13 सितंबर 2026: वराह जयंती पर द्वितीया तिथि और शुभ मुहूर्त
भाद्रपद शुक्ल द्वितीया तिथि, हस्त नक्षत्र, चंद्रोदय-चंद्रास्त का समय
13 सितंबर 2026 को भाद्रपद शुक्ल द्वितीया तिथि है, जो वराह जयंती के रूप में मनाई जाती है। इस दिन विभिन्न शुभ मुहूर्त जैसे ब्रह्म मुहूर्त, अभिजीत मुहूर्त, विजय मुहूर्त और निशिता मुहूर्त होते हैं, और सूर्य, चंद्र एवं बुध ग्रहों का नक्षत्र गोचर होगा। पृथ्वी रक्षा के लिए भगवान विष्णु के वराह अवतार की कथा के साथ श्रीमद्भागवत पुराण और विष्णु सहस्रनाम पाठ की परंपरा होती है।
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आज द्वितीया तिथि। 13 सितंबर 2026 को भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है, जो शाम 07:08 बजे तक रहेगी। इस दिन वराह जयंती और चंद्र दर्शन भी होंगे। सूर्योदय सुबह 06:05 बजे और सूर्यास्त शाम 06:29 बजे होगा।
दिन की शुरुआत शुक्ल योग से हुई, जो दोपहर 01:42 बजे तक रहेगा। कौलव करण सुबह 07:08 बजे तक है। इस दिन किसी ग्रह का राशि गोचर नहीं होगा, लेकिन सूर्य, चंद्र और बुध नक्षत्र गोचर करेंगे। सुबह 10:47 बजे बुध ग्रह हस्त नक्षत्र में प्रवेश करेगा, इसके बाद दोपहर 01:06 बजे चंद्रमा चित्रा नक्षत्र में जाएगा। अंत में सूर्य रात 09:53 बजे उ फाल्गुनी नक्षत्र में प्रवेश करेगा।
आज का राहुकाल शाम 04:56 बजे से शुरू होगा। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:32 से 05:19 बजे तक रहेगा, अभिजीत मुहूर्त 11:52 से 12:42 बजे तक है। विजय मुहूर्त दोपहर 02:21 से 03:10 बजे तक रहेगा, जबकि निशिता मुहूर्त रात 11:54 बजे से 14 सितंबर के 00:40 बजे तक है।
चंद्रमा का उदय सुबह 08:06 बजे होगा और चंद्रास्त शाम 07:31 बजे होगा। इस दिन भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर पृथ्वी की रक्षा की थी और असुर हिरण्याक्ष का वध किया था। श्रीमद्भागवत पुराण के तीसरे स्कंध का पाठ और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने की परंपरा है। रविवार व्रत में सूर्य देव की पूजा और अर्घ्य देना शुभ माना जाता है।
दिनभर के शुभ मुहूर्त देखकर कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है। अलग-अलग पंचांग पद्धतियों के अनुसार तिथि और समय में मामूली अंतर हो सकता है। यह जानकारी दिए गए पंचांग के आधार पर तैयार की गई है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- वराह जयंती पर कौन-कौन से धार्मिक पाठ किए जाते हैं?
- इस दिन श्रीमद्भागवत पुराण के तीसरे स्कंध और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने की परंपरा है।
- इस दिन चंद्रमा किस नक्षत्र में रहेगा?
- दोपहर 01:06 बजे चंद्रमा चित्रा नक्षत्र में जाएगा।
- वराह अवतार का महत्त्व क्या है?
- भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर पृथ्वी की रक्षा की और असुर हिरण्याक्ष का वध किया था।
- इस दिन शुभ मुहूर्त कब-कब आते हैं?
- ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:32 से 05:19, अभिजीत मुहूर्त 11:52 से 12:42, विजय मुहूर्त 02:21 से 03:10, निशिता मुहूर्त रात 11:54 से अगले दिन 00:40 तक रहता है।
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