नेपाल में बाढ़ से 1344 लोगों की मौत, राहत कार्य जारी
26 अगस्त की बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई इलाकों को प्रभावित किया
नेपाल में आई बाढ़ और हिमस्खलन में अब तक 1344 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 4216 लापता हैं। भारत ने राहत और बचाव कार्यों के लिए 11 सदस्यीय राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल की तकनीकी टीम नेपाल भेजी है जो स्थानीय दलों के साथ बचाव कार्यों में जुटी है। बाढ़ से आर्थिक नुकसान के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में संपर्क व्यवस्था और जीवनयापन भी प्रभावित हुआ है।
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एक नज़र में
- नेपाल में 26 अगस्त को आई बाढ़ और हिमस्खलन में अब तक 1344 लोगों की मौत हो चुकी है।
- भारत ने राहत और बचाव कार्य में मदद के लिए 11 सदस्यीय तकनीकी टीम भेजी है।
- बाढ़ से पर्यटन क्षेत्र को 50 अरब नेपाली रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।
- अब तक 1252 शव बरामद हुए हैं, जिनमें से केवल 95 की पहचान की जा सकी है।
- लगभग 4216 लोग अभी भी लापता हैं, जिनमें कई विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- नेपाल में बाढ़ कब आई थी?
- नेपाल में बाढ़ 26 अगस्त को आई थी।
- भारत ने नेपाल की मदद के लिए क्या किया है?
- भारत ने राहत और बचाव कार्य में मदद के लिए 11 सदस्यीय तकनीकी टीम नेपाल भेजी है।
- नेपाल में बाढ़ का सबसे बड़ा आर्थिक नुकसान किस क्षेत्र को हुआ है?
- बाढ़ से नेपाल के पर्यटन क्षेत्र को 50 अरब नेपाली रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।
- अब तक कितने शव बरामद और कितनी पहचान हुई है?
- अब तक 1252 शव बरामद किए गए हैं, जिनमें से 95 की पहचान की जा सकी है।
- लापता लोगों की संख्या कितनी है?
- लगभग 4216 लोग अभी भी लापता हैं।
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26 अगस्त को नेपाल में आई अचानक बाढ़ ने उत्तरी और मध्य क्षेत्र के कई कस्बों और गांवों को अपनी चपेट में ले लिया। नेपाल पुलिस के अनुसार इस आपदा में अब तक 1344 लोगों की मौत हो चुकी है। भारत ने राहत और बचाव कार्य में मदद के लिए 11 सदस्यीय तकनीकी टीम भेजी है।
बाढ़ की तबाही और बचाव कार्य
नेपाल में आई बाढ़ और हिमस्खलन ने हजारों घरों, दुकानों और कृषि भूमि को तबाह कर दिया है। कई इलाकों में मलबे और कीचड़ के बीच अब भी लोगों की तलाश जारी है। राहत और बचाव दल मलबे के नीचे दबे लोगों को खोजने में लगे हैं, जो अभी भी सुरक्षित नहीं हैं।
भारत की 11 सदस्यीय राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल की तकनीकी टीम रसुवा जिले के चिलिमे हाइड्रोपावर प्लांट में तैनात है। यह टीम स्थानीय बचाव दलों के साथ मिलकर रस्सियों के जरिए बचाव और कीचड़ से भरी सुरंगों के अंदर लोगों की तलाश कर रही है।
नेपाल में बाढ़ की शुरुआत नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हिमस्खलन के बाद हुई थी। बाढ़ का पानी कई इलाकों से उतरने लगा है, लेकिन तबाही के निशान अभी भी साफ दिखाई दे रहे हैं। प्रभावित परिवारों के लिए सुरक्षित ठिकाने और रोजी-रोटी की समस्या बनी हुई है।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
बाढ़ ने नेपाल के पर्यटन क्षेत्र को भारी नुकसान पहुंचाया है। पर्यटन कारोबार को 50 अरब नेपाली रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। 142 होटल, 57 रेस्तरां और 141 वाहन प्रभावित हुए हैं। कई प्रमुख ट्रेकिंग मार्ग भी बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुए हैं।
स्थानीय बाजारों और छोटे कारोबारों पर निर्भर परिवारों की रोजी-रोटी बाढ़ से प्रभावित हुई है। मलबे के कारण दुकानें और मकान दब गए हैं, जिससे कारोबार ठप हो गया है। खेतों में मलबा भर जाने से खेती भी प्रभावित हुई है और अगली फसल की तैयारी मुश्किल हो गई है।
सड़क, पुल और संपर्क व्यवस्था को नुकसान पहुंचने से प्रभावित क्षेत्रों तक सामान पहुंचाना महंगा और कठिन हो गया है।
लापता लोगों की तलाश और शवों की पहचान
नेपाल के विदेश मंत्रालय की जानकारी के अनुसार, आपदा प्रभावित क्षेत्रों से अब तक 1252 शव बरामद किए जा चुके हैं, जिनमें से केवल 95 की पहचान कर परिवारों को सौंपा गया है। करीब 4216 लोग अभी भी लापता हैं, जिनमें बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की भी है।
काठमांडू में परिजन लापता लोगों की तस्वीरें और पहचान संबंधी जानकारी के जरिए अपनों का सुराग खोज रहे हैं। बरामद शवों की पहचान के लिए डीएनए नमूने भी लिए जा रहे हैं।
हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम करने वाले कई श्रमिक भी लापता बताए गए हैं। चार सितंबर को एक हाइड्रोपावर सुरंग से दो श्रमिकों को जिंदा निकाले जाने से राहत कार्य में उम्मीद जगी है।
यह टीम स्थानीय बचाव दलों के साथ मिलकर उन जगहों पर तलाशी अभियान चला रही है, जहां लोगों के दबे होने की आशंका है।
राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल अधिकारी, तकनीकी टीम सदस्य
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