पाटोदी में 122 समाजबंधुओं ने चार दिन का प्रशिक्षण पूरा किया
प्राथमिक प्रशिक्षण शिविर में कर्तव्य पालन और क्षत्र धर्म पर जोर दिया गया
पाटोदी में श्री जवाहर राजपूत छात्रावास संस्थान में क्षत्रिय युवक संघ का चार दिन का प्राथमिक प्रशिक्षण शिविर संपन्न हुआ, जिसमें करीब 122 समाजबंधुओं ने संगठन, अनुशासन और क्षत्र धर्म के महत्व को सीखा। शिविर में अनुशासन, संस्कार, इतिहास, नशामुक्ति और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया और सभी ने संघ के प्रति समर्पण का संकल्प लिया।
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बालोतरा। पाटोदी में श्री जवाहर राजपूत छात्रावास संस्थान में क्षत्रिय युवक संघ का चार दिन का प्राथमिक प्रशिक्षण शिविर संपन्न हुआ। इस दौरान करीब 122 समाजबंधुओं ने संगठन, अनुशासन और क्षत्र धर्म के महत्व को समझा।
शिविर में अनुशासन, संगठन, क्षत्र धर्म, संस्कार, इतिहास, महापुरुषों के जीवन, समाज सेवा, नशामुक्ति, पर्यावरण संरक्षण और स्वावलंबन जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया। समापन समारोह में सभी शिविरार्थियों ने संघ के प्रति समर्पण का संकल्प लिया।
प्रमुख मूलसिंह चांदेसरा ने कहा, "दुनिया में भागदौड़ की मुख्य वजह कर्तव्य से दूर भागना है।" उन्होंने बताया कि जीवन का कोई तय मकसद होना चाहिए, नहीं तो जीना और मरना एक जैसा है। पूज्य तनसिंहजी समेत अन्य महापुरुषों का जीवन क्षात्र धर्म के पालन के लिए समर्पित रहा।
उन्होंने कहा कि शिविर में कृत्रिम माहौल में क्षात्र धर्म पालन का वातावरण बनाया गया, लेकिन बाहरी माहौल व्यवहार के खिलाफ है, इसलिए मिली सीख को लगातार याद रखना जरूरी है। शिविर से मिली प्रेरणा को जीवन में बनाए रखने के लिए नियमित शाखा में जाना चाहिए।
कार्यक्रम में बालोतरा संभाग प्रमुख मूलसिंह काठाड़ी, बालोतरा प्रांत प्रमुख गोविंदसिंह गुगड़ी समेत आसपास के गांवों के कई समाजबंधु मौजूद थे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- प्रशिक्षण शिविर में किन विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया?
- शिविर में नशामुक्ति, पर्यावरण संरक्षण, स्वावलंबन समेत कई विषयों पर प्रशिक्षण हुआ।
- प्रमुख मूलसिंह चांदेसरा ने क्या खास बात कही?
- उन्होंने कहा कि जीवन का मकसद होना जरूरी है और कृत्रिम माहौल में क्षत्र धर्म पालन का अभ्यास होना चाहिए।
- शिविर से मिली प्रेरणा को कैसे बनाए रखना चाहिए?
- प्रेरणा को बनाए रखने के लिए नियमित शाखा में जाना आवश्यक है।
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