर तीन दिन में तय होंगे
सवाई माधोपुर के सारसोप कस्बे से श्री त्रिनेत्र गणेश जी महाराज के दर्शन के लिए 30वीं पैदल यात्रा शुरू हुई है, जिसमें श्रद्धालु करीब 80 किलोमीटर की दूरी तीन दिनों में तय करेंगे। यात्रा में पहले दिन मोरपा, दूसरे दिन चकेरी और तीसरे दिन गणेश धाम में विश्राम होगा, इसके बाद श्रद्धालु रणथंभौर पहुंचकर भगवान के दर्शन करेंगे। यह यात्रा धार्मिक आस्था के साथ क्षेत्र की संस्कृति और सांप्रदायिक सद्भावना को बढ़ावा देने का एक माध्यम है।
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सवाई माधोपुर। सवाई माधोपुर के सारसोप कस्बे से श्री त्रिनेत्र गणेश जी महाराज के दर्शनों के लिए 30वीं पैदल यात्रा शुरू हुई। इस धार्मिक यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और हाथों में ध्वज लेकर जयकारे लगाते हुए रणथंभौर के लिए पैदल निकले।
यात्रा की शुरुआत श्री चारभुजा नाथ मंदिर से आचार्य गौरीशंकर शास्त्री की पूजा-अर्चना के साथ हुई। श्रद्धालुओं ने उत्साह और आस्था के साथ इस परंपरा को निभाया। यह यात्रा धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांप्रदायिक सद्भावना और क्षेत्र की संस्कृति को बढ़ावा देने का संदेश देती है।
यात्रा के आयोजक रमेश सोनी ने बताया कि यह 30वीं पैदल यात्रा है, जो करीब 80 किलोमीटर की दूरी तीन दिन में पूरी होगी। पहले दिन श्रद्धालु मोरपा में, दूसरे दिन चकेरी में और तीसरे दिन गणेश धाम में रुकेंगे। तीन दिन पैदल चलने के बाद वे रणथंभौर पहुंचकर त्रिनेत्र गणेश जी के दर्शन करेंगे।
यात्रा शुरू होने के समय श्रद्धालुओं में काफी उत्साह था और गणेश जी के जयकारों से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं का कहना है कि यह यात्रा हर साल आस्था और श्रद्धा के साथ निकाली जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- पैदल यात्रा की शुरुआत कहाँ से हुई?
- पैदल यात्रा की शुरुआत श्री चारभुजा नाथ मंदिर से आचार्य गौरीशंकर शास्त्री की पूजा-अर्चना के साथ हुई।
- पैदल यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- यह यात्रा धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांप्रदायिक सद्भावना और क्षेत्र की संस्कृति को बढ़ावा देने का संदेश देती है।
- श्रद्धालु यात्रा के अंतिम दिन कहाँ पहुँचेंगे?
- तीन दिन पैदल चलने के बाद श्रद्धालु रणथंभौर पहुँचेंगे और त्रिनेत्र गणेश जी के दर्शन करेंगे।
- यात्रा में श्रद्धालुओं का क्या उत्साह रहा?
- यात्रा शुरू होने के समय श्रद्धालुओं में काफी उत्साह था और गणेश जी के जयकारों से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया।
- यात्रा किस प्रकार की परंपरा है?
- श्रद्धालु बताते हैं कि यह यात्रा हर साल आस्था और श्रद्धा के साथ निकाली जाती है।
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