पाली हाईवे पर अनोखी भक्ति, लकड़ी के डंडों पर चलकर भक्त पहुंच रहे रामदेवरा
सरवड़ी से निकले श्रद्धालु 10 दिन से 3 इंच ऊपर संतुलन बनाकर यात्रा कर रहे हैं
पाली हाईवे पर एक भक्त लकड़ी के डंडों और खड़ाऊ के सहारे जमीन से करीब 3 इंच ऊपर संतुलन बनाकर 10 दिनों से बाबा रामदेवरा की पदयात्रा कर रहा है। श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने पर यह संकल्प लेकर यात्रा कर रहे हैं और स्थानीय लोग इसे चमत्कार मानते हैं। बाबा रामदेवजी को हिंदू मुसलमान दोनों समुदायों के लोग पूजते हैं और वे सामाजिक एकता के प्रतीक हैं।
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पाली। पाली हाईवे पर लोक देवता बाबा रामदेवजी के प्रति श्रद्धालुओं की अनोखी आस्था देखने को मिली। सरवड़ी से एक भक्त लकड़ी के बांस के डंडों और खड़ाऊ के सहारे करीब 3 इंच ऊपर संतुलन बनाकर 10 दिन से पैदल यात्रा कर रहा है। आसपास के लोग उसकी भक्ति को चमत्कार मान रहे हैं।
सरवड़ी से बाबा रामदेवरा धाम के लिए निकले पदयात्रियों का संघ गहरी श्रद्धा और अटूट विश्वास का उदाहरण पेश कर रहा है। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं कड़कड़ाती धूप में भी थके बिना “खम्मा-खम्मा ओ रामापीर” और “बाबा के जयकारों” के साथ आगे बढ़ रहे हैं। भक्तों के चेहरे पर थकान का कोई निशान नहीं दिखता।
यह भक्त लकड़ी के डंडों और खड़ाऊ के सहारे जमीन से करीब 3 इंच ऊपर संतुलन बनाकर चल रहा है, जो हर किसी के बस की बात नहीं। इस अनोखी यात्रा को देखने के लिए आसपास के लोग भीड़ लगाते हैं और इसे बाबा रामदेवजी का चमत्कार मानते हैं।
श्रद्धालु ने बताया कि मनोकामना पूरी होने पर उन्होंने यह संकल्प लिया था। 10 दिन के कठिन सफर के बाद वह जल्द ही रामदेवरा धाम पहुंचकर बाबा के दरबार में हाजिरी लगाएंगे और मन्नत उतारेंगे।
लोक देवता बाबा रामदेवजी को पीरो के पीर भी कहा जाता है। यहां 36 कौम के लोग दर्शन के लिए आते हैं। बाबा रामदेवजी ने जाति-पाति और धर्म के भेदभाव को मिटाकर समाज को एक सूत्र में पिरोने का काम किया था। उन्हें हिंदू विष्णु का अवतार माना जाता है, जबकि मुस्लिम समाज उन्हें ‘रामसा पीर’ के रूप में पूजता है।
भक्तों का दृढ़ विश्वास है कि बाबा के दरबार से कोई खाली हाथ नहीं लौटता और सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है। उनकी कृपा, सामाजिक सद्भाव और शरणागत की रक्षा के कारण उनका स्थान सदियों से जन-जन के हृदय में सर्वोपरि है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- लकड़ी के डंडों पर चलने वाले श्रद्धालु का संकल्प क्या है?
- उन्होंने मनोकामना पूरी होने पर यह कठिन यात्रा करने का संकल्प लिया है।
- पदयात्रा में कौन-कौन शामिल हैं?
- पदयात्रा में बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं शामिल हैं जो धूप में भी थके बिना चल रहे हैं।
- बाबा रामदेवजी का सामाजिक प्रभाव क्या है?
- उन्होंने जाति, पाति और धर्म के भेदभाव को मिटाकर समाज को एक सूत्र में पिरोने का कार्य किया।
- भक्त बाबा के दरबार से क्या उम्मीद करते हैं?
- भक्तों का विश्वास है कि बाबा के दरबार से कोई खाली हाथ नहीं लौटता और हर मनोकामना पूरी होती है।
- भक्तों की इस अनोखी यात्रा को लोग कैसे देखते हैं?
- आसपास के लोग इसे बाबा रामदेवजी का चमत्कार मान रहे हैं और देखने के लिए भीड़ लगाते हैं।
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