गंगापुर में मंगलवार को वत्स द्वादशी का व्रत रखा जाएगा
सर्वार्थ सिद्धि योग और राज योग में गौ माता व बछड़े की पूजा से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है
गंगापुर सिटी और नदबई में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की द्वादशी को वत्स द्वादशी या गोवत्स द्वादशी के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन गाय माता और बछड़े की पूजा-अर्चना की जाती है, जिससे घर में सुख और समृद्धि बनी रहती है। महिलाओं द्वारा व्रत रखकर संतान की लंबी आयु और सुखी जीवन की कामना की जाती है।
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गंगापुर सिटी। गंगापुर सिटी में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की द्वादशी को वत्स द्वादशी कहा जाता है। इस बार मंगलवार के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और राज योग में वत्स द्वादशी का व्रत रखा जाएगा। इस दिन गाय माता और बछड़े की विधि विधान से पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
पंचांग के अनुसार इस दिन पुष्य नक्षत्र और प्रदोष व्रत का शुभ संयोग रहेगा। चंद्र-गुरु की युति कर्क राशि में होने से गजकेसरी योग का निर्माण होगा। शुक्र के स्वराशि तुला में मालव्य योग भी बनेगा।
नदबई में मंगलवार को बछ बारस का त्योहार श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया। इसे गोवत्स द्वादशी और वसु बारस के नाम से भी जाना जाता है। इस अवसर पर कस्बे की पंजाबी कॉलोनी सहित विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं ने व्रत रखकर गौ माता और बछड़े की पूजा-अर्चना की।
महिलाओं ने गौ माता को बेसन से निर्मित लड्डू और चने की दाल खिलाई। पंडित अशोक शर्मा ने बताया कि बछ बारस का व्रत विशेष रूप से महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु और सुखी जीवन की कामना से रखती हैं।
गोवत्स द्वादशी की परंपरा के अनुसार इस दिन गो माता और उसके बछड़े को स्नान कराया जाता है। उनके माथे पर सिंदूर और कुमकुम का तिलक लगाया जाता है। इसके बाद फूलों की माला पहनाकर नए वस्त्र ओढ़ाए जाते हैं। पूजा के दौरान चावल, तिल और जल मिलाकर गो माता के पैर धोने की परंपरा भी निभाई जाती है।
इस मौके पर सोनिया शर्मा, ऋचा शर्मा, सीमा अरोड़ा, दिव्या अरोड़ा, राधा बत्रा, सुनीता बड़ेजा, रेखा अरोड़ा, प्राची खंडूजा, प्रिया मेंहदीरत्ता, जया गेरा और बीना खंडूजा मौजूद थे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- वत्स द्वादशी व्रत क्यों रखा जाता है?
- यह व्रत घर में सुख-समृद्धि और संतान की लंबी आयु के लिए रखा जाता है।
- बछ बारस त्योहार किन इलाकों में मनाया गया?
- यह त्योहार नदबई में पंजाबी कॉलोनी सहित विभिन्न क्षेत्रों में मनाया गया।
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