बीकानेर में महिलाओं ने श्रद्धा से मनाया ऊब छठ पर्व
महिलाओं ने निर्जला व्रत रख परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की लंबी उम्र की कामना की
बीकानेर के महाजन और आसपास के गांवों में 2 सितंबर को ऊब छठ पर्व मनाया गया, जहां महिलाओं और कन्याओं ने निर्जला व्रत रखकर सूर्यास्त से चंद्र दर्शन तक पारंपरिक पूजा-अर्चना की। पूजा के बाद महिलाओं ने चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत तोड़ा और परिवार की खुशहाली की कामना की।
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बीकानेर। बीकानेर के महाजन क्षेत्र और आसपास के गांवों में 2 सितंबर को ऊब छठ पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया। महिलाओं और कन्याओं ने दिनभर निर्जला व्रत रखा और सूर्यास्त से चंद्रमा के दर्शन तक खड़े रहकर पारंपरिक पूजा-अर्चना की।
सुबह से ही घरों में पूजा की तैयारियां शुरू हो गई थीं। महिलाएं पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार भगवान और चंद्रदेव की आराधना करती रहीं। शाम ढलने के बाद सभी की निगाहें चंद्र दर्शन पर टिकी रहीं। चंद्रमा के उदय होते ही महिलाओं और बच्चियों ने दूध और जल का अर्घ्य अर्पित किया। इसके बाद छलनी से चंद्रमा के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर व्रत का पारण किया गया।
महाजन के रिद्धि सिद्धि विनायक मंदिर के पुजारी कृष्ण कांत स्वामी ने मंदिर परिसर में कथा का वाचन किया। जसरासर के पारीक चौक स्थित मुरली मनोहर जी मंदिर में सूर्यास्त के बाद से लेकर चंद्रमा के दर्शन तक महिलाएं और कन्याएं लगातार खड़ी रहीं। इस दौरान महिलाएं भजनों पर नृत्य भी करती रहीं और मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल में डूबा रहा।
नोखा में भी महिलाएं निर्जला व्रत रखकर सूर्यास्त से चंद्र दर्शन तक खड़ी रहीं। श्रीकृष्ण मंदिर में रात करीब 9 बजे व्रत कथा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं भक्ति भाव में लीन होकर कथा सुनती रहीं। कथा व्यास पंडित पुरुषोत्तम महाराज ने व्रत की धार्मिक महत्ता और परंपराओं के बारे में जानकारी दी।
पूजा पूरी होने के बाद महिलाएं व्रत खोलकर फलाहार करती रहीं। इस पर्व के दौरान सभी ने परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की लंबी उम्र और मंगलमय जीवन की कामना की।
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